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इंडी गठबंधन की 1 नवंबर रैली: रामलीला मैदान में 10 15 लाख लोगों के जुटने का दावा, CEC हटाने की माँग

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इंडी गठबंधन की 1 नवंबर रैली: रामलीला मैदान में 10 15 लाख लोगों के जुटने का दावा, CEC हटाने की माँग

सारांश

इंडी गठबंधन की 1 नवंबर की रामलीला मैदान रैली महज एक विरोध प्रदर्शन नहीं — यह मतदाता सूची की वैधता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सीधा सवाल है। कांग्रेस का 10 15 लाख भीड़ का दावा बताता है कि विपक्ष इसे बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में पेश करने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

इंडी गठबंधन 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करेगा।
रैली मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के विरोध और सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को लेकर है।
कांग्रेस नेता अतुल लोंढे पाटिल ने 10 15 लाख से अधिक लोगों के जुटने का अनुमान जताया।
दिल्ली पुलिस ने शनिवार को रैली की अनुमति दे दी है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता रैली का नेतृत्व करेंगे।
इससे पहले 12 अक्टूबर को भी इंडी गठबंधन दिल्ली में प्रदर्शन कर चुका है।

इंडी गठबंधन की 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली को लेकर कांग्रेस नेताओं ने रविवार, 18 अक्टूबर को बड़े दावे किए हैं। नेताओं का कहना है कि यह प्रदर्शन मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग को लेकर आयोजित किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने शनिवार को कांग्रेस को यह रैली आयोजित करने की अनुमति प्रदान कर दी है।

रैली की पृष्ठभूमि

कांग्रेस और इंडी गठबंधन के घटक दल भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाई जा रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित तौर पर गंभीर खामियाँ बताते हुए इसे रद्द करने की माँग कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जिसे वह लोकतंत्र पर सीधा हमला बता रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले 12 अक्टूबर को भी इंडी गठबंधन के नेतृत्व में दिल्ली में एक बड़ा प्रदर्शन हो चुका है।

नेताओं के दावे और अनुमानित भीड़

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि जनता में व्यापक आक्रोश है, क्योंकि सरकार विपक्ष की बात सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, "बार बार मुद्दा उठाने और अलग अलग तरीकों से विरोध करने के बावजूद सरकार न तो सीईसी के खिलाफ कोई कार्रवाई कर रही है और न ही उन्हें उनके पद से हटा रही है।" उन्होंने बताया कि 1 नवंबर की रैली में देश के अलग अलग हिस्सों से राजनीतिक प्रतिनिधि और संगठन शामिल होंगे।

कांग्रेस नेता अतुल लोंढे पाटिल ने दावा किया कि इस बार भीड़ जुटाने के लिए किसी विशेष अपील की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा, "जिस तरह से वोट चुराए गए हैं, लोकतंत्र को चुरा लिया गया है, लोकतंत्र खतरे में है और संविधान खतरे में है, ऐसे हालात में लोग खुद ब खुद वहां आने के लिए तैयार हैं।" उन्होंने अनुमान जताया कि रैली में 10 से 15 लाख से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं।

राहुल गांधी का नेतृत्व

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के नेतृत्व में कांग्रेस इस संशोधन प्रक्रिया के विरुद्ध व्यापक समर्थन जुटाने में लगी है। इंडी गठबंधन लगातार यह माँग करता आया है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को तत्काल उनके पद से हटाया जाए, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

आम जनता और लोकतंत्र पर असर

विपक्ष का तर्क है कि एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और इससे करोड़ों मतदाताओं के मताधिकार पर असर पड़ सकता है। आलोचकों का कहना है कि अगर मतदाता सूची की शुद्धता पर सवाल उठते हैं तो यह भविष्य के चुनावों की विश्वसनीयता के लिए गंभीर खतरा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में अनेक राज्यों के चुनाव नज़दीक हैं।

आगे की राह

रैली की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि इंडी गठबंधन के घटक दल कितनी एकजुटता दिखा पाते हैं और देशभर से समर्थक किस संख्या में पहुँचते हैं। रामलीला मैदान में अनुमति मिलने के बाद गठबंधन के नेताओं का मनोबल ऊँचा है, और अगले कुछ दिनों में और घोषणाएँ अपेक्षित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

सच्चाई नहीं — और यह अंतर महत्वपूर्ण है। असली सवाल यह है कि एसआईआर प्रक्रिया पर विपक्ष के आरोपों का सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब क्यों नहीं आया है, जबकि यह मतदाता अधिकारों से सीधे जुड़ा मामला है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है, वह यह है कि रैली की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि क्या गठबंधन एसआईआर पर न्यायिक या संसदीय मंच पर कोई ठोस कदम उठा पाता है। सड़क पर भीड़ और नीतिगत बदलाव — दोनों अलग अलग चीज़ें हैं।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडी गठबंधन की 1 नवंबर की रैली किस मुद्दे पर है?
यह रैली मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) को रद्द करने की माँग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग को लेकर आयोजित की जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर खामियाँ हैं जो मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित करती हैं।
1 नवंबर की रैली कहाँ होगी और इसकी अनुमति मिली है?
रैली नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होगी। दिल्ली पुलिस ने शनिवार को कांग्रेस को यह रैली करने की अनुमति दे दी है।
कांग्रेस नेता कितनी भीड़ जुटने का अनुमान लगा रहे हैं?
कांग्रेस नेता अतुल लोंढे पाटिल ने दावा किया है कि रैली में 10 15 लाख से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। हालाँकि यह कांग्रेस का अनुमान है, स्वतंत्र सत्यापन अभी उपलब्ध नहीं है।
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) क्या है?
एसआईआर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाई जाने वाली मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में खामियाँ हैं और इससे बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं।
राहुल गांधी इस रैली में क्या भूमिका निभाएंगे?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इंडी गठबंधन की इस रैली का नेतृत्व करेंगे। कांग्रेस एसआईआर के विरोध में व्यापक जन समर्थन जुटाने और सीईसी के इस्तीफे की माँग के लिए इस रैली को निर्णायक प्रदर्शन बताती है।
राष्ट्र प्रेस
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