जयशंकर की अटलांटा G-20 बैठक से क्वाड तक: 25-31 अक्टूबर में भारत की कूटनीति का साप्ताहिक लेखा-जोखा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के नेतृत्व में भारत ने 25 से 31 अक्टूबर 2026 के बीच यूरोप, उत्तरी अमेरिका, पश्चिम एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक साथ कई मोर्चों पर सक्रिय कूटनीति चलाई। इस सप्ताह उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ताओं, बहुपक्षीय बैठकों और राजकीय यात्राओं की श्रृंखला ने भारत की वैश्विक रणनीतिक उपस्थिति को रेखांकित किया। यह सप्ताह इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि इसमें एक ही समय में कई भू-राजनीतिक धाराएं आपस में मिलती दिखीं।
अटलांटा में G-20 विदेश मंत्रियों की बैठक
30 और 31 अक्टूबर को अमेरिका के अटलांटा में आयोजित G-20 विदेश मंत्रियों की बैठक सप्ताह का सर्वाधिक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय आयोजन रही। जयशंकर ने इसमें भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वैश्विक संघर्षों, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति शृंखला, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मुद्दे उठाए। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि कूटनीतिक माध्यमों से ही संभव है।
जयशंकर के अनुसार युद्धों का प्रभाव केवल संघर्षरत देशों तक सीमित नहीं रहता — खाद्य, ऊर्जा और आपूर्ति शृंखलाओं के जरिए पूरी दुनिया, विशेषकर ग्लोबल साउथ, इससे प्रभावित होता है। यह ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया में तनाव वैश्विक खाद्य एवं ऊर्जा बाज़ारों पर दबाव बनाए हुए हैं।
क्वाड बैठक और हिंद-प्रशांत समन्वय
अटलांटा के इसी दौरे में जयशंकर ने क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भाग लिया, जिसमें अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि शामिल रहे। बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक समन्वय पर विचार-विमर्श हुआ। गौरतलब है कि यह बैठक प्रस्तावित क्वाड नेताओं के अगले शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि तैयार करने के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ त्रिपक्षीय बातचीत में ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत प्रौद्योगिकी एवं नवाचार साझेदारी (ACITI) पर विशेष ध्यान दिया गया — एक उभरता त्रिपक्षीय तकनीकी सहयोग ढाँचा जो अभी तक मुख्यधारा की चर्चा में कम आया है।
यूरोपीय और लैटिन अमेरिकी भागीदारों के साथ वार्ता
30 अक्टूबर को जयशंकर ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास से मुलाकात की, जिसमें यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई। इसके अलावा जर्मनी, अर्जेंटीना, ब्राजील और मैक्सिको के विदेश मंत्रियों से भी द्विपक्षीय बैठकें हुईं।
अर्जेंटीना के साथ वार्ता में व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा और परमाणु सहयोग जैसे विषय केंद्र में रहे, जबकि मैक्सिको के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने पर जोर रहा। यह उल्लेखनीय है कि लैटिन अमेरिका के साथ भारत का जुड़ाव हाल के वर्षों में क्रमशः गहरा होता जा रहा है।
लिकटेंस्टीन की राजकीय यात्रा और EFTA सहयोग
लिकटेंस्टीन के वंशानुगत राजकुमार एलोइस और राजकुमारी सोफी ने 25 से 28 अक्टूबर 2026 के बीच भारत की राजकीय यात्रा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैदराबाद हाउस में हुई बैठक में व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पर चर्चा हुई। भारत-EFTA (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) समझौते के अंतर्गत आर्थिक सहयोग को विस्तार देना भी एजेंडे में प्रमुख रहा।
सप्ताह की तीन प्रमुख कूटनीतिक प्राथमिकताएँ
इस सप्ताह की कूटनीतिक गतिविधियों को देखें तो भारत की तीन स्पष्ट प्राथमिकताएँ उभरती हैं। पहली, अमेरिका, यूरोप और हिंद-प्रशांत के प्रमुख साझेदारों के साथ रणनीतिक संवाद बनाए रखना। दूसरी, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा और नई तकनीक के क्षेत्र में नए सहयोग के अवसर तलाशना। तीसरी, रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया जैसे संघर्षों के बीच कूटनीतिक समाधान और वैश्विक आर्थिक स्थिरता की पैरवी करना।
ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री बीट माइनल-राइजिंगर की भारत यात्रा के दौरान जयशंकर के साथ हुई वार्ता में व्यापार, प्रौद्योगिकी और यूरोपीय सहयोग के मुद्दे भी उठे, जो भारत-यूरोप संबंधों की व्यापकता को दर्शाते हैं। आने वाले हफ्तों में क्वाड शिखर सम्मेलन की दिशा और ACITI ढाँचे की रूपरेखा इन वार्ताओं के परिणामों पर काफी हद तक निर्भर करेगी।