क्या सबरीमाला मंदिर से सोने की चोरी मामले में ईडी का बड़ा एक्शन हो रहा है?
सारांश
Key Takeaways
- ईडी की छापेमारी का मुख्य उद्देश्य धन का पता लगाना है।
- संपत्तियों के गलत इस्तेमाल का मामला गंभीर है।
- जांच में अन्य वित्तीय गड़बड़ियों के भी संकेत मिले हैं।
कोच्चि, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोच्चि जोनल ऑफिस ने मंगलवार को सबरीमाला मंदिर से संबंधित सोने और अन्य संपत्तियों के गलत इस्तेमाल के मामले में 21 जगहों पर छापेमारी की। इसका मुख्य उद्देश्य अपराध से प्राप्त धनराशि का पता लगाना और मौके से डिजिटल तथा दस्तावेजी सबूतों को जब्त करना था।
ईडी की यह कार्रवाई केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के 21 स्थानों पर की गई। यह कार्यवाही प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई थी।
इस पूरे मामले की जड़ केरल क्राइम ब्रांच में दर्ज कई एफआईआर में है, जिसमें बताया गया कि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के कुछ अधिकारी, निजी व्यक्ति, बिचौलिया और ज्वैलर्स सोने की चोरी और अन्य वित्तीय अनियमितताओं में शामिल थे। 9 जनवरी 2026 को कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद इस मामले में ईसीआईआर दर्ज की गई।
प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि सोने की परत चढ़ी पवित्र कलाकृतियों को जानबूझकर आधिकारिक रिकॉर्ड में 'कॉपर प्लेट्स' के रूप में दर्ज किया गया और 2019 से 2025 के बीच मंदिर से चोरी करके बाहर ले जाया गया। आरोप है कि सोने को चेन्नई और कर्नाटक में निजी प्लांट में रासायनिक प्रक्रियाओं के जरिए निकाला गया और इससे अर्जित धन को छुपाया गया ताकि किसी को शक न हो।
इस कार्रवाई का उद्देश्य अपराध से हुई धनराशि का पता लगाना, लाभार्थियों की पहचान करना, सबूत जुटाना और डिजिटल व दस्तावेजी सबूत जब्त करना है। साथ ही यह भी जांचना है कि इस मनी लॉन्ड्रिंग का दायरा कितना बड़ा है।
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि सबरीमाला मंदिर में अन्य वित्तीय गड़बड़ियां और घोटाले भी हुए हैं, जैसे मंदिर के भेंट और धार्मिक अनुष्ठानों से संबंधित गलत इस्तेमाल। इन सभी मामलों की भी पीएमएलए के तहत जांच की जा रही है।