केशव मौर्य का तंज: राहुल 'नकली' PM, अखिलेश 'नकली' CM; इंडिया ब्लॉक की रामलीला रैली फ्लॉप
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 2 नवंबर 2026 को 'इंडिया' गठबंधन के 'चलो दिल्ली' मार्च पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली पूरी तरह विफल रही। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि ये दोनों नेता केवल 'नकली' प्रधानमंत्री और 'नकली' मुख्यमंत्री बन सकते हैं।
मौर्य का दावा: रैली में आए महज दस हज़ार लोग
मौर्य ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने रामलीला मैदान में 10 लाख लोग जुटाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन वहाँ केवल दस हज़ार लोग ही पहुँचे। उन्होंने इसे गठबंधन की बड़ी राजनीतिक विफलता करार दिया।
मौर्य के अनुसार, इस रैली का फ्लॉप होना यह साबित करता है कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों को सिरे से नकार दिया है। गौरतलब है कि 'चलो दिल्ली' मार्च इंडिया गठबंधन का एक बड़ा जनसमर्थन प्रदर्शन माना जा रहा था।
राहुल और अखिलेश पर 'नकली' वाला तंज
राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए मौर्य ने कहा कि ये दोनों नेता केवल 'नकली' प्रधानमंत्री और 'नकली' मुख्यमंत्री का दर्जा ही पा सकते हैं, असली पद इनकी पहुँच से कोसों दूर है। उन्होंने आगे दावा किया कि इन दोनों को वास्तविक सत्ता तक पहुँचने में 30 साल लग जाएँगे।
मौर्य ने यह भी कहा कि जब तक 'विकसित भारत' और 'विकसित उत्तर प्रदेश' का लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता, तब तक कांग्रेस सपा सत्ता के करीब नहीं आएगी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता से बाहर नहीं जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है।
सपा का पलटवार: मौर्य अपनी स्थिति पर ध्यान दें
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने मौर्य की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मौर्य उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख नेता तो हैं, लेकिन भाजपा की आंतरिक राजनीति के कारण उन्हें खुद हाशिये पर धकेला जा चुका है।
वर्मा ने कहा, "केशव प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश के एक बहुत अच्छे नेता हैं, लेकिन भाजपा की आंतरिक राजनीति के कारण उन्हें हाशिए पर डाल दिया गया है। मुझे उनके प्रति सहानुभूति है क्योंकि वे हाल के चुनावों में जीत नहीं पाए हैं। उन्हें इस चुनाव को जीतने पर ध्यान देना चाहिए, न कि 'शैडो प्रधानमंत्री' या 'शैडो मुख्यमंत्री' बनने जैसी चर्चाओं में उलझना चाहिए।"
सपा ने यह भी दावा किया कि एक पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नेता के तौर पर पिछले 10 वर्षों में भाजपा के भीतर मौर्य के साथ जो बर्ताव हुआ, वह 'शर्मनाक' है।
सपा विधायक का तंज: जनता मौर्य को गंभीरता से नहीं लेती
सपा विधायक जाहिद बेग ने भी मौर्य के बयानों की आलोचना की। बेग ने कहा, "जनता केशव मौर्य को गंभीरता से नहीं लेती है। वे जो कुछ भी कहते हैं, उससे पहले उन्हें अपनी खुद की स्थिति, अपनी पार्टी और अपने मंत्रालय के बारे में सोचना चाहिए। अगर उनके पास अपनी मर्जी से बैठने या अपनी राय रखने की आजादी ही नहीं है, तो फिर उनके बारे में क्या ही कहा जाए?"
बेग का यह बयान इस ओर इशारा करता है कि भाजपा में मौर्य की स्वायत्तता को लेकर विपक्ष उन्हें लगातार कमज़ोर नेता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। यह राजनीतिक बयानबाजी का दौर आने वाले उत्तर प्रदेश चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है।