UPI पर 0.4% चार्ज प्रस्ताव: विपक्ष का हमला — 'गरीब और छोटे दुकानदारों पर पड़ेगा बोझ'
सारांश
मुख्य बातें
यूपीआई (UPI) के ज़रिए ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर विपक्षी दलों ने 17 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार के विरुद्ध तीखा मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने एकजुट होकर इस कदम को आम जनता और छोटे व्यापारियों के आर्थिक हितों पर सीधा प्रहार करार दिया। विपक्ष का केंद्रीय तर्क यह है कि सरकार पहले नागरिकों को डिजिटल भुगतान की आदत डलवाती है और फिर उसी पर शुल्क लादती है।
कांग्रेस का तर्क: डिजिटल इंडिया से पलटी खाई सरकार
नई दिल्ली में कांग्रेस नेता शकील अहमद ने इस प्रस्ताव पर तीव्र नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा, 'सरकार को यह समझना चाहिए। पहले तो आपने लोगों को फोन से पेमेंट करने, आसानी से पैसे ट्रांसफर करने और आसान डिलीवरी की आदत डाली, और अब आप चार्ज लगा रहे हैं।' उन्होंने GST और नोटबंदी के उदाहरण देते हुए यह भी कहा कि 2014 से अब तक ऐसी नीतियों का बोझ बार-बार आम लोगों पर पड़ा है। अहमद ने आरोप लगाया कि बुनियादी ढाँचे पर खर्च के बावजूद शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में समस्याएँ बनी हुई हैं।
RJD का सवाल: छोटे दुकानदार कहाँ से भरेंगे चार्ज?
पटना में RJD सांसद मनोज झा ने सड़क किनारे की छोटी दुकानों का उदाहरण देते हुए कहा कि दाल पर सिर्फ ₹2 और दूध पर ₹1 का मार्जिन कमाने वाले दुकानदारों के लिए यह शुल्क असहनीय होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह निर्णय किसी 'विदेशी ताकत' के दबाव में लिया जा रहा है, जिसे उन्होंने अधिक चिंताजनक बताया। गौरतलब है कि छोटे खुदरा व्यापारियों का मुनाफा पहले से ही बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की प्रतिस्पर्धा से दबाव में है।
RSP और DMK की चेतावनी: बोझ आखिर ग्राहक पर ही पड़ेगा
तिरुवनंतपुरम से RSP सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने स्पष्ट किया कि सरकार भले ही कहे कि यह शुल्क ग्राहक पर नहीं पड़ेगा, वास्तविकता यह है कि व्यापारी इस बोझ को उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित करेंगे। उन्होंने कहा, 'मर्चेंट यह बोझ नहीं उठाने वाले हैं।' चेन्नई में DMK प्रवक्ता टी.के.एस. इलांगोवन ने सवाल उठाया कि जब लोग पहले से ही करों का पूरा ढाँचा वहन कर रहे हैं, तो भुगतान करने की क्रिया पर अलग से शुल्क क्यों? उन्होंने कहा, 'वे नकद पैसे साथ नहीं रखते और UPI से पेमेंट करते हैं — बस इतना ही अंतर है।'
सरकार और BJP का पक्ष
सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह प्रस्तावित शुल्क मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर है, सीधे ग्राहक पर नहीं। सरकार का तर्क है कि डिजिटल भुगतान का बुनियादी ढाँचा बनाए रखने की लागत को संतुलित करना ज़रूरी है और इससे आम उपभोक्ता प्रभावित नहीं होगा। हालाँकि, विपक्ष के अनुसार व्यापार-व्यवहार में यह अंतर केवल सैद्धांतिक है।
आम जनता और डिजिटल भुगतान पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में UPI ट्रांजैक्शन प्रति माह अरबों की संख्या छू रहे हैं और देश को वैश्विक स्तर पर डिजिटल भुगतान में अग्रणी माना जाता है। विपक्ष का यह भी कहना है कि नोटबंदी के बाद नागरिकों को डिजिटल पेमेंट की ओर प्रोत्साहित किया गया था; अब उसी माध्यम पर शुल्क लगाना उस प्रतिबद्धता के विपरीत है। आलोचकों का कहना है कि इससे छोटे व्यापारी एक बार फिर नकद लेनदेन की ओर लौटने को मजबूर हो सकते हैं, जो डिजिटल इंडिया अभियान के लिए एक बड़ा झटका होगा। यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इस पर अंतिम निर्णय शेष है।