5 नवंबर 2026
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गोकुल मिल्क यूनियन चुनाव: नसीम खान का आरोप — किसानों का जनादेश पलटने की साजिश रच रही महाराष्ट्र सरकार

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गोकुल मिल्क यूनियन चुनाव: नसीम खान का आरोप — किसानों का जनादेश पलटने की साजिश रच रही महाराष्ट्र सरकार

सारांश

गोकुल मिल्क यूनियन चुनाव में BJP समर्थित पैनल की हार के बाद कांग्रेस नेता नसीम खान ने महाराष्ट्र सरकार पर साढ़े पाँच लाख किसानों का जनादेश पलटने का आरोप लगाया — यह विवाद महाराष्ट्र की सहकारी राजनीति की गहरी खाई को उजागर करता है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता नसीम खान ने 5 नवंबर 2026 को गोकुल मिल्क यूनियन चुनाव परिणामों को पलटने की कोशिश का आरोप महाराष्ट्र सरकार और BJP पर लगाया।
कांग्रेस समर्थित पैनल को चुनाव में भारी बहुमत मिला; BJP समर्थित पैनल को बड़ी हार का सामना करना पड़ा।
संस्था से जुड़े साढ़े पाँच लाख से अधिक किसानों की आजीविका इस यूनियन पर निर्भर बताई जाती है।
खान के अनुसार सरकार ने संस्था में चार मनोनीत निदेशकों को मतदान अधिकार देकर नियंत्रण वापस पाने की कोशिश की, जिसे उन्होंने गैर-कानूनी बताया।
खान ने PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर पिछले लोकसभा सत्र में संसद से अनुपस्थित रहने और विपक्ष के सवालों से बचने का भी आरोप लगाया।
दिग्विजय सिंह की सनातन धर्म-हिंदुत्व टिप्पणी पर खान ने कहा कि BJP और RSS ने हिंदुत्व का इस्तेमाल राजनीतिक स्वार्थ के लिए किया।

कांग्रेस नेता नसीम खान ने 5 नवंबर 2026 को मुंबई में गोकुल मिल्क यूनियन चुनावों के बाद उपजे विवाद पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस संस्था से साढ़े पाँच लाख से अधिक किसान जुड़े हैं, उस पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए सरकार कथित तौर पर गैर-कानूनी हथकंडे अपना रही है।

चुनाव परिणाम और विवाद की जड़

खान के अनुसार, गोकुल मिल्क यूनियन के हालिया चुनावों में कांग्रेस समर्थित पैनल को भारी बहुमत मिला, जबकि BJP समर्थित पैनल को किसानों और मतदाताओं ने करारी शिकस्त दी। उन्होंने कहा कि यह संस्था लाखों किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है और चुनाव में किसानों ने अपना फैसला साफ-साफ सुना दिया है।

गौरतलब है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए थे, जिसे खान ने उचित और ज़रूरी बताया।

सरकार पर गैर-कानूनी कदम उठाने का आरोप

नसीम खान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थित पैनल को संस्था का गठन करने से रोकने के लिए सरकार ने एक विवादास्पद व्यवस्था लागू की है। उनके अनुसार, सरकार ने संस्था में चार निदेशकों को मतदान का अधिकार प्रदान किया है और चार सदस्य सरकार की ओर से मनोनीत किए जाएंगे। खान ने कहा कि इस 'नियुक्त सदस्य' व्यवस्था के ज़रिए सरकार उस संस्था पर पुनः वर्चस्व जमाने की कोशिश कर रही है, जिसे किसानों ने चुनाव में उससे छीन लिया था।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि BJP पूरे देश में विभिन्न स्वायत्त संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित करना चाहती है और उन्हें कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में सौंपना चाहती है। खान के शब्दों में, किसान और मतदाता सरकार के इस कदम का जवाब आने वाले समय में ज़रूर देंगे।

राहुल गांधी की बहस चुनौती और संसद सत्र विवाद

नसीम खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राहुल गांधी की ओर से दी जा रही खुली बहस की चुनौती पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले लोकसभा सत्र के दौरान जब विपक्ष और राहुल गांधी बार-बार सरकार से सवालों के जवाब माँग रहे थे, तब प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में उपस्थित नहीं रहे।

खान ने कहा कि पूरा संसद सत्र इसी तरह निकल गया और सरकार ने विपक्ष की माँगों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उनके अनुसार, BJP राहुल गांधी के सवालों का सामना करने के बजाय अनावश्यक बयानबाज़ी करती रही है, क्योंकि राहुल गांधी कथित सरकारी भ्रष्टाचार को उजागर कर रहे हैं।

सनातन धर्म और हिंदुत्व पर दिग्विजय सिंह की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर की गई टिप्पणी पर नसीम खान ने कहा कि हिंदुत्व का नारा BJP और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने राजनीतिक लाभ के लिए उठाया। उनके अनुसार, हिंदुत्व का नाम राजनीतिक उद्देश्यों से लिया जाता रहा है, जबकि सनातन धर्म उससे कहीं गहरा और व्यापक है। खान ने आरोप लगाया कि लोगों को सनातन धर्म की वास्तविक शिक्षाओं से जान-बूझकर दूर रखा जा रहा है ताकि राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध किया जा सके।

आगे क्या

गोकुल मिल्क यूनियन विवाद अब महाराष्ट्र की सहकारी राजनीति में एक अहम मुद्दा बन गया है। कांग्रेस के इन आरोपों पर महाराष्ट्र सरकार या BJP की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। किसान संगठनों की भूमिका और अदालती हस्तक्षेप की संभावना आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ चुनावी हार के बाद नियुक्त सदस्यों के ज़रिए संस्था पर पकड़ बनाए रखने की रणनीति पहली बार नहीं अपनाई गई। असली सवाल यह है कि जब चुनाव आयोग ने परिणाम मान्य किए हैं, तो सरकारी मनोनयन की संवैधानिकता अदालत में कितनी टिकेगी — और क्या किसान संगठन इसे कानूनी चुनौती देने की स्थिति में हैं। नसीम खान के बयान राजनीतिक हमले हैं, लेकिन सहकारी संस्थाओं में सरकारी हस्तक्षेप का यह पैटर्न राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा माँगता है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोकुल मिल्क यूनियन चुनाव विवाद क्या है?
गोकुल मिल्क यूनियन के हालिया चुनावों में कांग्रेस समर्थित पैनल ने बहुमत हासिल किया, जबकि BJP समर्थित पैनल हार गया। इसके बाद कांग्रेस नेता नसीम खान ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार ने संस्था में चार मनोनीत निदेशकों को मतदान अधिकार देकर परिणाम को प्रभावित करने की कोशिश की है।
गोकुल मिल्क यूनियन से कितने किसान जुड़े हैं?
नसीम खान के अनुसार इस संस्था से साढ़े पाँच लाख से अधिक किसान जुड़े हैं और बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका इसी यूनियन पर निर्भर है।
नसीम खान ने महाराष्ट्र सरकार पर क्या विशेष आरोप लगाए?
नसीम खान ने आरोप लगाया कि सरकार ने संस्था में चार निदेशकों को मतदान का अधिकार दिया और चार सदस्यों को सरकार की ओर से नियुक्त करने की व्यवस्था की, जिससे चुनाव में हारा BJP समर्थित गुट फिर से नियंत्रण हासिल कर सके। उन्होंने इसे गैर-कानूनी कदम बताया।
राहुल गांधी की बहस चुनौती पर नसीम खान का क्या कहना है?
नसीम खान ने कहा कि पिछले लोकसभा सत्र में विपक्ष के सवालों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह संसद में उपस्थित नहीं थे। उनके अनुसार BJP राहुल गांधी के सवालों का जवाब देने से बच रही है।
दिग्विजय सिंह की सनातन धर्म और हिंदुत्व टिप्पणी पर कांग्रेस का क्या रुख है?
नसीम खान ने कहा कि हिंदुत्व का नारा BJP और RSS ने राजनीतिक स्वार्थ के लिए उठाया, जबकि असली धर्म सनातन धर्म है। उनके अनुसार, लोगों को सनातन धर्म की वास्तविक शिक्षाओं से जान-बूझकर दूर रखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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