केटीआर का आरोप: रेवंत रेड्डी बना रहे 'अनुमुला हब', टेसेरैक्ट को ₹200 करोड़ की जमीन कथित घोटाले पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव ने बुधवार, 12 अगस्त को तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि वे राज्य में 'अनुमुला हब' खड़ा कर रहे हैं। यह हमला मुख्यमंत्री के भाई अनुमुला कोंडल रेड्डी से कथित तौर पर जुड़ी कंपनी टेसेरैक्ट एडवांस्ड सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को लगभग ₹200 करोड़ मूल्य की सरकारी जमीन के कथित आवंटन को लेकर है।
मुख्य आरोप: जीरो कर्मचारी, मात्र ₹1 लाख पूंजी, फिर भी ₹200 करोड़ की जमीन
रामा राव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि 31 मार्च 2025 तक टेसेरैक्ट एडवांस्ड सिस्टम्स में एक भी कर्मचारी नहीं था और कंपनी की पेड-अप कैपिटल महज ₹1 लाख थी। इसके बावजूद, उनके अनुसार, कंपनी को लगभग पाँच एकड़ सरकारी जमीन — जिसका बाज़ार मूल्य करीब ₹200 करोड़ आँका गया है — लगभग ₹7 करोड़ यानी करीब ₹3,700 प्रति वर्ग गज की दर से आवंटित की गई।
रामा राव ने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा, 'अनुमुला कोंडल रेड्डी को मैं सदी का इनोवेटर मानता हूँ, जिन्होंने जीरो इन्वेस्टमेंट वाली डिफेंस कंपनी बनाई और रातों-रात कम से कम ₹200 करोड़ का मुनाफा कमाया।'
टी-हब बनाम 'अनुमुला हब': केटीआर की राजनीतिक चोट
रामा राव ने बीआरएस की पिछली सरकार के कार्यकाल में स्थापित टी-हब का हवाला देते हुए कहा कि उसे असली स्टार्टअप्स को फलने-फूलने का मौका देने के लिए बनाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि रेवंत रेड्डी सरकार इसके विपरीत 'अनुमुला हब्स' को बढ़ावा दे रही है — जो उनके शब्दों में 'परिवार द्वारा संचालित, बिना किसी इनोवेशन और बिना किसी कर्मचारी वाली स्कीम' है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मंत्री डी. श्रीधर बाबू और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को तेलंगाना के लाखों युवाओं को यह 'जादुई ट्रिक' सिखानी चाहिए कि करोड़ों की सरकारी जमीन कैसे हासिल की जाए।
मंत्री के दावे पर सवाल, लिंक्डइन प्रोफाइल का हवाला
मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने दावा किया था कि कोंडल रेड्डी का टेसेरैक्ट से कोई संबंध नहीं है। रामा राव ने इस दावे को सीधे चुनौती देते हुए कोंडल रेड्डी की लिंक्डइन प्रोफाइल का हवाला दिया, जिसमें यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम ने उन्हें टेसेरैक्ट एडवांस्ड सिस्टम्स का चेयरमैन बताया था। यह विरोधाभास इस विवाद को और गहरा करता है।
बीआरएस की माँग: दस्तावेज़ सार्वजनिक करो, जाँच हो
रामा राव ने तेलंगाना सरकार से माँग की कि आवंटन से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएँ — जिनमें सरकारी आदेश, जमीन का मूल्यांकन, पात्रता के मानदंड, निवेश का प्रस्ताव, रोजगार से जुड़े वादे और निर्णय प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों का विवरण शामिल हो।
उन्होंने घोषणा की कि बीआरएस इस मामले को तेलंगाना के राज्यपाल के समक्ष औपचारिक शिकायत के रूप में प्रस्तुत करेगी और आवश्यकता पड़ने पर लोकायुक्त तथा अदालतों का भी रुख करेगी।
आगे क्या होगा
यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब तेलंगाना में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी बीआरएस के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि रामा राव स्वयं भी कई मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं का सामना कर रहे हैं, जो इस आरोप-प्रत्यारोप की राजनीतिक पृष्ठभूमि को और जटिल बनाता है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन दस्तावेज़ों को सार्वजनिक करती है या नहीं, और क्या कोई स्वतंत्र जाँच का आदेश दिया जाता है।