13 अक्टूबर 2026
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संविधान खतरे में है, पूरा देश सड़कों पर: महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं का भाजपा पर तीखा हमला

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संविधान खतरे में है, पूरा देश सड़कों पर: महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं का भाजपा पर तीखा हमला

सारांश

महाराष्ट्र कांग्रेस के छह वरिष्ठ नेताओं ने 12 अक्टूबर को BJP सरकार पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवमानना और संविधान को खतरे में डालने का आरोप लगाया। नाना पटोले ने महाराष्ट्र चुनाव में 76 लाख संदिग्ध मतों का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी के नेतृत्व में शांति मार्च की अपील की गई।

मुख्य बातें

नसीम खान, नाना पटोले, विजय वडेट्टीवार सहित छह महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं ने 12 अक्टूबर 2026 को BJP सरकार पर तीखा हमला बोला।
आरोप: सर्वोच्च न्यायालय के प्रदर्शन की अनुमति संबंधी आदेश के बाद भी मेट्रो बंद , बैरिकेडिंग और 50,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती।
नाना पटोले ने CJI से मुलाकात अस्वीकार होने पर दबाव का आरोप लगाया और जंतर-मंतर पर आंदोलन की अनुमति के बावजूद बल प्रयोग का आरोप किया।
पटोले ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में लोकसभा चुनाव बाद चार महीनों में 46 लाख मत बढ़ने और अगले दिन 76 लाख अतिरिक्त मत जोड़े जाने का आरोप लगाया — ये दावे अब तक स्वतंत्र रूप से असत्यापित हैं।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में संविधान बचाने के लिए शांति मार्च की अपील की गई।
चरण सिंह सपरा ने कहा — 'बचेगा संविधान तो बचेगा हिंदुस्तान'; वडेट्टीवार ने सरकार पर 'हिटलर की तरह देश चलाने' का आरोप लगाया।

महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने 12 अक्टूबर 2026 को केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला, यह आरोप लगाते हुए कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी कर रही है, संविधान पर हमला हो रहा है और जनता की आवाज़ को बलपूर्वक दबाया जा रहा है। नसीम खान, नाना पटोले, विजय वडेट्टीवार, चरण सिंह सपरा, माणिकराव ठाकरे और बालासाहेब थोरात ने एकस्वर में कहा कि यह लड़ाई किसी एक दल की नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने की राष्ट्रीय लड़ाई है।

मुख्य घटनाक्रम

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में आदेश दिया था कि लोकतंत्र में नागरिकों को धरना-प्रदर्शन का अधिकार है और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद, नेताओं ने आरोप लगाया कि मेट्रो सेवा बंद की गई, बैरिकेडिंग लगाई गई, 50,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती हुई और आरएएफ बुलाई गई।

नसीम खान ने कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय को यह बात सुननी चाहिए, क्योंकि सरकार बार-बार उसका भी अपमान कर रही है। देश के लोगों की आवाज़ को कुचलने और दबाने की कोशिश हो रही है। सरकार के इशारे पर सारी एजेंसियाँ काम कर रही हैं, चाहे वह पुलिस विभाग हो, चुनाव आयोग हो या केंद्र की अन्य एजेंसियाँ, सभी सत्ता का दुरुपयोग कर रही हैं।'

सीजेआई से मुलाकात पर विवाद

नाना पटोले ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मुलाकात के अनुरोध को अस्वीकार किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'अगर मुलाकात को रिजेक्ट किया है तो दबाव के आधार पर किया है।' पटोले ने यह भी दावा किया कि सीजेआई ने जंतर-मंतर पर आंदोलन की अनुमति दी थी, लेकिन इसके बाद भी सरकार ने सेना, आरएएफ और भारी पुलिस बल तैनात किया।

पटोले ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, लोकसभा चुनाव के बाद चार महीनों में 46 लाख मत बढ़ गए और शाम 5 बजे के बाद के मतदान का प्रतिशत समय पर घोषित नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अगले दिन दोपहर 3 बजे 10 प्रतिशत यानी करीब 76 लाख अतिरिक्त मत जोड़ दिए गए — हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

नेताओं के तीखे बोल: 'गोडसेवादी' से 'हिटलर' तक

चरण सिंह सपरा ने कहा कि आज़ाद भारत में यह पहली बार है जब संविधान पर इतना बड़ा हमला हो रहा है और यह हमला 'गोडसेवादी लोगों' द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने नारा दोहराया — 'बचेगा संविधान तो बचेगा हिंदुस्तान।'

विजय वडेट्टीवार ने कहा, 'आप कितना भी दबाओ, देश की जनता पूरी ताकत के साथ इस व्यवस्था को सुधारने के लिए राहुल गांधी के साथ खड़ी है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल 'हिटलर की तरह देश चलाना चाहता है।'

राहुल गांधी और खड़गे की भूमिका

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के नेतृत्व में एक शांति मार्च की अपील की गई है। नेताओं ने कहा कि यह मार्च सभी गांधीवादी विचारधारा के लोगों के लिए खुला है — चाहे युवा हों, वरिष्ठ नागरिक हों, महिलाएँ हों या किसी भी वर्ग के नागरिक। बालासाहेब थोरात ने कहा, 'यह एक ऐतिहासिक लड़ाई है और जनता की पूरी आवाज़ भारतीय जनता पार्टी तक जानी चाहिए।'

आगे क्या होगा

माणिकराव ठाकरे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक संविधान द्वारा प्रदत्त मत का अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता सुनिश्चित नहीं हो जाती। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल देशभर में सरकार के खिलाफ समन्वित प्रदर्शन कर रहे हैं और सर्वोच्च न्यायालय में संबंधित याचिकाएँ भी विचाराधीन बताई जा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु इनमें कुछ गंभीर संवैधानिक प्रश्न भी हैं जिन्हें सहज नहीं टाला जा सकता — विशेषतः सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी भारी बल तैनाती का आरोप। नाना पटोले के 76 लाख 'अतिरिक्त मतों' के दावे गंभीर हैं, लेकिन अब तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं — मुख्यधारा की कवरेज अक्सर ऐसे दावों को बिना सत्यापन के या बिना खंडन के उठा लेती है। असली सवाल यह है कि क्या न्यायपालिका, प्रशासन और चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक स्वायत्तता को इन आरोपों के बीच पारदर्शी रूप से प्रस्तुत कर पाएँगे — क्योंकि लोकतंत्र की विश्वसनीयता केवल चुनाव-जीत से नहीं, बल्कि जवाबदेह संस्थाओं से बनती है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं ने BJP पर क्या आरोप लगाए हैं?
महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि BJP सरकार सर्वोच्च न्यायालय के प्रदर्शन की अनुमति संबंधी आदेशों का पालन नहीं कर रही, जनता की आवाज़ को दबाया जा रहा है और चुनाव आयोग सहित सभी संवैधानिक संस्थाएँ सत्ता के इशारे पर काम कर रही हैं।
नाना पटोले ने सीजेआई से मुलाकात पर क्या कहा?
नाना पटोले ने आरोप लगाया कि CJI द्वारा गठबंधन नेताओं की मुलाकात का अनुरोध 'दबाव में' अस्वीकार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि CJI ने जंतर-मंतर पर आंदोलन की अनुमति दी थी, फिर भी वहाँ भारी पुलिस, आरएएफ और 50,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए।
महाराष्ट्र चुनाव में वोट बढ़ने के क्या आरोप लगाए गए हैं?
नाना पटोले ने दावा किया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में लोकसभा चुनाव के बाद चार महीनों में 46 लाख मत बढ़े और अगले दिन दोपहर तक 10 प्रतिशत यानी करीब 76 लाख अतिरिक्त मत जोड़ दिए गए। ये आरोप अब तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
कांग्रेस किस मार्च की अपील कर रही है और इसका उद्देश्य क्या है?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में एक 'शांति मार्च' की अपील की गई है, जिसका उद्देश्य संविधान की रक्षा का संदेश देना है। चरण सिंह सपरा ने कहा कि यह सभी गांधीवादी विचारधारा के लोगों के लिए खुला मार्च है।
सर्वोच्च न्यायालय की इस पूरे विवाद में क्या भूमिका है?
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में आदेश दिया था कि नागरिकों को धरना-प्रदर्शन का अधिकार है और उन पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। नेताओं का आरोप है कि इस आदेश के बाद भी प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयाँ जारी हैं। बालासाहेब थोरात ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय देश में न्याय की 'आखिरी जगह' है।
राष्ट्र प्रेस
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