31 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण: थांदला में सीएम मोहन यादव ने ₹300 करोड़ के ऋण वितरण को सराहा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण: थांदला में सीएम मोहन यादव ने ₹300 करोड़ के ऋण वितरण को सराहा

सारांश

झाबुआ के थांदला में सीएम मोहन यादव ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को ₹300 करोड़ के ऋण वितरण को 'आत्मनिर्भरता का बड़ा आंदोलन' बताया। मध्य प्रदेश में पंचायतों में 50% और सरकारी सेवाओं में 35% महिला आरक्षण — यह राज्य की महिला-केंद्रित नीति का ठोस खाका है।

मुख्य बातें

सीएम मोहन यादव ने 31 जुलाई को झाबुआ के थांदला में स्व-सहायता समूह कार्यक्रम को संबोधित किया।
स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ₹300 करोड़ के ऋण वितरित किए गए हैं।
मध्य प्रदेश में नगरीय निकायों और पंचायतों में महिलाओं के लिए 50% और सरकारी सेवाओं में 35% आरक्षण लागू है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध बताए गए।
कृषि, पशुपालन, बैंक और उद्यम सखियाँ जनजातीय अंचल में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 31 जुलाई को झाबुआ जिले के थांदला में स्व-सहायता समूहों के क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण का कार्य सरकारी और सामाजिक — दोनों स्तरों पर एक साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ₹300 करोड़ के ऋण दिए जा चुके हैं, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

स्व-सहायता समूहों की बढ़ती भूमिका

मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि बहनें स्व-सहायता समूहों को नई ऊर्जा और दिशा दे रही हैं। कृषि सखी, पशुपालन सखी, बैंक सखी और उद्यम सखी जैसी भूमिकाओं में महिलाएँ सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। उनके अनुसार, इस सहभागिता से प्रत्येक परिवार में आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खुल रहे हैं और यह आंदोलन अब एक व्यापक सामाजिक बदलाव का रूप ले रहा है।

आरक्षण और सरकारी प्रतिबद्धता

यादव ने बताया कि मध्य प्रदेश में नगरीय निकायों और पंचायतों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत स्थान आरक्षित हैं, जबकि सरकारी सेवाओं में यह आरक्षण 35 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा और राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्ध हैं।

गुजरात मॉडल और जनजातीय विकास

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी लगातार तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब झाबुआ के आसपास के जनजातीय अंचल में विकास के उल्लेखनीय कार्य हुए और पूरी दुनिया गुजरात की विकास-शक्ति से परिचित हुई। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश तेज़ गति से प्रगति कर रहा है।

आगे की राह

यादव के अनुसार, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की समृद्धि का मार्ग लगातार विस्तृत हो रहा है। सहयोग और सामूहिक सहभागिता के बल पर बहनें नए आर्थिक कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। सरकार का लक्ष्य इस आंदोलन को और अधिक संगठित और प्रभावशाली बनाना है, ताकि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की महिलाएँ भी मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में सक्रिय भागीदार बन सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इन ऋणों की वापसी दर और महिलाओं की आय में वास्तविक वृद्धि का स्वतंत्र मूल्यांकन कितना पारदर्शी है। 50% आरक्षण के आँकड़े प्रभावशाली हैं, परंतु पंचायत स्तर पर महिला प्रतिनिधियों की वास्तविक निर्णय-शक्ति और 'प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व' की समस्या पर सरकारी मंचों पर चर्चा अभी भी सीमित है। राजनीतिक भाषणों में विकास के दावे और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई को पाटने के लिए जवाबदेही तंत्र की ज़रूरत है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झाबुआ के थांदला में आयोजित कार्यक्रम में क्या हुआ?
31 जुलाई को थांदला में स्व-सहायता समूहों के क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसे मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संबोधित किया। इस अवसर पर महिला स्व-सहायता समूहों को ₹300 करोड़ के ऋण वितरण की जानकारी दी गई।
मध्य प्रदेश में महिलाओं के लिए कितना आरक्षण है?
मध्य प्रदेश में नगरीय निकायों और पंचायतों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत और सरकारी सेवाओं में 35 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है। इसके अलावा, केंद्र स्तर पर संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया गया।
स्व-सहायता समूहों को ₹300 करोड़ का ऋण किसने दिया?
मुख्यमंत्री यादव के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ₹300 करोड़ के ऋण दिए गए हैं। यह ऋण महिलाओं की आत्मनिर्भरता और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वितरित किए गए हैं।
कृषि सखी, बैंक सखी और उद्यम सखी क्या होती हैं?
ये स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की विशेष भूमिकाएँ हैं — कृषि सखी खेती से जुड़े कार्यों में, पशुपालन सखी पशु-देखभाल में, बैंक सखी वित्तीय लेन-देन में और उद्यम सखी लघु उद्योगों को बढ़ावा देने में सहायता करती हैं। ये भूमिकाएँ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने का काम करती हैं।
झाबुआ जिले में महिला सशक्तिकरण क्यों महत्वपूर्ण है?
झाबुआ मध्य प्रदेश का एक जनजातीय बहुल जिला है, जहाँ ऐतिहासिक रूप से आर्थिक पिछड़ापन रहा है। यहाँ स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को ऋण और प्रशिक्षण देकर उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की कोशिश की जा रही है, जो पूरे जनजातीय अंचल के विकास के लिए अहम है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 13 घंटे पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले