गुजरात हाईकोर्ट और सीएम ऑफिस को बम धमकी, गांधीनगर सचिवालय में कड़ी सुरक्षा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात उच्च न्यायालय और मुख्यमंत्री कार्यालय को 6 नवंबर 2026 को ईमेल के ज़रिए बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिसके बाद गांधीनगर स्थित न्यू सेक्रेटेरिएट परिसर में सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया। धमकी को गंभीरता से लेते हुए बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड को तत्काल परिसर में तैनात किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
पहले गुजरात उच्च न्यायालय को बम धमकी वाला ईमेल प्राप्त हुआ, और उसके कुछ ही घंटों बाद एक अलग ईमेल में मुख्यमंत्री कार्यालय को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। दोनों धमकियाँ एक ही दिन आने से सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हो गईं और राज्यभर में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया।
बम निरोधक दस्ते ने न्यू सेक्रेटेरिएट के विभिन्न ब्लॉकों और संवेदनशील स्थानों पर गहन तलाशी ली। डॉग स्क्वॉड ने अलग-अलग कक्षों और गलियारों की जाँच की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं कोई संदिग्ध विस्फोटक सामग्री न हो।
सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव
परिसर के प्रवेश और निकास द्वारों पर पुलिस ने सघन जाँच शुरू कर दी। अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई और आने-जाने वाले सभी लोगों की एहतियाती जाँच बढ़ा दी गई।
मुख्यमंत्री कार्यालय के आसपास सुरक्षा घेरा और मज़बूत किया गया। सचिवालय के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों को भी प्राथमिकता के आधार पर जाँच के दायरे में लिया गया।
पिछले कुछ दिनों का पैटर्न
गौरतलब है कि यह धमकी उस समय आई है जब पिछले कुछ दिनों में गुजरात के कई सरकारी संस्थानों को ऐसे ही ईमेल प्राप्त हो चुके हैं। 3 नवंबर 2026 को गांधीनगर स्थित पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कार्यालय को एक ईमेल मिला था, जिसमें राज्य के सरकारी दफ्तरों, एक मंदिर और जेलों पर हमले की धमकी दी गई थी।
उस धमकी के बाद अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल सहित मेहसाणा और पाटन के सरकारी संस्थानों में सुरक्षा जाँच की गई थी। हालाँकि, उस तलाशी के दौरान कहीं भी कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली थी।
जाँच की दिशा
धमकी भरा ईमेल भेजने वाले व्यक्ति और उसके स्रोत का पता लगाने के लिए जाँच एजेंसियाँ सक्रिय हो गई हैं। डिजिटल फोरेंसिक के ज़रिए ईमेल के मूल स्रोत, आईपी एड्रेस और प्रेषक की पहचान की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल ईमेल की सामग्री और इसे भेजने वाले की पहचान के बारे में अधिकारियों ने कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
आगे क्या
लगातार मिल रही इन धमकियों के मद्देनज़र सुरक्षा एजेंसियाँ राज्यभर के संवेदनशील सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा समीक्षा कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईमेल प्रेषक की पहचान नहीं हो जाती, तब तक सतर्कता का यह स्तर बनाए रखा जाएगा।