रामलीला मैदान रैली 1 नवंबर: भूपेश बघेल बोले — तीन मांगों पर होगी ऐतिहासिक हुंकार
सारांश
मुख्य बातें
इंडिया ब्लॉक की 1 नवंबर 2026 की रामलीला मैदान, नई दिल्ली रैली को लेकर विपक्षी दलों ने अपनी तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने 31 अक्टूबर को रायपुर में मीडिया से बातचीत में दावा किया कि यह रैली 'ऐतिहासिक' होगी और इस पर 'देश-दुनिया की निगाहें' रहेंगी। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ कई राज्यों के पूर्व सीएम भी इस जनसभा में शामिल होंगे।
तीन प्रमुख मांगें
बघेल ने स्पष्ट किया कि रैली के माध्यम से इंडिया ब्लॉक केंद्र सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखेगा। पहली मांग — मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए। दूसरी मांग — विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) के तहत काटे गए 13 करोड़ मतदाताओं के नामों की प्रक्रिया निरस्त की जाए। तीसरी मांग — देश में चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं।
उन्होंने कहा कि ये मांगें केवल चुनावी सुधार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नागरिकों के मतदान अधिकार और सरकारी योजनाओं के लाभ से भी जुड़ी हैं।
SIR पर तीखा सवाल
बघेल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के बांग्लादेशी घुसपैठियों संबंधी बयान पर तंज कसते हुए पूछा कि छत्तीसगढ़ में SIR के दौरान काटे गए लगभग 25 लाख नामों में कितने बांग्लादेशी नागरिक थे और उनमें से कितनों को डिपोर्ट किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने यह सवाल तीन अलग-अलग विधानसभा सत्रों में उठाया, लेकिन सरकार आज तक जवाब नहीं दे पाई।
गौरतलब है कि SIR को लेकर विपक्ष पहले से ही चुनाव आयोग पर सवाल उठाता रहा है। बघेल का तर्क है कि 'घुसपैठिए' की आड़ में असली नागरिकों के वोट काटे जा रहे हैं, जिसका असर भविष्य में सरकारी योजनाओं के लाभ और नागरिकता-संबंधी अधिकारों पर भी पड़ सकता है।
रैली में भागीदारी के दावे
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने दावा किया कि रैली में 'लाखों की तादाद' में लोग शामिल होंगे और राहुल गांधी के साथ लोग सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में एक विशाल जनसभा होगी जहाँ इंडिया ब्लॉक अपनी माँगें मज़बूती से उठाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब आगामी महीनों में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव संभावित हैं और विपक्ष एकजुटता का संदेश देने की कोशिश में है।
आगे क्या होगा
रैली की सफलता और उपस्थिति इंडिया ब्लॉक की आंतरिक एकता की परीक्षा भी होगी। यदि तीनों मांगें व्यापक जनसमर्थन जुटाने में सफल रहीं, तो विपक्ष इन्हें आगामी संसद सत्र में भी उठाने की योजना बना सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, SIR और EVM जैसे मुद्दे 2027-28 के चुनावी एजेंडे में केंद्रीय भूमिका निभा सकते हैं।