केसीआर और रेवंत रेड्डी परिवार की संपत्ति जांच को बीआरएस तैयार, केटीआर ने न्यायिक निगरानी की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव (केटीआर) ने 17 सितंबर 2026 को हैदराबाद में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी — दोनों के परिवारों की संपत्तियों की जन्म से लेकर अब तक की न्यायिक जांच कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने माँग की कि यह जांच किसी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में हो, न कि किसी एसआईटी या सरकार-नियुक्त समिति के तहत।
विवाद की पृष्ठभूमि
केटीआर की यह प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के उस बयान के जवाब में आई, जो उन्होंने तेलंगाना विधानसभा में दिया था। उस बयान में मुख्यमंत्री ने केसीआर और उनके परिवार की भूमि-संपत्तियों की जांच कराने की घोषणा की थी। केटीआर ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि यदि जांच की नीयत सच्ची है, तो वे तुरंत किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में जांच के लिए सहमत हों।
यह टकराव राष्ट्रीय एकीकरण दिवस के अवसर पर तेलंगाना भवन में तिरंगा फहराने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान सार्वजनिक हुआ। केटीआर ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे किसी भी निष्पक्ष जांच से नहीं घबराते।
केसीआर की संपत्ति पर केटीआर का पक्ष
केटीआर ने दावा किया कि उनके पिता केसीआर का जन्म 1954 में एक जमींदार परिवार में हुआ था। उनके अनुसार, चिंतमडाका में परिवार का घर लगभग दो एकड़ में फैला था और पूर्वजों के पास सैकड़ों एकड़ जमीन थी। उन्होंने बताया कि परिवार की मूल संपत्ति कोनापुर क्षेत्र में थी।
केटीआर ने कहा कि 1930 के दशक में एक सिंचाई परियोजना के लिए कुछ भूमि अधिग्रहित की गई थी और मुआवजे की राशि से केसीआर के पिता ने चिंतमडाका में जमीन खरीदी। उन्होंने तर्क दिया कि 72 वर्षों में परिवार के पास अब मात्र 67 एकड़ जमीन है — और यह संपत्ति में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि कमी का संकेत है।
उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि रेवंत रेड्डी पहले '1,000 एकड़ के फार्महाउस' का दावा करते थे, लेकिन विधानसभा में उन्होंने खुद स्वीकार किया कि जमीन 67 एकड़ है। केटीआर ने कहा, 'यदि बाकी 933 एकड़ जमीन मिल जाए, तो हम उसे सरकार को सौंपने के लिए तैयार हैं।'
विधानसभा निलंबन और शासन पर हमला
केटीआर ने आरोप लगाया कि जवाबदेही से बचने के लिए बीआरएस विधायक दल को अलोकतांत्रिक तरीके से विधानसभा से निलंबित किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ मिलकर विपक्ष की अनुपस्थिति में सदन की कार्यवाही चलाने का आरोप भी लगाया।
उन्होंने सरकार को मानसून सत्र एक महीने बढ़ाने और निलंबन वापस लेने की खुली चुनौती दी। केटीआर ने कहा, 'हम न केवल आंखों में आंखें डालकर बात करेंगे, बल्कि महालक्ष्मी योजना के तहत ₹2,500, ₹4,000 पेंशन, निर्बाध बिजली, सिंचाई, रायतु बंधु और रायतु बीमा बंद किए जाने जैसे मुद्दों पर जवाब भी मांगेंगे।'
रेवंत रेड्डी के भाषण पर प्रतिक्रिया
केटीआर ने मुख्यमंत्री के ढाई घंटे लंबे विधानसभा भाषण को 'अज्ञानता का बड़ा उदाहरण' करार देते हुए कहा कि उसमें न कोई सिर था और न कोई पैर। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के कई पुराने आरोप — जैसे प्रगति भवन में 150 बेडरूम और सोने के बाथरूम, या एकीकृत सचिवालय के नीचे गुप्त सुरंगें — अब पूरी तरह गलत साबित हो चुके हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री से केसीआर के खिलाफ कथित झूठे प्रचार और आरोपों के लिए सार्वजनिक माफी मांगने की भी माँग की और कहा कि उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को गरिमा के साथ व्यवहार करना चाहिए।
आगे क्या होगा
बीआरएस की न्यायिक जांच की माँग और कांग्रेस सरकार की जवाबी चुनौती के बीच तेलंगाना की राजनीति में तनाव और गहराने के संकेत हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी न्यायिक निगरानी वाली जांच के प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, या विधानसभा में अपनी घोषित जांच को आगे बढ़ाते हैं। राज्य में मानसून सत्र का विस्तार और बीआरएस विधायकों का निलंबन मुद्दा दोनों पक्षों के बीच अगले कुछ दिनों में और तेज हो सकता है।