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मध्य प्रदेश में महिला-बाल कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता: CM मोहन यादव ने की समीक्षा बैठक

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मध्य प्रदेश में महिला-बाल कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता: CM मोहन यादव ने की समीक्षा बैठक

सारांश

मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव ने महिला-बाल विकास की समीक्षा में बड़े आँकड़े पेश किए — लाडली बहना के तहत ₹47,775 करोड़ वितरित, 15 लाख 84 हजार बालिकाओं को लाडली लक्ष्मी का लाभ, और 66 हजार बच्चों को हेल्पलाइन सहायता। PPP मोड पर वर्किंग वुमेन हॉस्टल और नए वन स्टॉप सेंटर भी स्वीकृत।

मुख्य बातें

CM मोहन यादव ने 1 जून 2026 को भोपाल में महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक की।
लाडली बहना योजना के तहत जनवरी 2024 से मई 2026 तक 1 करोड़ 25 लाख से अधिक महिलाओं को ₹47,775 करोड़ से अधिक की सहायता दी गई।
लाडली लक्ष्मी योजना के तहत 15 लाख 84 हजार बालिकाओं को ₹537 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित।
चाइल्ड हेल्पलाइन के जरिए 66 हजार से अधिक बच्चों को सहायता; 13 जिलों में जोखिमग्रस्त बच्चों की मैपिंग जारी।
देवास, नर्मदापुरम, झाबुआ, सिंगरौली में वर्किंग वुमेन हॉस्टल निर्माण शुरू; नए वन स्टॉप सेंटर भी स्वीकृत।
9 लाख 28 हजार बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण-पत्र; इस नवाचार को राष्ट्रीय सराहना मिली।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1 जून 2026 को भोपाल में महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य की महिलाओं और बच्चों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में जन भागीदारी और जवाबदेही को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।

मुख्य निर्देश एवं घोषणाएँ

मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए। पोषण स्तर सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ-साथ निजी अस्पतालों और संस्थाओं को भी इस अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए गए। उन्होंने अन्य राज्यों और प्रदेश के जिलों में हो रहे सफल नवाचारों को अपनाने के लिए कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा।

मैदानी स्तर पर बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रोत्साहन देने और लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए। जिन औद्योगिक इकाइयों में महिला कर्मियों की संख्या अधिक है, वहाँ कामकाजी महिलाओं के लिए पीपीपी मोड पर हॉस्टल निर्माण की कार्ययोजना बनाने को कहा गया।

वर्किंग वुमेन हॉस्टल और वन स्टॉप सेंटर

बैठक में जानकारी दी गई कि देवास, नर्मदापुरम, झाबुआ और सिंगरौली में वर्किंग वुमेन हॉस्टल का निर्माण प्रारंभ हो चुका है। संकटग्रस्त महिलाओं की सहायता के लिए पांढुर्णा, मऊगंज, मैहर, पेटलावद-झाबुआ, इंदौर के लसूड़िया और सांवेर तथा धार के मनावर और पीथमपुर में वन स्टॉप सेंटर स्वीकृत किए गए हैं।

बाल कल्याण: हेल्पलाइन और नवाचार

चाइल्ड हेल्पलाइन के अंतर्गत 51 जिला स्तरीय और 1 राज्य स्तरीय हेल्प सेंटर के माध्यम से 66 हजार से अधिक बच्चों को सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। जोखिमग्रस्त बच्चों की मैपिंग के लिए 13 जिलों में प्रक्रिया जारी है।

प्रदेश में 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 9 लाख 28 हजार बच्चों के लिए ग्रेजुएशन सेरेमनी आयोजित कर उन्हें विद्यारंभ प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए और शाला में सुगम प्रवेश सुनिश्चित किया गया। गौरतलब है कि इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सराहना मिली है। बाल देखरेख संस्थाओं द्वारा मुख्यमंत्री खेल एवं सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

लाडली बहना और लाडली लक्ष्मी योजना की उपलब्धियाँ

मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना के अंतर्गत जनवरी 2024 से मई 2026 तक प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख से अधिक पात्र महिलाओं को ₹47,775 करोड़ से अधिक की मासिक आर्थिक सहायता वितरित की जा चुकी है। मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना के तहत मई 2026 तक 15 लाख 84 हजार बालिकाओं का पंजीयन कर ₹537 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की गई है।

यह समीक्षा ऐसे समय में हुई है जब राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण और बाल पोषण के मोर्चे पर अपनी उपलब्धियों को राष्ट्रीय पटल पर प्रस्तुत करने की कोशिश में है। आने वाले महीनों में योजनाओं के क्रियान्वयन की गति और जमीनी असर ही इन घोषणाओं की वास्तविक कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

775 करोड़ के वितरण के आँकड़े प्रभावशाली हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि इस व्यय का जमीनी पोषण और महिला सशक्तिकरण पर मापनीय असर कितना पड़ा। लाडली बहना जैसी प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण योजनाएँ राजनीतिक रूप से लोकप्रिय हैं, परंतु अर्थशास्त्री इनकी दीर्घकालिक प्रभावशीलता पर एकमत नहीं हैं। 13 जिलों में जोखिमग्रस्त बच्चों की मैपिंग अभी जारी है — यानी राज्य के बाकी जिलों में यह काम अधूरा है, जो क्रियान्वयन की गति पर सवाल उठाता है। वर्किंग वुमेन हॉस्टल की PPP योजना सराहनीय है, किंतु केवल चार जिलों से शुरुआत यह दर्शाती है कि औद्योगिक जिलों में कामकाजी महिलाओं की आवास जरूरतें अभी पूरी तरह संबोधित नहीं हुई हैं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना के तहत अब तक कितनी राशि वितरित की गई है?
जनवरी 2024 से मई 2026 तक मध्य प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख से अधिक पात्र महिलाओं को ₹47,775 करोड़ से अधिक की मासिक आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है।
मध्य प्रदेश में वर्किंग वुमेन हॉस्टल कहाँ-कहाँ बन रहे हैं?
देवास, नर्मदापुरम, झाबुआ और सिंगरौली में वर्किंग वुमेन हॉस्टल का निर्माण शुरू हो चुका है। CM मोहन यादव ने अधिक महिला कर्मियों वाली औद्योगिक इकाइयों के पास PPP मोड पर और हॉस्टल बनाने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
मध्य प्रदेश चाइल्ड हेल्पलाइन ने कितने बच्चों की मदद की है?
51 जिला स्तरीय और 1 राज्य स्तरीय हेल्प सेंटर के माध्यम से 66 हजार से अधिक बच्चों को सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा 13 जिलों में जोखिमग्रस्त बच्चों की मैपिंग की प्रक्रिया जारी है।
लाडली लक्ष्मी योजना में अब तक कितनी बालिकाओं को लाभ मिला?
मई 2026 तक 15 लाख 84 हजार बालिकाओं का पंजीयन किया जा चुका है और ₹537 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की गई है। यह योजना बालिकाओं की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही है।
मध्य प्रदेश के विद्यारंभ नवाचार को राष्ट्रीय सराहना क्यों मिली?
5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 9 लाख 28 हजार बच्चों के लिए ग्रेजुएशन सेरेमनी आयोजित कर उन्हें विद्यारंभ प्रमाण-पत्र दिए गए, जिससे शाला में उनका सुगम प्रवेश सुनिश्चित हुआ। इस अनूठे प्रयोग को राष्ट्रीय स्तर पर बाल शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में सराहा गया है।
राष्ट्र प्रेस
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