आठवले का दावा: राहुल की रैलियों से सरकार नहीं बदलेगी, देश का माहौल मोदी और NDA के पक्ष में
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने 1 नवंबर 2026 को मुंबई में विपक्ष की रैलियों और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश का समग्र माहौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पक्ष में है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना विपक्ष का अधिकार है, परंतु संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर विवाद पैदा करना अनुचित है।
चुनाव आयोग पर आरोपों का खंडन
आठवले ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को रैलियाँ निकालने का पूरा अधिकार है, लेकिन चुनाव आयोग के खिलाफ जो बयानबाजी और प्रदर्शन हो रहे हैं, उससे आम लोगों में नाराज़गी बढ़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को सटीक बनाने के उद्देश्य से कुछ नामों को हटाया है, न कि किसी राजनीतिक मंशा से। गौरतलब है कि उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2014 में जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनी थी, तब मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कांग्रेस के शासनकाल में ही हुई थी।
रैली से व्यापारियों को नुकसान का मुद्दा
आठवले ने कहा कि दीपावली से ठीक पहले इस तरह की रैली का आयोजन उचित नहीं था। व्यापारियों ने रैली न करने की अपील की थी, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि लगातार प्रदर्शनों से लोगों को परेशानी होती है और आंदोलन से सरकारें नहीं बदलतीं — सरकार बदलनी हो तो इसके लिए 2029 के आम चुनाव उचित मंच हैं।
राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला
आठवले ने यह भी कहा कि यदि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनना था, तो यह अवसर तब था जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का समर्थन किया जिसमें शाह ने कहा था कि जब तक NDA मज़बूत है, राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने का सपना पूरा नहीं होगा। आठवले के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करने से कांग्रेस की अपनी प्रतिष्ठा को ही नुकसान हो रहा है।
ममता बनर्जी के वोट-चोरी के आरोप पर प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 2026 के विधानसभा चुनाव में वोट-चोरी के आरोपों पर आठवले ने तर्क दिया कि 2021 में जब ममता बनर्जी की सरकार बनी थी, तब किसी ने वोट-चोरी का आरोप नहीं लगाया था और सबने जनादेश का सम्मान किया था। उन्होंने कहा कि जब सत्ता मिलती है तब वोट-चोरी का आरोप नहीं होता, और जब विपक्ष में होते हैं तो आरोप लगाए जाते हैं।
1984 के सिख-विरोधी दंगे और पंजाब चुनाव
आठवले ने 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख-विरोधी दंगों का भी उल्लेख किया, जिनमें बड़ी संख्या में सिखों की जान गई और मकान जलाए गए। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान से सहमति जताई कि सिख समुदाय इन घटनाओं को भूल नहीं सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि पंजाब में आगामी चुनाव में NDA की सरकार बनने वाली है।