एसआईआर पर कांग्रेस का विरोध: नित्यानंद राय बोले, 12 में 10 पुनरीक्षण कांग्रेस राज में हुए
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 5 नवंबर 2026 को सूरत में कहा कि मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के कुल 12 में से 10 अभ्यास कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के कार्यकाल में हुए, और तब पार्टी ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। अब उसी प्रक्रिया का विरोध करना बेबुनियाद है — यह राय का स्पष्ट आरोप था।
क्या है पूरा विवाद
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और कुछ विपक्षी दल हाल ही में एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, जिसके तहत मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं। राय ने सूरत के भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यालय में पार्टी के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान के तहत आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विपक्ष अपनी लगातार चुनावी हार को स्वीकार करने के बजाय इस वैध प्रक्रिया को राजनीतिक मुद्दा बना रहा है।
राय ने स्पष्ट किया कि संविधान और 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' चुनाव आयोग को मतदाता सूची की समीक्षा करने और उसमें सुधार करने का स्पष्ट अधिकार देते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी एसआईआर प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध माना है।
मुख्य आँकड़े: किसके नाम हटाए गए
एसआईआर के तहत तैयार मतदाता सूची के मसौदे का हवाला देते हुए राय ने बताया कि अब तक लगभग 13 करोड़ नाम हटाए गए हैं। इनका विवरण इस प्रकार है — लगभग 6.3 करोड़ ऐसे मतदाता जो दूसरी जगह चले गए, 3 करोड़ जो अपने पंजीकृत पते पर अनुपस्थित मिले, 2.8 करोड़ मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, और 1 करोड़ प्रविष्टियाँ डुप्लिकेट थीं।
राय ने पूछा, 'क्या लोकतंत्र में अयोग्य और डुप्लिकेट मतदाताओं के नाम बने रहने चाहिए?' उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए मतदाता सूची में सटीकता और पारदर्शिता अनिवार्य है।
सरकार का पक्ष: प्रक्रिया पारदर्शी और विधिसम्मत
राय ने ज़ोर देकर कहा कि एसआईआर का उद्देश्य किसी पात्र मतदाता का नाम हटाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में केवल कानूनी रूप से पात्र भारतीय नागरिकों के नाम ही हों। उन्होंने कहा कि नाम हटाने से पहले निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया, जिसमें संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी करना और अपना पक्ष रखने का अवसर देना शामिल था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विदेशी नागरिकों को मतदाता सूची में बनाए रखने से भारतीय नागरिकों के अधिकार, स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर और देश के संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कांग्रेस पर सीधा हमला
राय ने कांग्रेस के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जिस पार्टी ने कभी देश में आपातकाल लगाकर 'लोकतंत्र का गला घोंटा' था, वह आज लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा का दावा कर रही है। उन्होंने पार्टी पर संसदीय कार्यवाही से दूर रहकर 'नकली संसद' सत्र आयोजित करने का भी आरोप लगाया।
आँकड़े देते हुए राय ने कहा कि 2014 से 2025 के बीच कांग्रेस को 56 विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा, और एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही वह कई चुनाव हार चुकी थी।
दिल्ली के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की कथित टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए राय ने कहा कि उन्होंने भी नामों को हटाने की प्रक्रिया को एक सामान्य प्रक्रिया बताया था। राय ने आरोप लगाया, 'कांग्रेस अपनी चुनावी हार को स्वीकार करने के बजाय इस प्रक्रिया को एक राजनीतिक मुद्दा बना रही है।'
आगे की राजनीतिक संभावनाएँ
गौरतलब है कि एसआईआर पर यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कई राज्यों में चुनावी तैयारियाँ चल रही हैं। आलोचकों का कहना है कि बड़े पैमाने पर नाम हटाने की प्रक्रिया की स्वतंत्र निगरानी होनी चाहिए। BJP के 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान के तहत यह पहली बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस है, और आने वाले दिनों में पार्टी इस मुद्दे पर और आक्रामक हो सकती है।