जी20 दिसंबर शिखर सम्मेलन तक साझा सहमति संभव: जयशंकर का अटलांटा में बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 1 नवंबर 2026 को अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के समापन पर कहा कि भारत को उम्मीद है कि दिसंबर 2026 में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन तक सदस्य देश प्रमुख मुद्दों पर साझा सहमति बनाने में सफल होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस दिशा में गंभीर प्रयास किए गए तो भारत इन कोशिशों का पूरा समर्थन करेगा।
जयशंकर का बयान: उम्मीद और शर्त दोनों
भारतीय पत्रकारों से बातचीत में जयशंकर से पूछा गया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान जी20 में जिस तरह आम सहमति बनी थी, क्या इस बार भी वैसा संभव है? इस पर उन्होंने कहा, 'अभी दिसंबर में होने वाले शिखर सम्मेलन का समय नहीं आया है, और उस समय की परिस्थितियों को देखकर ही कुछ कहा जा सकेगा।' उन्होंने जोड़ा, 'ज़ाहिर है, उम्मीद है कि जी20 साझा सहमति बनाने में सफल होगा।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कई मोर्चों पर भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है और बहुपक्षीय मंचों पर आम सहमति बनाना पहले से कहीं अधिक कठिन हो चुका है।
ब्रिक्स का उदाहरण और भारत की भूमिका
जयशंकर ने ब्रिक्स का हवाला देते हुए कहा कि अलग-अलग परिस्थितियों और विविध देशों की भागीदारी के बावजूद उस समूह में प्रमुख सदस्यों के बीच साझा बयान पर सहमति बन सकी थी। उन्होंने संकेत दिया कि दिसंबर नज़दीक आने के साथ जी20 में भी ऐसे ही प्रयास होंगे और भारत उनमें सहयोगी भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहमति बनाना आसान नहीं होता, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया कई मुद्दों पर ध्रुवीकृत नज़र आ रही है। इसके बावजूद भारत का मानना है कि संवाद और प्रयासों के ज़रिए साझा आधार तैयार किया जा सकता है।'
'अकेली महाशक्ति' वाली टिप्पणी पर सफाई
बातचीत के दौरान जयशंकर से अमेरिका को 'अकेली महाशक्ति' बताने वाली उनकी पहले की टिप्पणी के बारे में भी सवाल किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह टिप्पणी एक बिल्कुल अलग संदर्भ में की गई थी — वह म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में विश्लेषकों और नीति-निर्माताओं को संबोधित कर रहे थे, जो अटलांटा की जी20 विदेश मंत्री बैठक से सर्वथा भिन्न आयोजन था।
उन्होंने कहा, 'म्यूनिख में वह विश्लेषकों और नीति-निर्माताओं को संबोधित कर रहे थे, जबकि अटलांटा में विभिन्न देशों के विदेश मंत्री एक साथ मौजूद थे। इसलिए दोनों अवसरों की चर्चाओं को एक ही संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।' गौरतलब है कि यह टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय मीडिया में पहले से ही सुर्खियाँ बटोर चुकी थी।
क्वाड और द्विपक्षीय वार्ताएँ
जयशंकर ने बताया कि अटलांटा में क्वाड विदेश मंत्रियों की भी बैठक हुई, जो इस वर्ष इस स्तर की तीसरी बैठक थी — इससे पहले दिल्ली और मनीला में भी इस स्तर की बैठकें हो चुकी हैं। उन्होंने कहा, 'भारत को लगता है कि क्वाड ने इस दौरान अच्छी प्रगति की है। अब उम्मीद है कि समूह की अगली बैठकें भविष्य की दिशा तय करने और एजेंडे का विस्तार करने पर केंद्रित होंगी।'
जी20 बैठक के दौरान जयशंकर ने लगभग सभी देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएँ कीं — कुछ अलग-अलग, कुछ समूह में। विदेश मंत्री के अनुसार, बैठक में यह आम समझ और सराहना थी कि आज की ध्रुवीकृत दुनिया में भारत सभी पक्षों से बात करने की क्षमता रखता है और देशों के बीच सेतु का काम करता है।
आगे की राह
दिसंबर में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन से पहले सदस्य देशों के बीच बातचीत के कई और दौर अपेक्षित हैं। भारत की सक्रिय कूटनीतिक भूमिका को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि नई दिल्ली एक बार फिर मध्यस्थ की भूमिका में नज़र आ सकती है। जयशंकर की अटलांटा यात्रा इसी व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।