1 नवंबर 2026
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आठवले का दावा: राहुल की रैलियों से सरकार नहीं बदलेगी, देश का माहौल मोदी और NDA के पक्ष में

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आठवले का दावा: राहुल की रैलियों से सरकार नहीं बदलेगी, देश का माहौल मोदी और NDA के पक्ष में

सारांश

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने मुंबई में साफ कहा — राहुल गांधी की रैलियाँ सरकार नहीं बदलेंगी। चुनाव आयोग पर हो रहे हमलों को उन्होंने अनुचित बताया और दावा किया कि 2026 विधानसभा चुनाव में वोट-चोरी के आरोप एकतरफा राजनीति का हिस्सा हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने 1 नवंबर 2026 को मुंबई में कहा कि देश का माहौल PM मोदी और NDA के पक्ष में है।
आठवले के अनुसार, चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोप निराधार हैं; 2014 में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कांग्रेस-काल में हुई थी।
दीपावली से पहले रैली के कारण व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हुआ; उनकी अपील को अनदेखा किया गया।
आठवले ने कहा कि सरकार बदलनी हो तो 2029 का चुनाव है — आंदोलन से नहीं बदलती।
ममता बनर्जी के 2026 विधानसभा चुनाव में वोट-चोरी के आरोपों को दोहरे मानदंड बताते हुए खारिज किया।
1984 के सिख-विरोधी दंगों का हवाला देते हुए दावा किया कि पंजाब में NDA की सरकार बनेगी।

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने 1 नवंबर 2026 को मुंबई में विपक्ष की रैलियों और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश का समग्र माहौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पक्ष में है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना विपक्ष का अधिकार है, परंतु संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर विवाद पैदा करना अनुचित है।

चुनाव आयोग पर आरोपों का खंडन

आठवले ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को रैलियाँ निकालने का पूरा अधिकार है, लेकिन चुनाव आयोग के खिलाफ जो बयानबाजी और प्रदर्शन हो रहे हैं, उससे आम लोगों में नाराज़गी बढ़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को सटीक बनाने के उद्देश्य से कुछ नामों को हटाया है, न कि किसी राजनीतिक मंशा से। गौरतलब है कि उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2014 में जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनी थी, तब मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कांग्रेस के शासनकाल में ही हुई थी।

रैली से व्यापारियों को नुकसान का मुद्दा

आठवले ने कहा कि दीपावली से ठीक पहले इस तरह की रैली का आयोजन उचित नहीं था। व्यापारियों ने रैली न करने की अपील की थी, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि लगातार प्रदर्शनों से लोगों को परेशानी होती है और आंदोलन से सरकारें नहीं बदलतीं — सरकार बदलनी हो तो इसके लिए 2029 के आम चुनाव उचित मंच हैं।

राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला

आठवले ने यह भी कहा कि यदि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनना था, तो यह अवसर तब था जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का समर्थन किया जिसमें शाह ने कहा था कि जब तक NDA मज़बूत है, राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने का सपना पूरा नहीं होगा। आठवले के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करने से कांग्रेस की अपनी प्रतिष्ठा को ही नुकसान हो रहा है।

ममता बनर्जी के वोट-चोरी के आरोप पर प्रतिक्रिया

तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 2026 के विधानसभा चुनाव में वोट-चोरी के आरोपों पर आठवले ने तर्क दिया कि 2021 में जब ममता बनर्जी की सरकार बनी थी, तब किसी ने वोट-चोरी का आरोप नहीं लगाया था और सबने जनादेश का सम्मान किया था। उन्होंने कहा कि जब सत्ता मिलती है तब वोट-चोरी का आरोप नहीं होता, और जब विपक्ष में होते हैं तो आरोप लगाए जाते हैं।

1984 के सिख-विरोधी दंगे और पंजाब चुनाव

आठवले ने 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख-विरोधी दंगों का भी उल्लेख किया, जिनमें बड़ी संख्या में सिखों की जान गई और मकान जलाए गए। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान से सहमति जताई कि सिख समुदाय इन घटनाओं को भूल नहीं सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि पंजाब में आगामी चुनाव में NDA की सरकार बनने वाली है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पारंपरिक रूप से BJP के करीब रहा है। 1984 के दंगों का जिक्र पंजाब में सिख मतदाताओं को ध्रुवीकृत करने की उसी पुरानी रणनीति का हिस्सा है जो NDA हर चुनाव से पहले अपनाता आया है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामदास आठवले ने राहुल गांधी की रैलियों पर क्या कहा?
आठवले ने कहा कि राहुल गांधी को रैली निकालने का अधिकार है, लेकिन इससे सरकार नहीं बदलती। उनके अनुसार, सरकार बदलनी हो तो 2029 के चुनाव में मतदाताओं के सामने जाना होगा।
चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोपों पर आठवले का क्या रुख है?
आठवले ने कहा कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची दुरुस्त करने के लिए नाम हटाए हैं, इसमें कोई राजनीतिक साज़िश नहीं है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2014 में BJP सरकार बनने पर मुख्य चुनाव आयुक्त कांग्रेस-काल में नियुक्त व्यक्ति ही थे।
दीपावली से पहले रैली पर आठवले ने क्या टिप्पणी की?
आठवले ने कहा कि दीपावली से ठीक पहले रैली नहीं निकालनी चाहिए थी। व्यापारियों ने अपील की थी, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई और उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ।
ममता बनर्जी के वोट-चोरी के आरोपों पर आठवले ने क्या कहा?
आठवले ने कहा कि 2021 में जब ममता बनर्जी की सरकार बनी थी, किसी ने वोट-चोरी का आरोप नहीं लगाया था। उनके अनुसार, विपक्ष में होने पर वोट-चोरी का आरोप और सत्ता में आने पर उसी प्रक्रिया को सही मानना दोहरा मानदंड है।
1984 के दंगों का उल्लेख क्यों किया और पंजाब पर क्या दावा किया?
आठवले ने कहा कि 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख-विरोधी दंगे और उनमें हुई मौतें सिख समुदाय के लिए अविस्मरणीय हैं। इस संदर्भ में उन्होंने दावा किया कि पंजाब में आगामी चुनाव में NDA की सरकार बनेगी।
राष्ट्र प्रेस
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