TMC में गुटबाजी: ECI ने दिया 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और लिफाफा चिह्न, ऋतब्रत ने कसा फुटबॉल पर तंज
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर गहराती गुटबाजी के बीच चुनाव आयोग (ECI) ने 18 सितंबर 2026 को विद्रोही गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और लिफाफा चुनाव चिह्न आवंटित किया। इस फैसले ने बंगाल की राजनीतिक सरगर्मी को और तेज कर दिया है, जहाँ नंदीग्राम सहित कुछ सीटों पर उपचुनाव निकट हैं।
नाम और चिह्न आवंटन: क्या हुआ
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि उनके गुट ने शुक्रवार सुबह ECI को पत्र लिखकर तीन नामों की प्राथमिकता दी थी — नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस, पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस और डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस। उन्होंने स्पष्ट किया, "चुनाव आयोग के पत्र में साफ बताया गया है कि नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस नाम क्यों नहीं मिल सकते थे, इसलिए हमें डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम और लिफाफे का चुनाव चिह्न दिया गया।"
चुनाव चिह्न के लिए गुट की पहली प्राथमिकता लिफाफा थी, जो उन्हें आवंटित हो गई। फुटबॉल चिह्न उनकी सूची में नहीं था।
ऋतब्रत का फुटबॉल पर तंज
चुनाव चिह्न के संदर्भ में बनर्जी ने तृणमूल के मूल गुट पर तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने कहा, "नहीं, फुटबॉल नहीं। मैंने सुना है कि कोई अब फुटबॉल खेल रहा है। आपको साल्ट लेक स्टेडियम का मामला याद होगा, जिसे विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन के नाम से भी जाना जाता है। वहाँ एक अजीब सी मूर्ति थी, जिसमें किसी व्यक्ति को नहीं दिखाया गया था, बस कोई फुटबॉल को किक मार रहा था। उसे हटा दिया गया है।" उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जिसने वह मूर्ति लगवाई, उसी ने फुटबॉल चिह्न लेने का सुझाव दिया होगा।
सौगत रॉय ने आदेश को बताया अस्थायी
TMC के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने ECI के इस आदेश को खारिज करते हुए कहा, "यह आदेश सिर्फ दो उपचुनावों के लिए अस्थायी है, इसलिए हम इस आदेश को नहीं मानते। मुझे नहीं लगता कि यह कोई स्थायी आदेश है।" नंदीग्राम सीट पर TMC के चुनाव न लड़ने से जुड़े सवाल पर उन्होंने नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा, "इसकी घोषणा पहले ही हो चुकी है, आप मुझसे फिर क्यों पूछ रहे हैं?"
नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी पर सियासत
TMC विधायक कुणाल घोष ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "देखिए, नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उन्हें कब गिरफ्तार किया गया? जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस को अपनी पार्टी का समर्थन देने का ऐलान किया। यह घबराहट में लिया गया फैसला है। यह एक फासीवादी सरकार है। पुलिस राज चल रहा है।"
गौरतलब है कि TMC की ओर से ममता बनर्जी द्वारा कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा के तुरंत बाद उम्मीदवार की गिरफ्तारी का समय राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या
उपचुनाव से पहले TMC में नाम निशान को लेकर मचे इस घमासान ने बंगाल की सियासत को और उलझा दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी एकता और गठजोड़ की रेखाएँ तेज़ी से बदल रही हैं। ECI के अस्थायी आदेश को मुख्य TMC नेतृत्व द्वारा मानने से इनकार और विद्रोही गुट की नई पहचान — आगामी उपचुनावों में मतदाताओं के सामने एक जटिल तस्वीर पेश करेंगे।