मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण: थांदला में सीएम मोहन यादव ने ₹300 करोड़ के ऋण वितरण को सराहा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 31 जुलाई को झाबुआ जिले के थांदला में स्व-सहायता समूहों के क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण का कार्य सरकारी और सामाजिक — दोनों स्तरों पर एक साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ₹300 करोड़ के ऋण दिए जा चुके हैं, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
स्व-सहायता समूहों की बढ़ती भूमिका
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि बहनें स्व-सहायता समूहों को नई ऊर्जा और दिशा दे रही हैं। कृषि सखी, पशुपालन सखी, बैंक सखी और उद्यम सखी जैसी भूमिकाओं में महिलाएँ सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। उनके अनुसार, इस सहभागिता से प्रत्येक परिवार में आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खुल रहे हैं और यह आंदोलन अब एक व्यापक सामाजिक बदलाव का रूप ले रहा है।
आरक्षण और सरकारी प्रतिबद्धता
यादव ने बताया कि मध्य प्रदेश में नगरीय निकायों और पंचायतों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत स्थान आरक्षित हैं, जबकि सरकारी सेवाओं में यह आरक्षण 35 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा और राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
गुजरात मॉडल और जनजातीय विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी लगातार तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब झाबुआ के आसपास के जनजातीय अंचल में विकास के उल्लेखनीय कार्य हुए और पूरी दुनिया गुजरात की विकास-शक्ति से परिचित हुई। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश तेज़ गति से प्रगति कर रहा है।
आगे की राह
यादव के अनुसार, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की समृद्धि का मार्ग लगातार विस्तृत हो रहा है। सहयोग और सामूहिक सहभागिता के बल पर बहनें नए आर्थिक कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। सरकार का लक्ष्य इस आंदोलन को और अधिक संगठित और प्रभावशाली बनाना है, ताकि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की महिलाएँ भी मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में सक्रिय भागीदार बन सकें।