13 अगस्त 2026
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रायडुर्ग 'विरासत' भूमि नीलामी पर बीआरएस का विरोध, हरीश राव ने रेवंत रेड्डी को लिखा पत्र

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रायडुर्ग 'विरासत' भूमि नीलामी पर बीआरएस का विरोध, हरीश राव ने रेवंत रेड्डी को लिखा पत्र

सारांश

बीआरएस नेता हरीश राव ने हैदराबाद के रायडुर्ग में 10.63 एकड़ विरासत भूमि की नीलामी पर तत्काल रोक की माँग की है — वह ज़मीन जिस पर SBI का स्वामित्व दावा है, हाईकोर्ट में मामला लंबित है और खुद मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 2020 में इसकी सुरक्षा के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था।

मुख्य बातें

हरीश राव ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को पत्र लिखकर 17 और 21 अगस्त की नीलामी तत्काल रोकने की माँग की।
विवादित भूमि रायडुर्ग, पनमक्था गाँव में 10.63 एकड़ है, जिसे सर्वे नंबर 83 के तहत विरासत स्थल घोषित किया जा चुका है।
इसी सर्वे नंबर की 6.2 एकड़ ज़मीन पहले ₹237 करोड़ प्रति एकड़ की दर से नीलाम हो चुकी है; एसबीआई का स्वामित्व दावा तेलंगाना उच्च न्यायालय में लंबित है।
हरीश राव ने याद दिलाया कि 2020 में रेवंत रेड्डी ने खुद इसी ज़मीन की सुरक्षा के लिए अदालत का रुख किया था।
बीआरएस ने वक्फ रिकॉर्ड के कथित तौर पर गायब होने और स्वामित्व विवाद की स्वतंत्र जाँच की माँग की है।

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के तेलंगाना विधानसभा में उपनेता टी. हरीश राव ने हैदराबाद के आईटी कॉरिडोर के प्रमुख इलाके रायडुर्ग में 10.63 एकड़ कथित 'विरासत' भूमि की प्रस्तावित नीलामी तत्काल रोकने की माँग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को पत्र लिखकर 17 और 21 अगस्त को निर्धारित नीलामी पर रोक लगाने का आग्रह किया है।

मुख्य आरोप और विवाद की पृष्ठभूमि

पूर्व मंत्री हरीश राव ने आरोप लगाया कि तेलंगाना में गाचीबोवली, लागाचार्ला, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी क्षेत्र और रायडुर्ग सहित विभिन्न स्थानों की सार्वजनिक भूमि को बेचने की कोशिश हो रही है। उन्होंने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विपक्ष में रहते हुए इन्हीं सरकारी ज़मीनों को 'पूर्वजों की विरासत और राष्ट्रीय संपत्ति' बताकर इनके संरक्षण की वकालत की थी।

हरीश राव ने कहा कि हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की पर्यावरणीय भूमि से लेकर रायडुर्ग की विरासत वाली चट्टानी ज़मीन तक, तेलंगाना की बहुमूल्य सार्वजनिक संपत्तियाँ खतरे में हैं।

कानूनी पेचीदगियाँ और स्वामित्व विवाद

बीआरएस नेता ने बताया कि तेलंगाना इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन (TGIIC) द्वारा रायडुर्ग के पनमक्था गाँव में जिस 10.63 एकड़ भूमि की नीलामी प्रस्तावित है, उसका सर्वे नंबर 83 पहले से विरासत स्थल घोषित है। इस ज़मीन पर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और वक्फ बोर्ड से जुड़े स्वामित्व दावे भी कानूनी जाँच के दायरे में हैं।

उन्होंने बताया कि इसी सर्वे नंबर की 6.2 एकड़ ज़मीन पहले करीब ₹237 करोड़ प्रति एकड़ की दर से नीलाम की जा चुकी है। इसके बाद एसबीआई ने इस ज़मीन पर स्वामित्व का दावा किया और मामला अभी तेलंगाना उच्च न्यायालय में लंबित है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला

हरीश राव ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय भी ऐसे विवादित मामलों में तीसरे पक्ष के अधिकार पैदा होने से रोकने की आवश्यकता पर ज़ोर दे चुका है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2020 में स्वयं रेवंत रेड्डी ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाकर रायडुर्ग की इन ज़मीनों की सुरक्षा की माँग की थी। हरीश राव ने सवाल किया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद अब वह ऐसे विवादित भूखंड की नीलामी की अनुमति कैसे दे सकते हैं।

बीआरएस की माँगें

हरीश राव ने माँग की कि सरकार पहले ज़मीन के वैध स्वामित्व और कानूनी स्थिति को स्पष्ट करे। जब तक स्वामित्व का अंतिम निर्धारण न हो, तब तक नीलामी, हस्तांतरण, पंजीकरण और विकास गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने विरासत संपत्ति से जुड़े गायब, गलत जगह रखे गए या छेड़छाड़ किए गए रिकॉर्ड की स्वतंत्र जाँच और संरक्षण की भी माँग की।

उन्होंने पहले हुई 6.2 एकड़ की नीलामी, एसबीआई के स्वामित्व दावे, तेलंगाना उच्च न्यायालय में लंबित मामले और वक्फ रिकॉर्ड के कथित तौर पर गायब होने की स्वतंत्र जाँच कराने की माँग की। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब तेलंगाना में भूमि आवंटन और सरकारी संपत्तियों के प्रबंधन पर राजनीतिक तनाव पहले से बढ़ा हुआ है।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की सरकार की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। 17 अगस्त की पहली नीलामी तिथि नज़दीक होने के साथ, यह देखना होगा कि तेलंगाना उच्च न्यायालय में लंबित मामले और बीआरएस के राजनीतिक दबाव का नीलामी प्रक्रिया पर क्या असर पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो नीलामी की जल्दबाज़ी प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि जानबूझकर की गई चूक का संकेत देती है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि इस ज़मीन पर SBI, वक्फ बोर्ड और सरकार — तीनों के दावे एक साथ खड़े हैं, जो किसी भी नीलामी को भविष्य में लंबे कानूनी विवाद में उलझा सकती है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रायडुर्ग विरासत भूमि विवाद क्या है?
हैदराबाद के रायडुर्ग, पनमक्था गाँव में सर्वे नंबर 83 की 10.63 एकड़ ज़मीन को विरासत स्थल घोषित किया जा चुका है। इस ज़मीन की तेलंगाना इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन द्वारा 17 और 21 अगस्त को नीलामी प्रस्तावित है, जिस पर बीआरएस ने आपत्ति जताई है।
इस ज़मीन पर स्वामित्व का विवाद क्यों है?
इसी सर्वे नंबर की 6.2 एकड़ ज़मीन पहले करीब ₹237 करोड़ प्रति एकड़ की दर से नीलाम हो चुकी है, जिसके बाद एसबीआई ने स्वामित्व दावा किया और मामला तेलंगाना उच्च न्यायालय में लंबित है। इसके अलावा वक्फ बोर्ड से जुड़े दावे भी कानूनी जाँच में हैं।
बीआरएस ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर क्या आरोप लगाए हैं?
हरीश राव ने आरोप लगाया कि रेवंत रेड्डी ने विपक्ष में रहते हुए इन्हीं ज़मीनों को 'पूर्वजों की विरासत' बताकर संरक्षण की माँग की थी और 2020 में स्वयं अदालत गए थे। अब मुख्यमंत्री बनने के बाद उसी विवादित ज़मीन की नीलामी की अनुमति देना उनकी अपनी पूर्व स्थिति के विरुद्ध है।
बीआरएस ने क्या माँगें रखी हैं?
बीआरएस ने नीलामी, हस्तांतरण, पंजीकरण और विकास गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने की माँग की है। साथ ही पहले हुई 6.2 एकड़ की नीलामी, एसबीआई के स्वामित्व दावे और वक्फ रिकॉर्ड के कथित गायब होने की स्वतंत्र जाँच की माँग भी की है।
अब आगे क्या होने की संभावना है?
17 अगस्त की नीलामी तिथि नज़दीक है और मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। तेलंगाना उच्च न्यायालय में लंबित मामले और बीआरएस के राजनीतिक दबाव को देखते हुए नीलामी प्रक्रिया अदालती हस्तक्षेप या सरकारी स्थगन का सामना कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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