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केशव मौर्य का तंज: राहुल 'नकली' PM, अखिलेश 'नकली' CM; इंडिया ब्लॉक की रामलीला रैली फ्लॉप

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केशव मौर्य का तंज: राहुल 'नकली' PM, अखिलेश 'नकली' CM; इंडिया ब्लॉक की रामलीला रैली फ्लॉप

सारांश

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने इंडिया ब्लॉक की रामलीला रैली को फ्लॉप बताते हुए राहुल गांधी को 'नकली' PM और अखिलेश यादव को 'नकली' CM करार दिया। सपा ने पलटवार में मौर्य की भाजपा के भीतर हाशिये वाली स्थिति उजागर की।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 2 नवंबर 2026 को इंडिया गठबंधन की 'चलो दिल्ली' रैली को पूरी तरह विफल बताया।
मौर्य ने दावा किया कि रामलीला मैदान में 10 लाख के लक्ष्य के मुकाबले केवल दस हज़ार लोग पहुँचे।
उन्होंने राहुल गांधी को 'नकली' प्रधानमंत्री और अखिलेश यादव को 'नकली' मुख्यमंत्री बताते हुए कहा कि इन्हें असली पद पाने में 30 साल लगेंगे।
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि भाजपा की आंतरिक राजनीति के कारण मौर्य को पिछले 10 वर्षों में हाशिये पर रखा गया है।
सपा विधायक जाहिद बेग ने कहा कि जनता मौर्य को गंभीरता से नहीं लेती और उन्हें खुद की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 2 नवंबर 2026 को 'इंडिया' गठबंधन के 'चलो दिल्ली' मार्च पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली पूरी तरह विफल रही। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि ये दोनों नेता केवल 'नकली' प्रधानमंत्री और 'नकली' मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

मौर्य का दावा: रैली में आए महज दस हज़ार लोग

मौर्य ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने रामलीला मैदान में 10 लाख लोग जुटाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन वहाँ केवल दस हज़ार लोग ही पहुँचे। उन्होंने इसे गठबंधन की बड़ी राजनीतिक विफलता करार दिया।

मौर्य के अनुसार, इस रैली का फ्लॉप होना यह साबित करता है कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों को सिरे से नकार दिया है। गौरतलब है कि 'चलो दिल्ली' मार्च इंडिया गठबंधन का एक बड़ा जनसमर्थन प्रदर्शन माना जा रहा था।

राहुल और अखिलेश पर 'नकली' वाला तंज

राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए मौर्य ने कहा कि ये दोनों नेता केवल 'नकली' प्रधानमंत्री और 'नकली' मुख्यमंत्री का दर्जा ही पा सकते हैं, असली पद इनकी पहुँच से कोसों दूर है। उन्होंने आगे दावा किया कि इन दोनों को वास्तविक सत्ता तक पहुँचने में 30 साल लग जाएँगे।

मौर्य ने यह भी कहा कि जब तक 'विकसित भारत' और 'विकसित उत्तर प्रदेश' का लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता, तब तक कांग्रेस सपा सत्ता के करीब नहीं आएगी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता से बाहर नहीं जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है।

सपा का पलटवार: मौर्य अपनी स्थिति पर ध्यान दें

सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने मौर्य की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मौर्य उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख नेता तो हैं, लेकिन भाजपा की आंतरिक राजनीति के कारण उन्हें खुद हाशिये पर धकेला जा चुका है।

वर्मा ने कहा, "केशव प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश के एक बहुत अच्छे नेता हैं, लेकिन भाजपा की आंतरिक राजनीति के कारण उन्हें हाशिए पर डाल दिया गया है। मुझे उनके प्रति सहानुभूति है क्योंकि वे हाल के चुनावों में जीत नहीं पाए हैं। उन्हें इस चुनाव को जीतने पर ध्यान देना चाहिए, न कि 'शैडो प्रधानमंत्री' या 'शैडो मुख्यमंत्री' बनने जैसी चर्चाओं में उलझना चाहिए।"

सपा ने यह भी दावा किया कि एक पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नेता के तौर पर पिछले 10 वर्षों में भाजपा के भीतर मौर्य के साथ जो बर्ताव हुआ, वह 'शर्मनाक' है।

सपा विधायक का तंज: जनता मौर्य को गंभीरता से नहीं लेती

सपा विधायक जाहिद बेग ने भी मौर्य के बयानों की आलोचना की। बेग ने कहा, "जनता केशव मौर्य को गंभीरता से नहीं लेती है। वे जो कुछ भी कहते हैं, उससे पहले उन्हें अपनी खुद की स्थिति, अपनी पार्टी और अपने मंत्रालय के बारे में सोचना चाहिए। अगर उनके पास अपनी मर्जी से बैठने या अपनी राय रखने की आजादी ही नहीं है, तो फिर उनके बारे में क्या ही कहा जाए?"

बेग का यह बयान इस ओर इशारा करता है कि भाजपा में मौर्य की स्वायत्तता को लेकर विपक्ष उन्हें लगातार कमज़ोर नेता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। यह राजनीतिक बयानबाजी का दौर आने वाले उत्तर प्रदेश चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल कहानी यह है कि भाजपा के भीतर पीडीए समीकरण को लेकर उनकी अपनी स्थिति कमज़ोर बनी हुई है — और सपा ने इसी कमज़ोरी पर उँगली रखी है। रैली की भीड़ को लेकर दोनों पक्षों के दावे परस्पर विरोधी हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सके हैं, जो इस पूरी बयानबाजी को 'संख्या की राजनीति' की श्रेणी में रखता है। यह ऐसे समय में है जब उत्तर प्रदेश में अगला चुनावी चक्र नज़दीक आ रहा है और ओबीसी पीडीए वोट बैंक के लिए भाजपा और सपा दोनों में जबरदस्त खींचतान है — मौर्य बनाम मुख्यमंत्री पद का यह अनकहा द्वंद्व ही असली उप पाठ है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केशव प्रसाद मौर्य ने इंडिया ब्लॉक की रैली पर क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 2 नवंबर 2026 को दावा किया कि दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की 'चलो दिल्ली' रैली में 10 लाख के लक्ष्य के मुकाबले केवल दस हज़ार लोग ही पहुँचे। उन्होंने इस रैली को पूरी तरह फ्लॉप बताया।
मौर्य ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव को 'नकली' क्यों कहा?
मौर्य ने एक्स पर पोस्ट करते हुए तंज कसा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव कभी असली प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री नहीं बन सकते — वे केवल 'नकली' दावेदार हैं और इन्हें सत्ता तक पहुँचने में 30 साल लगेंगे। यह भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है जो विपक्षी नेताओं को राजनीतिक रूप से अप्रासंगिक दर्शाने की कोशिश करती है।
सपा ने मौर्य के बयान पर क्या जवाब दिया?
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि मौर्य को विपक्ष पर हमला करने से पहले भाजपा के भीतर खुद की कमज़ोर स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मौर्य को पीडीए नेता के तौर पर पिछले 10 वर्षों में भाजपा में हाशिये पर रखा गया है।
'चलो दिल्ली' मार्च क्या था?
'चलो दिल्ली' इंडिया गठबंधन का एक जनसमर्थन प्रदर्शन था, जिसे दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित किया गया था। गठबंधन ने इसके लिए 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा था, हालाँकि भीड़ की वास्तविक संख्या को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग अलग हैं।
सपा विधायक जाहिद बेग ने मौर्य के बारे में क्या कहा?
सपा विधायक जाहिद बेग ने कहा कि जनता केशव मौर्य को गंभीरता से नहीं लेती। उन्होंने तर्क दिया कि मौर्य के पास अपनी मर्जी से बयान देने की भी स्वतंत्रता नहीं है, इसलिए उनकी टिप्पणियाँ राजनीतिक रूप से वज़नदार नहीं मानी जानी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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