महाकालेश्वर मंदिर में रंग पंचमी का भव्य उत्सव, बाबा का अनोखा श्रृंगार
सारांश
Key Takeaways
- रंग पंचमी महाकालेश्वर मंदिर में मनाया जाने वाला एक प्रमुख उत्सव है।
- भक्तों ने बाबा महाकाल का अद्भुत श्रृंगार किया।
- गेर यात्रा जीत और शौर्य का प्रतीक है।
- यह उत्सव धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है।
- महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ इस पवित्र पर्व का गवाह है।
उज्जैन, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। होली के बाद मनाई जाने वाली देवता की होली, जिसे रंग पंचमी कहा जाता है, के अवसर पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
सुबह से ही भक्तों का तांता मंदिर के बाहर लगा रहा, और पूरा परिसर 'हर-हर महादेव' के उत्साही जयकारों से गूंज उठा। बाबा को केसरिया जल और गुलाल भेंट देने के बाद भक्तों ने अपने आराध्य के साथ होली खेली।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भस्म आरती के दौरान केसरिया जल अर्पित करके रंग पंचमी का उत्सव मनाया गया। शाम को शहर में पारंपरिक गेर जुलूस का आयोजन भी किया जाएगा। सुबह 4 बजे वीरभद्र से आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए, उसके बाद गर्भगृह में सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया और हर्बल गुलाल अर्पित कर रंग पंचमी की शुरुआत की गई। इसके पश्चात, पंचामृत अर्पित कर बाबा की नियमित भस्म आरती और श्रृंगार किया गया।
रंग पंचमी के इस पर्व पर बाबा के दिव्य श्रृंगार को देखने के लिए भक्तों ने बाबा के मस्तक पर चाँद, बेलपत्र और सूरज अर्पित किया। भांग और सूखे मेवों की मदद से महाकाल का श्रृंगार किया गया। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि "यह एक प्राचीन परंपरा है, जो आज भी महाकालेश्वर मंदिर में निभाई जाती है। यहाँ होली, रंग पंचमी और गुड़ी पड़वा जैसे सभी त्योहार परंपरा के अनुसार मनाए जाते हैं। भक्त आज के दिन बाबा के साथ होली खेलने के लिए आते हैं।"
उन्होंने कहा, "आज की भस्म आरती में विशेष फूलों से बने रंग से बाबा के साथ रंग पंचमी मनाई गई और बाबा को केसरिया रंग और जल भी अर्पित किया गया। शाम को गेर यात्रा का आयोजन होगा, जिसमें भक्तों पर रंगों की बौछार की जाती है। गेर यात्रा विक्रमादित्य के समय से चली आ रही है और यह जीत और शौर्य का प्रतीक है। यह यात्रा न केवल मध्य प्रदेश में, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में भी आयोजित की जाती है।"