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बंगाल उपचुनाव: चुनाव आयोग ने AJUP को 'टेबल', AISF को 'अलमारी' चुनाव चिह्न दिया; 6 अक्टूबर को मतदान

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बंगाल उपचुनाव: चुनाव आयोग ने AJUP को 'टेबल', AISF को 'अलमारी' चुनाव चिह्न दिया; 6 अक्टूबर को मतदान

सारांश

पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले चुनाव चिह्नों का नया विवाद — ECI ने AJUP को 'टेबल' और AISF को 'अलमारी' सौंपा। AISF प्रमुख नौशाद सिद्दीकी ने फैसले को गलत बताते हुए अदालत जाने की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

चुनाव आयोग ने 19 सितंबर 2026 को AJUP को 'टेबल' और AISF को 'अलमारी' चुनाव चिह्न आवंटित किए।
AJUP उम्मीदवार गोलाम नबी आजाद 'टेबल' चिह्न पर रेजीनगर से और AISF उम्मीदवार मोहम्मद साबे मिराज अली खान 'अलमारी' पर नंदीग्राम से चुनाव लड़ेंगे।
दोनों सीटों पर मतदान 6 अक्टूबर और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
AISF का पुराना 'लिफाफा' चिह्न ऋतब्रत बनर्जी की डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को मिला, जिसके बाद विवाद उठा।
AISF प्रमुख नौशाद सिद्दीकी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा, ज़रूरत पड़ने पर अदालत जाने की चेतावनी दी।

पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग (ECI) ने 19 सितंबर 2026 को आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) और ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (AISF) को नए चुनाव चिह्न आवंटित किए। AJUP को 'टेबल' और AISF को 'अलमारी' प्रतीक दिया गया है — दोनों दलों के पुराने चिह्न अब उनके पास नहीं रहे।

चुनाव चिह्न क्यों बदले गए

हुमायूं कबीर के नेतृत्व वाली AJUP पहले 'सीटी' चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ती थी। इसी प्रतीक पर कबीर ने इस वर्ष मुर्शिदाबाद जिले की नाओदा और रेजीनगर विधानसभा सीटों से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने नाओदा सीट बरकरार रखने का निर्णय लिया, जिसके परिणामस्वरूप रेजीनगर सीट रिक्त हो गई और 6 अक्टूबर को उपचुनाव तय हुआ।

AISF के चिह्न परिवर्तन का कारण भिन्न है। चुनाव आयोग ने हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न आवंटित किया। चूँकि 'लिफाफा' अब एक अन्य दल को दे दिया गया, इसलिए AISF का प्रतीक बदलकर 'अलमारी' कर दिया गया।

उपचुनाव में उम्मीदवार और तिथियाँ

रेजीनगर सीट पर AJUP के उम्मीदवार गोलाम नबी आजाद अब 'टेबल' चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरेंगे। वहीं, पूर्वी मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर AISF ने मोहम्मद साबे मिराज अली खान को अपना प्रत्याशी घोषित किया है, जो 'अलमारी' चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे। दोनों सीटों पर मतदान 6 अक्टूबर को होगा और मतगणना 9 अक्टूबर को की जाएगी।

AISF की आपत्ति और कानूनी विकल्प

चुनाव आयोग के इस फैसले पर AISF के अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल विधानसभा में दल के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उन्होंने 2021 और 2026 दोनों विधानसभा चुनाव दक्षिण 24 परगना जिले की भांगर सीट से 'लिफाफा' चुनाव चिह्न पर जीते थे, इसलिए इस प्रतीक पर पहला अधिकार AISF का है।

सिद्दीकी ने बताया कि AISF ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अपना पक्ष रखा है और यदि आवश्यक हुआ तो अदालत का दरवाज़ा खटखटाया जाएगा। उनका तर्क है कि AISF का गठन ऋतब्रत बनर्जी के गुट से कहीं पहले हुआ था, जिससे 'लिफाफा' प्रतीक पर उनकी पार्टी का दावा प्राथमिक है।

ऋतब्रत बनर्जी का स्वागत

दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनकी पार्टी का उम्मीदवार अब ईवीएम में दर्ज हो चुका है। बनर्जी ने कहा, 'अहंकारी वंशवादी अब फिलहाल ईवीएम से गायब हो गए हैं। भारतीय लोकतंत्र में अहंकारी और निरंकुश तानाशाहों के लिए कोई जगह नहीं है।'

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में छोटे दलों और निष्कासित विधायकों की सक्रियता बढ़ रही है। गौरतलब है कि 'लिफाफा' चिह्न का विवाद आगे चुनावी कानून के नज़रिए से महत्त्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। अगर AISF अदालत जाती है, तो उपचुनाव प्रक्रिया पर असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नौशाद सिद्दीकी जैसे छोटे पर प्रभावशाली नेता के लिए मैदानी संगठन को पुनः स्थापित करने की चुनौती है। यह प्रकरण यह भी उजागर करता है कि निष्कासित और नवगठित गुटों को मान्यता देने की ECI की प्रक्रिया छोटे दलों के लिए कितनी असुविधाजनक साबित हो सकती है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बंगाल उपचुनाव में AJUP और AISF के चुनाव चिह्न क्यों बदले गए?
चुनाव आयोग ने AJUP को 'टेबल' और AISF को 'अलमारी' नया चिह्न दिया, क्योंकि AISF का पुराना 'लिफाफा' प्रतीक डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को आवंटित कर दिया गया। AJUP का पूर्व 'सीटी' चिह्न भी उसके पास नहीं रहा।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव कब होंगे?
दोनों विधानसभा सीटों — नंदीग्राम (पूर्वी मेदिनीपुर) और रेजीनगर (मुर्शिदाबाद) — पर मतदान 6 अक्टूबर 2026 को होगा और मतगणना 9 अक्टूबर 2026 को होगी।
AISF के नौशाद सिद्दीकी ने चुनाव आयोग के फैसले पर क्या कहा?
AISF अध्यक्ष नौशाद सिद्दीकी ने फैसले को अनुचित बताया। उनका कहना है कि उन्होंने 2021 और 2026 के विधानसभा चुनाव 'लिफाफा' चिह्न पर जीते थे, इसलिए इस प्रतीक पर पहला अधिकार AISF का है। उन्होंने कहा कि ज़रूरत पड़ने पर अदालत का रुख किया जाएगा।
रेजीनगर में उपचुनाव क्यों हो रहा है?
AJUP नेता हुमायूं कबीर ने 2026 विधानसभा चुनाव में नाओदा और रेजीनगर दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। उन्होंने नाओदा सीट बरकरार रखने का निर्णय लिया, जिससे रेजीनगर सीट रिक्त हो गई और वहाँ उपचुनाव कराना आवश्यक हुआ।
डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस और 'लिफाफा' चिह्न का क्या संबंध है?
चुनाव आयोग ने TMC से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न प्रदान किया। इसी कारण AISF का पूर्व प्रतीक बदला गया, जिस पर AISF ने आपत्ति जताई है।
राष्ट्र प्रेस
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