17 सितंबर 2026
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केसीआर और रेवंत रेड्डी परिवार की संपत्ति जांच को बीआरएस तैयार, केटीआर ने न्यायिक निगरानी की मांग की

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केसीआर और रेवंत रेड्डी परिवार की संपत्ति जांच को बीआरएस तैयार, केटीआर ने न्यायिक निगरानी की मांग की

सारांश

बीआरएस के केटीआर ने केसीआर और रेवंत रेड्डी दोनों परिवारों की संपत्ति पर न्यायिक जांच की खुली चुनौती दे डाली — और साथ में यह भी कहा कि 72 साल में पूर्वजों की सैकड़ों एकड़ जमीन घटकर 67 एकड़ रह गई। तेलंगाना में राजनीतिक तापमान एक नए शिखर पर है।

मुख्य बातें

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटीआर ने 17 सितंबर 2026 को केसीआर और रेवंत रेड्डी दोनों परिवारों की संपत्तियों की जन्म से अब तक न्यायिक जांच की माँग की।
केटीआर ने कहा — जांच किसी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में हो, एसआईटी से नहीं।
केसीआर के पास 1954 में जन्म के समय से पैतृक जमींदारी थी; अब परिवार के पास मात्र 67 एकड़ जमीन है, जो पहले सैकड़ों एकड़ थी।
रेवंत रेड्डी के '1,000 एकड़ फार्महाउस' के दावे को खारिज करते हुए केटीआर ने कहा — खुद मुख्यमंत्री ने विधानसभा में 67 एकड़ स्वीकार किया।
बीआरएस ने सरकार को मानसून सत्र एक महीने बढ़ाने और बीआरएस विधायक दल का निलंबन वापस लेने की चुनौती दी।
केटीआर ने महालक्ष्मी योजना ₹2,500 , ₹4,000 पेंशन , रायतु बंधु और रायतु बीमा बंद होने पर सरकार से जवाब माँगा।

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव (केटीआर) ने 17 सितंबर 2026 को हैदराबाद में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी — दोनों के परिवारों की संपत्तियों की जन्म से लेकर अब तक की न्यायिक जांच कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने माँग की कि यह जांच किसी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में हो, न कि किसी एसआईटी या सरकार-नियुक्त समिति के तहत।

विवाद की पृष्ठभूमि

केटीआर की यह प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के उस बयान के जवाब में आई, जो उन्होंने तेलंगाना विधानसभा में दिया था। उस बयान में मुख्यमंत्री ने केसीआर और उनके परिवार की भूमि-संपत्तियों की जांच कराने की घोषणा की थी। केटीआर ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि यदि जांच की नीयत सच्ची है, तो वे तुरंत किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में जांच के लिए सहमत हों।

यह टकराव राष्ट्रीय एकीकरण दिवस के अवसर पर तेलंगाना भवन में तिरंगा फहराने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान सार्वजनिक हुआ। केटीआर ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे किसी भी निष्पक्ष जांच से नहीं घबराते।

केसीआर की संपत्ति पर केटीआर का पक्ष

केटीआर ने दावा किया कि उनके पिता केसीआर का जन्म 1954 में एक जमींदार परिवार में हुआ था। उनके अनुसार, चिंतमडाका में परिवार का घर लगभग दो एकड़ में फैला था और पूर्वजों के पास सैकड़ों एकड़ जमीन थी। उन्होंने बताया कि परिवार की मूल संपत्ति कोनापुर क्षेत्र में थी।

केटीआर ने कहा कि 1930 के दशक में एक सिंचाई परियोजना के लिए कुछ भूमि अधिग्रहित की गई थी और मुआवजे की राशि से केसीआर के पिता ने चिंतमडाका में जमीन खरीदी। उन्होंने तर्क दिया कि 72 वर्षों में परिवार के पास अब मात्र 67 एकड़ जमीन है — और यह संपत्ति में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि कमी का संकेत है।

उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि रेवंत रेड्डी पहले '1,000 एकड़ के फार्महाउस' का दावा करते थे, लेकिन विधानसभा में उन्होंने खुद स्वीकार किया कि जमीन 67 एकड़ है। केटीआर ने कहा, 'यदि बाकी 933 एकड़ जमीन मिल जाए, तो हम उसे सरकार को सौंपने के लिए तैयार हैं।'

विधानसभा निलंबन और शासन पर हमला

केटीआर ने आरोप लगाया कि जवाबदेही से बचने के लिए बीआरएस विधायक दल को अलोकतांत्रिक तरीके से विधानसभा से निलंबित किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ मिलकर विपक्ष की अनुपस्थिति में सदन की कार्यवाही चलाने का आरोप भी लगाया।

उन्होंने सरकार को मानसून सत्र एक महीने बढ़ाने और निलंबन वापस लेने की खुली चुनौती दी। केटीआर ने कहा, 'हम न केवल आंखों में आंखें डालकर बात करेंगे, बल्कि महालक्ष्मी योजना के तहत ₹2,500, ₹4,000 पेंशन, निर्बाध बिजली, सिंचाई, रायतु बंधु और रायतु बीमा बंद किए जाने जैसे मुद्दों पर जवाब भी मांगेंगे।'

रेवंत रेड्डी के भाषण पर प्रतिक्रिया

केटीआर ने मुख्यमंत्री के ढाई घंटे लंबे विधानसभा भाषण को 'अज्ञानता का बड़ा उदाहरण' करार देते हुए कहा कि उसमें न कोई सिर था और न कोई पैर। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के कई पुराने आरोप — जैसे प्रगति भवन में 150 बेडरूम और सोने के बाथरूम, या एकीकृत सचिवालय के नीचे गुप्त सुरंगें — अब पूरी तरह गलत साबित हो चुके हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री से केसीआर के खिलाफ कथित झूठे प्रचार और आरोपों के लिए सार्वजनिक माफी मांगने की भी माँग की और कहा कि उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को गरिमा के साथ व्यवहार करना चाहिए।

आगे क्या होगा

बीआरएस की न्यायिक जांच की माँग और कांग्रेस सरकार की जवाबी चुनौती के बीच तेलंगाना की राजनीति में तनाव और गहराने के संकेत हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी न्यायिक निगरानी वाली जांच के प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, या विधानसभा में अपनी घोषित जांच को आगे बढ़ाते हैं। राज्य में मानसून सत्र का विस्तार और बीआरएस विधायकों का निलंबन मुद्दा दोनों पक्षों के बीच अगले कुछ दिनों में और तेज हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह सिर्फ एक राजनीतिक 'कॉल ब्लफ' है जो विधानसभा में चल रही बहस को अदालत की ओर मोड़ने की कोशिश है। तेलंगाना में भूमि-स्वामित्व हमेशा से राजनीतिक ताकत का प्रतीक रहा है — और 67 एकड़ बनाम 1,000 एकड़ की यह संख्या-लड़ाई दर्शाती है कि दोनों पक्ष तथ्यों से ज्यादा कथाओं की लड़ाई लड़ रहे हैं। बीआरएस विधायकों का निलंबन और महालक्ष्मी जैसी योजनाओं पर सवाल — यह असल जनहित के मुद्दे हैं, जो संपत्ति विवाद की आड़ में दब जाने का जोखिम उठा रहे हैं।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केटीआर ने केसीआर परिवार की संपत्ति पर न्यायिक जांच की माँग क्यों की?
केटीआर ने यह माँग मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के उस बयान के जवाब में की, जिसमें उन्होंने विधानसभा में केसीआर के परिवार की जमीनों की जांच की घोषणा की थी। केटीआर ने कहा कि यदि जांच होनी ही है, तो दोनों परिवारों की मौजूदा हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की निगरानी में होनी चाहिए।
केसीआर के पास कितनी जमीन है और इस पर विवाद क्या है?
केटीआर के अनुसार, केसीआर के परिवार के पास वर्तमान में केवल 67 एकड़ जमीन है, जो उनके जमींदार पूर्वजों की सैकड़ों एकड़ भूमि से काफी कम है। रेवंत रेड्डी पहले '1,000 एकड़ के फार्महाउस' का दावा करते थे, लेकिन खुद उन्होंने विधानसभा में 67 एकड़ का आँकड़ा स्वीकार किया।
बीआरएस विधायकों को विधानसभा से क्यों निलंबित किया गया?
केटीआर के अनुसार, बीआरएस विधायक दल को अलोकतांत्रिक तरीके से निलंबित किया गया ताकि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाबदेही से बच सके। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने भाजपा के साथ मिलकर विपक्ष की अनुपस्थिति में विधानसभा की कार्यवाही चलाई।
केटीआर ने तेलंगाना सरकार पर कौन-कौन से चुनावी वादे न पूरे करने के आरोप लगाए?
केटीआर ने आरोप लगाया कि महालक्ष्मी योजना के तहत ₹2,500, ₹4,000 पेंशन, निर्बाध बिजली आपूर्ति, सिंचाई, रायतु बंधु और रायतु बीमा जैसे वादे 1,000 दिनों के शासन के बाद भी पूरे नहीं हुए। उन्होंने इसे प्रशासनिक विफलता और ठहराव का स्पष्ट प्रमाण बताया।
केसीआर की पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या है और संपत्ति कहाँ से आई?
केटीआर के अनुसार, केसीआर का जन्म 1954 में एक जमींदार परिवार में हुआ था और उनके पूर्वजों के पास कोनापुर क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ जमीन थी। 1930 के दशक में सिंचाई परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद मिले मुआवजे से केसीआर के पिता ने चिंतमडाका में जमीन खरीदी, जहाँ बाद में परिवार बस गया।
राष्ट्र प्रेस
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