4 नवंबर 2026
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ईडी की बड़ी कार्रवाई: केरल और चेन्नई में 11 जगहों पर छापे, BLM सहकारी समिति के CMD पर करोड़ों के गबन का आरोप

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ईडी की बड़ी कार्रवाई: केरल और चेन्नई में 11 जगहों पर छापे, BLM सहकारी समिति के CMD पर करोड़ों के गबन का आरोप

सारांश

ईडी ने केरल और चेन्नई में एक साथ 11 ठिकानों पर छापे मारे — निशाने पर है BLM सहकारी समिति के CMD आर. प्रेमकुमार, जिन पर जमाकर्ताओं के करोड़ों रुपये परिजनों के खातों में ट्रांसफर करने और 500 एकड़ जमीन हड़पने का आरोप है। साथ ही KPSC भर्ती विवाद में SIT जाँच के आदेश से केरल की राजनीति भी गरम हुई।

मुख्य बातें

ईडी ने 4 नवंबर 2026 को केरल और चेन्नई में 11 ठिकानों पर छापेमारी की।
BLM मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के CMD आर.
प्रेमकुमार पर जमाकर्ताओं के करोड़ों रुपये परिजनों के खातों में ट्रांसफर करने का आरोप।
कथित तौर पर सोसाइटी का ' रागम थिएटर ' बिना भुगतान के गिरवी रखा गया और कांचीपुरम में पत्नी के नाम 500 एकड़ जमीन खरीदी गई।
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने KPSC भर्ती विवाद में एसआईटी प्रमुख अजिता बेगम को जाँच का निर्देश दिया।
DSP पद के लिए 17,392 आवेदकों में से एसएफआई नेता केजे जिथिन को कथित अनियमितताओं से चुने जाने का आरोप।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को केरल और चेन्नई में 11 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई 'भारत लझना मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी' (बीएलएम) के संस्थापक और वास्तविक सीएमडी आर. प्रेमकुमार तथा अन्य संदिग्धों के खिलाफ जारी धनशोधन जाँच के तहत की गई।

मुख्य आरोप और छापेमारी की पृष्ठभूमि

अधिकारियों के अनुसार, आर. प्रेमकुमार और उनके सहयोगियों पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए बीएलएम सोसाइटी में आम जमाकर्ताओं से जमा की गई करोड़ों रुपये की राशि को अपनी पत्नी व रिश्तेदारों के बैंक खातों में कथित तौर पर स्थानांतरित किया।

यह ऐसे समय में आया है जब सहकारी समितियों में वित्तीय अनियमितताओं के मामले देशभर में बढ़ते जा रहे हैं। बीएलएम एक बहु-राज्यीय सहकारी संस्था है, जिसके सदस्य मुख्यतः केरल और तमिलनाडु में फैले हैं।

संपत्ति गिरवी और ज़मीन अधिग्रहण के गंभीर आरोप

जाँच एजेंसी के अनुसार, कथित तौर पर सोसाइटी को कोई भुगतान किए बिना ही सोसाइटी के 'रागम थिएटर' को 'ब्रियोस फिनवेस्ट' के पास गिरवी रख दिया गया। इसके अलावा, कांचीपुरम में आर. प्रेमकुमार की पत्नी के नाम पर लगभग 500 एकड़ भूमि अर्जित की गई — यह भूमि सोसाइटी के धन से खरीदी गई बताई जा रही है।

गौरतलब है कि इस प्रकार की संपत्ति-हेराफेरी में अक्सर धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई होती है, जिसमें ईडी संलग्न संपत्तियों को कुर्क कर सकती है। फिलहाल, छापेमारी में बरामदगी और अन्य साक्ष्यों के बारे में आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है।

केरल में KPSC भर्ती विवाद: SIT जाँच का निर्देश

इसी बीच, केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मंगलवार को क्राइम ब्रांच की एसआईटी को एक अलग मामले में जाँच का निर्देश दिया। आरोप है कि केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) ने नियमों का उल्लंघन कर एक विशेष भर्ती प्रक्रिया के ज़रिये एसएफआई के नेता केजे जिथिन को पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर नियुक्त करने का प्रयास किया।

इस पद के लिए 17,392 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था और आवेदन की अंतिम तिथि 10 सितंबर 2025 थी। लिखित परीक्षा 31 दिसंबर को, शारीरिक दक्षता परीक्षा 16 मार्च 2026 को, साक्षात्कार 22 अप्रैल को और अंतिम रैंक सूची 6 मई को प्रकाशित की गई।

सरकार की प्रतिक्रिया और शिकायत

गृह मंत्री चेन्निथला ने क्राइम ब्रांच एसआईटी की प्रमुख अजिता बेगम को 'सेव यूनिवर्सिटी फोरम' के अध्यक्ष आरएस शशिकुमार की शिकायत की जाँच सौंपी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह भर्ती प्रक्रिया पीएससी अध्यक्ष एमआर बैजू के नेतृत्व में आगे बढ़ाई गई थी और पिछली एलडीएफ सरकार का कार्यकाल समाप्त होने से पहले जिथिन की नियुक्ति सुनिश्चित करने की मंशा थी।

आलोचकों का कहना है कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है और सार्वजनिक संस्थाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप का उदाहरण बनता है।

आगे क्या होगा

ईडी की जाँच में बरामदगी की आधिकारिक जानकारी जल्द सामने आने की उम्मीद है। बीएलएम मामले में अगर संपत्ति कुर्की तक बात पहुँचती है, तो हज़ारों जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा का सवाल और गहरा हो जाएगा। KPSC भर्ती विवाद में एसआईटी की रिपोर्ट से केरल की राजनीति में नई हलचल संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक व्यापक पैटर्न की कड़ी है — जहाँ जमाकर्ताओं का विश्वास जीतकर उनकी बचत को प्रमोटरों के परिजनों की संपत्ति में बदल दिया जाता है। असली सवाल यह है कि जब तक ईडी दरवाज़ा खटखटाती है, तब तक अधिकांश धन कहाँ जा चुका होता है — और क्या जमाकर्ताओं को उनकी रकम मिल पाएगी। KPSC विवाद एक अलग लेकिन उतनी ही अहम कहानी है: यदि सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया में राजनीतिक पक्षपात के आरोप सही निकले, तो यह केरल में सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर गहरा धब्बा होगा।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने केरल और चेन्नई में छापे क्यों मारे?
ईडी ने 'भारत लझना मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी' (BLM) के CMD आर. प्रेमकुमार और अन्य संदिग्धों के खिलाफ धनशोधन जाँच के तहत केरल और चेन्नई में 11 जगहों पर छापेमारी की। आरोप है कि जमाकर्ताओं के करोड़ों रुपये कथित तौर पर परिजनों के खातों में ट्रांसफर किए गए और समिति की संपत्तियाँ बेजा तरीके से गिरवी रखी गईं।
BLM सहकारी समिति पर क्या आरोप हैं?
आरोप है कि आर. प्रेमकुमार और सहयोगियों ने जमाकर्ताओं से जमा करोड़ों रुपये पत्नी व रिश्तेदारों के खातों में स्थानांतरित किए, सोसाइटी के 'रागम थिएटर' को 'ब्रियोस फिनवेस्ट' के पास बिना भुगतान के गिरवी रखा और कांचीपुरम में पत्नी के नाम लगभग 500 एकड़ जमीन अर्जित की।
KPSC भर्ती विवाद क्या है और इसमें SIT क्यों बिठाई गई?
आरोप है कि KPSC ने पिछली एलडीएफ सरकार का कार्यकाल खत्म होने से पहले एसएफआई नेता केजे जिथिन को एक विशेष भर्ती प्रक्रिया के जरिए DSP पद पर नियुक्त करने की कोशिश की। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने SIT प्रमुख अजिता बेगम को इस शिकायत की जाँच का निर्देश दिया है।
DSP भर्ती प्रक्रिया में कितने उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था?
इस पद के लिए 17,392 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। आवेदन की अंतिम तिथि 10 सितंबर 2025 थी, लिखित परीक्षा 31 दिसंबर को, शारीरिक दक्षता परीक्षा 16 मार्च 2026 को, साक्षात्कार 22 अप्रैल को और अंतिम रैंक सूची 6 मई को प्रकाशित की गई।
ईडी की इस कार्रवाई के बाद आगे क्या होगा?
छापेमारी में बरामदगी और अन्य साक्ष्यों की आधिकारिक जानकारी जल्द सामने आने की उम्मीद है। यदि ईडी को पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो PMLA के तहत संपत्ति कुर्की की कार्रवाई हो सकती है, जिसका सीधा असर BLM के हज़ारों जमाकर्ताओं के हितों पर पड़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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