इंडी गठबंधन की 1 नवंबर रैली: रामलीला मैदान में 10 15 लाख लोगों के जुटने का दावा, CEC हटाने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
इंडी गठबंधन की 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली को लेकर कांग्रेस नेताओं ने रविवार, 18 अक्टूबर को बड़े दावे किए हैं। नेताओं का कहना है कि यह प्रदर्शन मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग को लेकर आयोजित किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने शनिवार को कांग्रेस को यह रैली आयोजित करने की अनुमति प्रदान कर दी है।
रैली की पृष्ठभूमि
कांग्रेस और इंडी गठबंधन के घटक दल भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाई जा रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित तौर पर गंभीर खामियाँ बताते हुए इसे रद्द करने की माँग कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जिसे वह लोकतंत्र पर सीधा हमला बता रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले 12 अक्टूबर को भी इंडी गठबंधन के नेतृत्व में दिल्ली में एक बड़ा प्रदर्शन हो चुका है।
नेताओं के दावे और अनुमानित भीड़
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि जनता में व्यापक आक्रोश है, क्योंकि सरकार विपक्ष की बात सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, "बार बार मुद्दा उठाने और अलग अलग तरीकों से विरोध करने के बावजूद सरकार न तो सीईसी के खिलाफ कोई कार्रवाई कर रही है और न ही उन्हें उनके पद से हटा रही है।" उन्होंने बताया कि 1 नवंबर की रैली में देश के अलग अलग हिस्सों से राजनीतिक प्रतिनिधि और संगठन शामिल होंगे।
कांग्रेस नेता अतुल लोंढे पाटिल ने दावा किया कि इस बार भीड़ जुटाने के लिए किसी विशेष अपील की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा, "जिस तरह से वोट चुराए गए हैं, लोकतंत्र को चुरा लिया गया है, लोकतंत्र खतरे में है और संविधान खतरे में है, ऐसे हालात में लोग खुद ब खुद वहां आने के लिए तैयार हैं।" उन्होंने अनुमान जताया कि रैली में 10 से 15 लाख से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं।
राहुल गांधी का नेतृत्व
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के नेतृत्व में कांग्रेस इस संशोधन प्रक्रिया के विरुद्ध व्यापक समर्थन जुटाने में लगी है। इंडी गठबंधन लगातार यह माँग करता आया है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को तत्काल उनके पद से हटाया जाए, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
आम जनता और लोकतंत्र पर असर
विपक्ष का तर्क है कि एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और इससे करोड़ों मतदाताओं के मताधिकार पर असर पड़ सकता है। आलोचकों का कहना है कि अगर मतदाता सूची की शुद्धता पर सवाल उठते हैं तो यह भविष्य के चुनावों की विश्वसनीयता के लिए गंभीर खतरा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में अनेक राज्यों के चुनाव नज़दीक हैं।
आगे की राह
रैली की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि इंडी गठबंधन के घटक दल कितनी एकजुटता दिखा पाते हैं और देशभर से समर्थक किस संख्या में पहुँचते हैं। रामलीला मैदान में अनुमति मिलने के बाद गठबंधन के नेताओं का मनोबल ऊँचा है, और अगले कुछ दिनों में और घोषणाएँ अपेक्षित हैं।