एसआईआर पर राहुल गांधी राजनीति कर रहे हैं: रामदास आठवले ने बताया 13 करोड़ वोट कटने का पूरा हिसाब
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समूचे विपक्ष पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग (ECI) द्वारा काटे गए 13 करोड़ वोटों का पूरा ब्रेकअप उनके पास उपलब्ध है और इसमें जानबूझकर किसी का मताधिकार छीनने जैसी कोई बात नहीं है।
13 करोड़ वोट कटे — पूरा हिसाब
आठवले ने आँकड़ों के साथ अपनी बात रखते हुए कहा, '2.8 करोड़ मृत लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं। 3 करोड़ ऐसे मतदाता हैं जिनका पता ही नहीं चल पाया — यानी लापता हैं। और 6.3 करोड़ मतदाता स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं, इसलिए उनके नाम उनके पुराने मतदान क्षेत्र से हटाए गए।' उनके अनुसार इन तीन श्रेणियों को जोड़ने पर ही 13 करोड़ का आँकड़ा सामने आता है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हों। विशेषज्ञ बताते हैं कि चुनाव आयोग प्रत्येक बड़े चुनाव से पहले ऐसी सफाई-प्रक्रिया नियमित रूप से अपनाता है, जिसका उद्देश्य सूची को वास्तविक और अद्यतन बनाए रखना है।
चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था — आठवले का तर्क
केंद्रीय राज्य मंत्री ने यह भी जोड़ा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पहले ही यह आदेश दे दिया है कि जिन लोगों के नाम गलत तरीके से कट गए हों, उन्हें दोबारा सूची में जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच कोई मतभेद नहीं है और सभी ने सार्वजनिक रूप से बताया है कि एसआईआर का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था।
आठवले ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान ने चुनाव आयोग को पूर्ण स्वायत्त अधिकार दिए हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2014 में जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनी थी, तब कार्यरत चुनाव आयोग को कांग्रेस सरकार ने नियुक्त किया था — फिर भी उस पर पक्षपात के आरोप नहीं लगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'सरकार को चुनाव आयोग को आदेश देने का कोई अधिकार बिल्कुल नहीं है।'
राहुल गांधी से अपील
आठवले ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी से अनुरोध करते हुए कहा कि उन्हें आंदोलन करने का अधिकार है, परंतु जानबूझकर माहौल बिगाड़ने का काम नहीं करना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जिन वोटों के काटे जाने पर विपक्ष रो रहा है, वे सभी वोट केवल विपक्ष को ही मिलने वाले थे — ऐसा नहीं कहा जा सकता। उनके अनुसार उन वोटों में सत्तापक्ष के समर्थक भी थे, इसलिए यह मान लेना गलत है कि यह सब जानबूझकर किया गया।
'कॉकरोच जनता पार्टी' और PM पर टिप्पणी
एसआईआर के अलावा आठवले ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नाम से चर्चित संगठन पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि इस पार्टी के नेता अभिजीत दीपके उनके अपने समुदाय के हैं और पेपर लीक मामले पर देश का ध्यान खींचने के लिए उन्हें श्रेय दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सरकार ने उनकी माँग पर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया। परंतु अब ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँगने पर उन्होंने असहमति जताई।
आठवले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंध में की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों की आलोचना करते हुए एक काव्यात्मक चुटकी लेते हुए कहा: 'एक कॉकरोच, तू थोड़ा सोच, मैं हूँ नरेंद्र मोदी की टीम का कोच, इसलिए ज़्यादा गड़बड़ मत कर कॉकरोच।' उनका कहना था कि प्रधानमंत्री के बारे में गलत और अपमानजनक टिप्पणियाँ किसी भी दृष्टि से उचित नहीं हैं।
आगे क्या होगा
एसआईआर विवाद अभी भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। चुनाव आयोग ने गलत तरीके से हटाए गए नामों को पुनः जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद और सड़क — दोनों मोर्चों पर उठाने की तैयारी में हैं, जबकि सत्तापक्ष पारदर्शिता के दावों के साथ इसे तकनीकी-प्रशासनिक सफाई अभियान बताता रहेगा।