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बीएलएमएसएचसीएस घोटाला: ईडी की छापेमारी में ₹103 करोड़ की संपत्ति जब्त, संस्थापक आर. प्रेमकुमार पर शिकंजा

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बीएलएमएसएचसीएस घोटाला: ईडी की छापेमारी में ₹103 करोड़ की संपत्ति जब्त, संस्थापक आर. प्रेमकुमार पर शिकंजा

सारांश

ईडी ने बीएलएमएसएचसीएस के संस्थापक आर. प्रेमकुमार पर शिकंजा कसते हुए केरल और तमिलनाडु में 12 ठिकानों पर छापेमारी की और ₹103 करोड़ से अधिक की संपत्तियाँ जब्त कीं — जिनमें रोल्स रॉयस समेत 8 लग्जरी कारें और 7,400 ग्राम सोना शामिल है। 320 संदिग्ध बैंक खातों की जांच से असली नुकसान और बड़ा हो सकता है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 4 नवंबर 2026 को केरल और तमिलनाडु में 12 ठिकानों पर छापेमारी कर ₹103 करोड़ से अधिक की संपत्तियाँ जब्त व फ्रीज़ कीं।
बीएलएमएसएचसीएस के संस्थापक व वास्तविक सीएमडी आर.
प्रेमकुमार पर जमाकर्ताओं के धन का दुरुपयोग कर परिवार के सदस्यों के नाम संपत्तियाँ खरीदने का कथित आरोप है।
जब्त संपत्तियों में रोल्स रॉयस और पोर्शे सहित 8 लग्जरी कारें (₹7 करोड़) और 7,400 ग्राम सोने के आभूषण (₹9.6 करोड़) शामिल हैं।
जांच में 320 बैंक खाते सामने आए; ईडी के अनुसार कुल दुरुपयोग सैकड़ों करोड़ रुपये तक हो सकता है।
एफआईआर में प्रोसीड्स ऑफ क्राइम करीब ₹80 करोड़ आँकी गई थी; वास्तविक राशि का निर्धारण जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारत लझना मल्टी-स्टेट हाउसिंग कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (बीएलएमएसएचसीएस) और इसके संस्थापक आर. प्रेमकुमार के विरुद्ध कथित धनशोधन मामले में ₹103 करोड़ से अधिक की संपत्तियाँ जब्त और फ्रीज़ कर बड़ी कार्रवाई की है। 4 नवंबर 2026 को ईडी के कोच्चि जोनल कार्यालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत केरल और तमिलनाडु में एक साथ 12 ठिकानों पर छापेमारी की।

छापेमारी का दायरा और स्थान

ईडी की यह कार्रवाई एर्नाकुलम, कोझिकोड, त्रिशूर, तिरुवनंतपुरम, मुन्नार और चेन्नई में एक साथ अंजाम दी गई। एजेंसी के अनुसार, जांच में सामने आया कि आर. प्रेमकुमार और उनके सहयोगी करीब 320 बैंक खातों का संचालन कर रहे थे, जिनके माध्यम से रकम को विभिन्न स्तरों पर स्थानांतरित कर धन के स्रोत को छिपाने का कथित प्रयास किया गया।

यह जांच केरल पुलिस द्वारा दर्ज एक एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सोसाइटी के वास्तविक सीएमडी आर. प्रेमकुमार ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जमाकर्ताओं से एकत्र किए गए करोड़ों रुपये परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के खातों में स्थानांतरित किए।

आरोप और कथित अनियमितताएँ

जांच एजेंसी के अनुसार, कथित तौर पर सोसाइटी की संपत्तियों को गिरवी रखकर ऋण लिया गया और उस धन का उपयोग निजी लाभ तथा परिवार के सदस्यों के नाम पर चल व अचल संपत्तियाँ खरीदने में किया गया। एफआईआर में अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) लगभग ₹80 करोड़ आँकी गई थी।

ईडी ने कहा है कि बैंक खातों की जांच से संकेत मिलता है कि सोसाइटी के सार्वजनिक धन का दुरुपयोग सैकड़ों करोड़ रुपये तक हो सकता है, जिसकी वास्तविक राशि का निर्धारण अभी किया जा रहा है। गौरतलब है कि छापेमारी के दौरान यह भी सामने आया कि आर. प्रेमकुमार अब भी सक्रिय रूप से सोसाइटी के कामकाज को नियंत्रित कर रहे थे और कई वैधानिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर रहे थे।

जब्त संपत्तियों का विवरण

छापेमारी के दौरान ईडी ने लगभग ₹7 करोड़ मूल्य की आठ लग्जरी कारें जब्त कीं, जिनमें पोर्शे, रोल्स रॉयस, टोयोटा वेलफायर, महिंद्रा ईवी 9ई और मर्सिडीज शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 7,400 ग्राम सोने के आभूषण भी जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग ₹9.6 करोड़ बताई गई है।

ईडी ने करीब ₹80 करोड़ मूल्य के शेयर, ₹5 करोड़ की अचल संपत्तियाँ और ₹1.86 करोड़ की बैंक जमा राशि भी फ्रीज़ या जब्त की है। जब्त और फ्रीज़ की गई कुल संपत्तियों का मूल्य ₹103 करोड़ से अधिक आँका गया है।

आगे की जांच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है और धनशोधन नेटवर्क के विस्तार तथा धन के अंतिम उपयोग की पड़ताल की जा रही है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में हाउसिंग कोऑपरेटिव सोसाइटियों में गड़बड़ियों को लेकर नियामकीय सतर्कता पहले से बढ़ी हुई है। आने वाले हफ्तों में ईडी की ओर से और गिरफ्तारियाँ या संपत्ति-जब्ती की कार्रवाइयाँ संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि आकस्मिक। आलोचकों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच नियामकीय जिम्मेदारी की अस्पष्टता ऐसे मामलों में देरी का मुख्य कारण बनती है। असली सवाल यह है कि हजारों जमाकर्ताओं को उनका पैसा कब और कितना वापस मिलेगा — और इसका जवाब अभी किसी के पास नहीं है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएलएमएसएचसीएस घोटाला क्या है?
भारत लझना मल्टी-स्टेट हाउसिंग कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (बीएलएमएसएचसीएस) पर आरोप है कि इसके संस्थापक आर. प्रेमकुमार ने जमाकर्ताओं के धन का दुरुपयोग कर परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियाँ खरीदीं और सोसाइटी की संपत्तियाँ गिरवी रखकर ऋण लिया। ईडी इस मामले में पीएमएलए के तहत जांच कर रही है।
ईडी ने छापेमारी में कुल कितनी संपत्ति जब्त की?
4 नवंबर 2026 को 12 ठिकानों पर की गई छापेमारी में ईडी ने ₹103 करोड़ से अधिक की संपत्तियाँ जब्त और फ्रीज़ कीं। इनमें ₹7 करोड़ की 8 लग्जरी कारें, ₹9.6 करोड़ के सोने के आभूषण, ₹80 करोड़ के शेयर, ₹5 करोड़ की अचल संपत्तियाँ और ₹1.86 करोड़ की बैंक जमा राशि शामिल है।
आर. प्रेमकुमार पर क्या आरोप हैं?
केरल पुलिस की एफआईआर के अनुसार, आर. प्रेमकुमार ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जमाकर्ताओं से एकत्र धन को परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के खातों में स्थानांतरित किया और उससे संपत्तियाँ खरीदीं। ईडी की जांच में सामने आया कि वे अब भी सोसाइटी के कामकाज को सक्रिय रूप से नियंत्रित कर रहे थे।
ईडी की जांच में 320 बैंक खाते क्यों महत्वपूर्ण हैं?
जांच एजेंसी के अनुसार आर. प्रेमकुमार और उनके सहयोगी करीब 320 बैंक खातों का संचालन कर रहे थे। इन खातों के ज़रिए धन को विभिन्न स्तरों पर स्थानांतरित कर मनी लॉन्ड्रिंग का कथित प्रयास किया गया। ईडी का मानना है कि कुल दुरुपयोग सैकड़ों करोड़ रुपये तक हो सकता है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
ईडी ने कहा है कि धनशोधन नेटवर्क के विस्तार और धन के अंतिम उपयोग की जांच जारी है। कुल दुरुपयोग की वास्तविक राशि अभी निर्धारित की जा रही है और आगे की कार्रवाई — जिसमें और गिरफ्तारियाँ या संपत्ति-जब्ती शामिल हो सकती है — संभावित है।
राष्ट्र प्रेस
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