मध्य प्रदेश: 15 नवंबर तक 20 लाख ग्रामीण संपत्ति पंजीकरण का लक्ष्य, CM मोहन यादव मुरैना अभियान में शामिल होंगे
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में ग्रामीण संपत्ति पंजीकरण अभियान को तेज़ करते हुए 15 नवंबर 2026 तक 20 लाख पंजीकरण पूरे करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक 17.09 लाख से अधिक ग्रामीण संपत्तियों का पंजीकरण पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव शुक्रवार को मुरैना जिले के करुआ गाँव में आयोजित एक विशेष पंजीकरण कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे।
अभियान की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
धनतेरस के अवसर पर शुरू किए गए इस विशेष अभियान का मुख्य लक्ष्य राज्य के चुनिंदा गाँवों में पात्र संपत्तियों का 100 प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करना है। इस पहल के तहत ग्रामीण रिहायशी इलाकों में संपत्तियों का सर्वेक्षण किया जाता है और योग्य लाभार्थियों को उनके अधिकारों के अभिलेख तथा स्वामित्व दस्तावेज़ सौंपे जाते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के अंतर्गत देशभर में ग्रामीण भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। मध्य प्रदेश का यह अभियान उसी व्यापक ढाँचे का हिस्सा माना जा रहा है।
नेताओं की भागीदारी और राजनीतिक महत्त्व
पंजीकरण प्रक्रिया को सुगम बनाने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए कि लाभार्थियों को स्वामित्व दस्तावेज़ समय पर मिलें, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को इस अभियान में प्रत्यक्ष भूमिका दी गई है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी मुख्यमंत्री यादव के साथ करुआ गाँव के कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।
गौरतलब है कि मुरैना जिले को ग्रामीण भू-स्वामित्व की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है, और वहाँ मुख्यमंत्री की उपस्थिति इस अभियान को राजनीतिक प्राथमिकता का संकेत देती है।
आम नागरिकों पर असर
मुख्यमंत्री यादव ने इस पहल के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा, 'प्लॉट या घर होने के साथ-साथ, संपत्ति के लिए वैध और स्थायी राजस्व दस्तावेज़ होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।' सरकार का मानना है कि औपचारिक पंजीकरण से ग्रामीण परिवारों को कानूनी स्वामित्व साबित करने में मदद मिलेगी, जिससे वे बैंक ऋण और अन्य वित्तीय सुविधाओं का लाभ उठाने में सक्षम होंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, औपचारिक भू-स्वामित्व दस्तावेज़ों की अनुपस्थिति ग्रामीण भारत में वित्तीय समावेश की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक रही है। संपत्ति को वित्तीय संपत्ति (एसेट) के रूप में इस्तेमाल करने की क्षमता से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
क्या होगा आगे
मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि 15 नवंबर की समयसीमा तक शेष लक्ष्य को पूरा करने के लिए राज्यभर में एक साथ विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इस पहल से ग्रामीण संपत्ति अभिलेखों को सुदृढ़ करने, परिवारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने और उनकी संपत्तियों को वित्तीय संसाधन के रूप में सक्रिय करने की उम्मीद है।