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कर्नाटक: एसआईआर पर कांग्रेस का रुख साफ, उपमुख्यमंत्री परमेश्वर बोले — सरकार अलग स्टैंड नहीं ले सकती

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कर्नाटक: एसआईआर पर कांग्रेस का रुख साफ, उपमुख्यमंत्री परमेश्वर बोले — सरकार अलग स्टैंड नहीं ले सकती

सारांश

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने साफ किया कि एसआईआर पर कांग्रेस का विरोध नीतिगत है और राज्य सरकार उससे अलग नहीं चल सकती। 1.08 करोड़ नाम हटाने और 16 लाख को 'मृत' घोषित करने के आरोपों के बीच यह बयान राज्य की चुनावी राजनीति में हलचल मचा सकता है।

मुख्य बातें

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी.
परमेश्वर ने कहा कि एसआईआर पर कांग्रेस का रुख स्पष्ट है और राज्य सरकार पार्टी से अलग स्थिति नहीं अपना सकती।
एसआईआर प्रक्रिया में कथित तौर पर करीब 1.08 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिनमें 16 लाख को 'मृत' और 65 लाख को स्थानांतरित घोषित किया गया।
एआईसीसी और केपीसीसी दोनों स्तरों पर कांग्रेस ने एसआईआर के विरुद्ध अपनी स्थिति सार्वजनिक कर दी है।
वृद्धावस्था पेंशन के लिए 23 लाख अपात्र आवेदनों की जाँच जारी; आय सीमा ₹30,000 से बढ़ाकर ₹1.20 लाख की गई।
परमेश्वर ने आश्वासन दिया कि पेंशन विवाद एक सप्ताह से 15 दिनों में सुलझा लिया जाएगा।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) का रुख पूरी तरह तय है और राज्य सरकार पार्टी के इस रुख के विपरीत कोई भिन्न स्थिति नहीं अपना सकती। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

परमेश्वर का स्पष्ट संदेश

एसआईआर पर जारी विवाद से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए परमेश्वर ने कहा कि कुछ मंत्रियों द्वारा यह टिप्पणी करना कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में इस प्रक्रिया का अधिक असर नहीं पड़ा, पूरी प्रक्रिया की सफलता का प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा, 'कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में शायद केवल 2,000 नाम हटाए गए या जोड़े गए होंगे। लेकिन जब हम व्यापक तस्वीर देखते हैं तो गंभीर सवाल खड़े होते हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) दोनों स्तरों पर पार्टी ने एसआईआर के विरोध में अपनी स्थिति सार्वजनिक कर दी है।

आँकड़ों में अनियमितताओं के आरोप

परमेश्वर के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर करीब 1.08 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। इनमें से लगभग 16 लाख लोगों को कथित तौर पर मृत घोषित किया गया, जबकि शिकायतें हैं कि इनमें से कुछ लोग अभी भी जीवित हैं। वहीं, करीब 65 लाख लोगों को स्थानांतरित मतदाताओं की श्रेणी में रखा गया। गौरतलब है कि यह संख्याएँ — यदि सत्यापित होती हैं — तो कर्नाटक जैसे बड़े राज्य में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर गहरा प्रभाव डाल सकती हैं।

स्थानांतरण और मतदाता सूची की समस्या

उपमुख्यमंत्री ने एक उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि कोई व्यक्ति बेंगलुरु से मैसूरु जाता है, तो उसका नाम मैसूरु की मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए। लेकिन यदि नए स्थान पर भी उसका नाम नहीं मिलता, तो यह प्रक्रियागत चूक का संकेत है। कांग्रेस का तर्क है कि ऐसी ही खामियों के कारण एसआईआर प्रक्रिया विश्वसनीय नहीं मानी जा सकती। यह ऐसे समय में उठ रहा मुद्दा है जब आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर अलग विवाद

इसी प्रेस वार्ता में परमेश्वर ने वृद्धावस्था और दिव्यांगता पेंशन के निलंबन के मुद्दे पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए दो से तीन बैठकें हो चुकी हैं। आय पात्रता की सीमा पहले ₹30,000 थी, जिसे बढ़ाकर अब ₹1.20 लाख कर दिया गया है, जिससे अधिक पात्र लाभार्थी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। साथ ही, करीब 23 लाख ऐसे आवेदनों की जाँच की जा रही है जो निर्धारित आयु सीमा पूरी नहीं करते — वृद्धावस्था पेंशन 60 वर्ष से अधिक उम्र के लिए है, लेकिन 40, 30 और यहाँ तक कि 20 वर्ष के व्यक्तियों ने भी आवेदन किए हैं।

आगे क्या होगा

परमेश्वर ने आश्वासन दिया कि सत्यापन प्रक्रिया के कारण जो पेंशन वितरण अस्थायी रूप से रोका गया था, उसे फिर से शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगले एक सप्ताह से 15 दिनों के भीतर पेंशन विवाद का समाधान कर लिया जाएगा। एसआईआर मामले में कांग्रेस की स्थिति और सरकार की प्रतिबद्धता राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों में केंद्रीय मुद्दा बनी रह सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मताधिकार पर सीधा प्रहार है। गंभीर सवाल यह है कि राज्य सरकार विरोध तो कर रही है, लेकिन चुनाव आयोग के समक्ष औपचारिक कानूनी चुनौती या श्वेत पत्र की माँग क्यों नहीं उठाई? बयानबाजी और ठोस जवाबदेही के बीच का यह फासला ही इस पूरे विवाद का सबसे कमज़ोर पहलू है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और इसका विरोध क्यों हो रहा है?
एसआईआर मतदाता सूचियों की एक विशेष समीक्षा प्रक्रिया है जिसमें अपात्र, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। कर्नाटक में कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई — कथित तौर पर 1.08 करोड़ नाम हटाए गए जिनमें से कुछ जीवित मतदाताओं के नाम भी शामिल हो सकते हैं।
कर्नाटक में एसआईआर के दौरान कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए?
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर करीब 1.08 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए। इनमें से लगभग 16 लाख को 'मृत' और करीब 65 लाख को स्थानांतरित मतदाताओं की श्रेणी में रखा गया।
कर्नाटक सरकार एसआईआर पर क्या रुख अपना रही है?
परमेश्वर ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार का रुख कांग्रेस पार्टी के रुख के अनुरूप ही रहेगा, जो एसआईआर प्रक्रिया का विरोध कर रही है। एआईसीसी और केपीसीसी दोनों स्तरों पर कांग्रेस ने एसआईआर के खिलाफ अपनी स्थिति सार्वजनिक कर दी है।
कर्नाटक में पेंशन निलंबन का मामला क्या है और इसका समाधान कब होगा?
वृद्धावस्था और दिव्यांगता पेंशन सत्यापन प्रक्रिया के कारण कुछ समय के लिए अस्थायी रूप से रोकी गई थी। परमेश्वर ने कहा है कि पेंशन वितरण फिर शुरू हो चुका है और अगले एक सप्ताह से 15 दिनों में इस मुद्दे का पूरी तरह समाधान हो जाएगा।
वृद्धावस्था पेंशन के लिए आयु पात्रता और आय सीमा में क्या बदलाव हुए हैं?
वृद्धावस्था पेंशन 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए है, लेकिन बड़ी संख्या में अपात्र आवेदन आए हैं। आय पात्रता सीमा को ₹30,000 से बढ़ाकर ₹1.20 लाख कर दिया गया है, और करीब 23 लाख अपात्र आवेदनों की जाँच की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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