पटना में INDIA गठबंधन की रैली पर BJP का हमला: 'पैसे देकर लाए जा रहे लोग, जनता देगी जवाब'
सारांश
मुख्य बातें
पटना में 1 नवंबर 2026 को आयोजित INDIA गठबंधन की रैली से पहले राजनीतिक तापमान उस समय बढ़ गया जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं ने विपक्षी एकजुटता पर तीखा हमला बोला। बिहार सरकार के मंत्री राम कृपाल यादव, BJP के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने रैली को 'झूठे नैरेटिव' और 'पैसे देकर भीड़ जुटाने' की कोशिश बताया।
रामकृपाल यादव की 'रामलीला मंडली' वाली टिप्पणी
बिहार सरकार के मंत्री राम कृपाल यादव ने INDIA गठबंधन की रैली पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि 'रामलीला मंडली के सदस्य रामलीला करने के लिए रामलीला मैदान में जुट रहे हैं।' उन्होंने विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए सवाल किया कि जनता के बीच फैलाए जा रहे इन दावों पर कौन विश्वास करेगा।
यादव ने कहा कि विपक्ष को संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर भी भरोसा नहीं है और विपक्षी नेता भगवान गणेश तक पर सवाल उठाने से नहीं चूकते। उन्होंने आगे कहा कि तेजस्वी यादव सहित विपक्ष के सभी नेता कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में चलते हैं और चुनाव में जनता इन सभी को जवाब देगी।
संजय सरावगी का व्यापारियों और वैश्विक मुद्दों का हवाला
BJP के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने रैली की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि त्योहारों के मौसम में व्यापारी सालभर के घाटे की भरपाई करने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई व्यापारिक संगठन इस रैली के आयोजन के समय पर आपत्ति जता रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रैली में उठाए जा रहे मुद्दे देश की वास्तविक समस्याएं नहीं हैं, बल्कि जनता में भ्रम फैलाने की सोची-समझी कोशिश है।
सरावगी ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के G20 मंच पर दिए बयान का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि ऊर्जा, व्यापार, जहाजों और बुनियादी ढाँचे पर हमले 'जानबूझकर किए जा रहे हैं और वैश्विक कीमतों को प्रभावित करने की सोची-समझी साजिश का हिस्सा हैं।'
दिलीप घोष का 'पैसे देकर भीड़ जुटाने' का आरोप
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि जनता को भलीभाँति पता है कि कौन किस तरह की राजनीति कर रहा है और विपक्षी दल काफी दिनों बाद एकसाथ रैली करने की हिम्मत जुटा पाए हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी नेता रैली और प्रदर्शन के नाम पर लंबे समय से व्यापारियों को परेशान करते आए हैं।
घोष ने दावा किया कि विपक्षी दल लोगों को पैसे देकर रैली में लाते हैं, इसलिए रैली के बाद 'खरीदारी करने' की उनकी अपील का कोई खास असर नहीं होगा। गौरतलब है कि ये आरोप BJP की ओर से विपक्षी रैलियों के संदर्भ में पहले भी लगाए जाते रहे हैं।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में आगामी चुनावी तैयारियों को लेकर सभी दल अपनी ज़मीन मज़बूत करने में जुटे हैं। INDIA गठबंधन की पटना रैली को विपक्षी एकता के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, जबकि BJP का पलटवार यह संकेत देता है कि सत्तारूढ़ दल विपक्ष की जनगोलबंदी को हल्के में नहीं ले रहा। आलोचकों का कहना है कि 'पैसे देकर भीड़ जुटाने' जैसे आरोप सत्यापन योग्य साक्ष्य के बिना राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बन जाते हैं, जबकि दोनों पक्षों को स्पष्टीकरण देना चाहिए।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि रैली का जनसमर्थन और विपक्षी एजेंडा बिहार की राजनीतिक दिशा को किस हद तक प्रभावित करता है।