बीआरएस नेता हरीश राव ने राहुल गांधी को लिखा पत्र, तेलंगाना राजस्व मंत्री को हटाने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के वरिष्ठ नेता और तेलंगाना विधानसभा में उपनेता टी. हरीश राव ने 20 अगस्त 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर राज्य के राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी को तत्काल पद से हटाने की मांग की। हरीश राव ने आरोप लगाया कि रेड्डी के कार्यकाल में रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 की धारा 22ए का दुरुपयोग कर निजी संपत्तियों को मनमाने ढंग से जब्त किया जा रहा है और अवैध वसूली की जा रही है।
क्या हैं मुख्य आरोप
हरीश राव ने अपने पत्र में कहा कि हैदराबाद, मेडचल मलकाजगिरि, रंगा रेड्डी और संगारेड्डी जिलों सहित जुबली हिल्स, बंजारा हिल्स और निज़ामपेट जैसे स्थापित इलाकों में हजारों निजी संपत्तियों को कथित तौर पर सरकारी या सीमा-अधिशेष भूमि के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
उनके अनुसार, एचएमडीए/जीएचएमसी द्वारा अनुमोदित लेआउट और दशकों से स्वामित्व वाली निजी पट्टा भूमि को भी इस प्रतिबंधित-संपत्ति व्यवस्था के दायरे में लाया जा रहा है। शहरी भूमि सीमा (यूएलसी) ढाँचे के तहत वर्षों पहले नियमित की जा चुकी संपत्तियों पर नए सिरे से दावे किए जा रहे हैं, जिससे वैध मालिकों के बिक्री लेनदेन बाधित हो रहे हैं।
धारा 22ए का कथित दुरुपयोग
हरीश राव ने स्पष्ट किया कि धारा 22ए का मूल उद्देश्य केवल कानूनी रूप से जब्त संपत्तियों के पंजीकरण को रोकना है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रावधान का उपयोग कृत्रिम स्वामित्व विवाद उत्पन्न करने, वैध निजी संपत्तियों को फ्रीज करने और नागरिकों के जायज लेनदेन को अवरुद्ध करने के लिए किया जा रहा है — जो कानून की मंशा के विरुद्ध है।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि इन प्रतिबंधों को हटवाने के लिए संपत्ति मालिकों से कथित तौर पर बिचौलियों के ज़रिए बाजार मूल्य के 30 प्रतिशत तक की रकम वसूली जा रही है।
सीएम रेवंत रेड्डी पर भी निशाना
बीआरएस नेता ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि वे पूरे राजस्व तंत्र की निगरानी में पूरी तरह विफल रहे हैं। उन्होंने माँग की कि इस मामले में स्वतंत्र न्यायिक जाँच और भ्रष्टाचार रोधी जाँच की जाए।
जाँच की माँग और आगे का रास्ता
हरीश राव ने पत्र में कहा, 'इन सवालों का जवाब प्रेस विज्ञप्तियों या नियमित समीक्षा बैठकों से नहीं दिया जा सकता। यदि आरोप झूठे हैं, तो एक स्वतंत्र जाँच से यह साबित हो जाएगा; यदि सच हैं, तो दोषियों को कानून का सामना करना होगा।'
उन्होंने यह भी जानने की माँग की कि संपत्तियों को सूची में जोड़ने और हटाने के लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं, इस प्रक्रिया में कोई राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्ति या निजी गिरोह तो शामिल नहीं हैं, और पूरी प्रशासनिक जवाबदेही की श्रृंखला क्या है। यह मामला अब तेलंगाना की राजनीति में एक बड़े टकराव का रूप लेता दिख रहा है।