संबित पात्रा का वाराणसी से हमला: रामलीला मैदान में 20 हजार भी नहीं जुटे, SIR गिनती भी ऐसी ही
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा सांसद संबित पात्रा ने 2 नवंबर 2026 को वाराणसी पहुँचने पर पत्रकारों से बातचीत में विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि रामलीला मैदान में विपक्षी रैली बुरी तरह विफल रही। पात्रा ने कहा कि 10 लाख की भीड़ के दावे के बावजूद मैदान में 20 हजार लोग भी नहीं पहुँचे।
काशी की भूमि से SIR विवाद पर पात्रा का पलटवार
पात्रा ने कहा कि SIR को लेकर देश में एक भ्रामक और उत्तेजक वातावरण बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह 12वाँ SIR है, जिनमें से 10 SIR कांग्रेस के शासनकाल में हुए और केवल दो वर्तमान सरकार के दौरान। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस SIR कराती थी तो वह ठीक था, लेकिन अब मतदाता सूची के शुद्धीकरण की यही प्रक्रिया गलत बताई जा रही है।
राहुल गांधी के '13 करोड़ वोट चोरी' के आरोप पर प्रतिक्रिया
भाजपा सांसद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस दावे को सिरे से खारिज किया जिसमें कथित तौर पर 13 करोड़ वोट चोरी का आरोप लगाया गया था। पात्रा ने तर्क दिया, 'अगर ऐसा हुआ होता तो आज देश की रूपरेखा कैसी होती? लोग देश की सड़कों पर होते और आंदोलन कर रहे होते।' उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को 'एजेंट' कहना लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अनुचित हमला है।
रामलीला मैदान रैली पर 'फ्लॉप शो' का दावा
पात्रा ने विपक्षी रैली को 'फ्लॉप शो' करार देते हुए कहा कि रामलीला मैदान 50 प्रतिशत खाली था। उनके अनुसार, जो भी संख्या विपक्ष देता है — चाहे रैली में भीड़ की हो या SIR की गिनती की — वह गलत निकलती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्ष SIR को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की कोशिश कर रहा है।
SIR विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) एक नियमित प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची को अद्यतन किया जाता है। विपक्ष का आरोप है कि इस बार के SIR में कुछ विशेष समुदायों के वोट बड़े पैमाने पर हटाए जा रहे हैं, जबकि भाजपा इसे मतदाता सूची की सफाई की सामान्य प्रक्रिया बता रही है। यह विवाद आने वाले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में और अधिक तीखा हो गया है।
आगे क्या
SIR को लेकर विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ भाजपा के बीच यह जुबानी जंग आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया पर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है और विभिन्न दल अपनी स्थिति को और मजबूत करने में जुटे हैं।