जयशंकर का जी20 में आह्वान: ऊर्जा संकट की सबसे बड़ी मार ग्लोबल साउथ पर, राजनीतिकरण 'बेहद नुकसानदेह'
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 1 नवंबर 2026 को अटलांटा में आयोजित जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऊर्जा आपूर्ति के प्रवाह का राजनीतिकरण 'बेहद नुकसानदेह' है और इसका सर्वाधिक खामियाजा ग्लोबल साउथ के देशों को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने जी20 से आग्रह किया कि वह इस चुनौती को महज कुछ देशों की समस्या मानकर नजरअंदाज न करे, बल्कि इसके ठोस समाधान की दिशा में सामूहिक पहल करे।
बैठक का स्वरूप और प्रमुख एजेंडा
अटलांटा में शनिवार को संपन्न इस बैठक को जयशंकर ने 'बेहद उपयोगी, खुला और जीवंत' बताया। बैठक में तीन प्रमुख विषयों पर केंद्रित चर्चा हुई — भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ, ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा, तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं की विविधता। भारतीय पत्रकारों से बातचीत में जयशंकर ने तीनों विषयों पर भारत का पक्ष विस्तार से रखा और कहा कि सदस्य देश इन मुद्दों पर खुलकर संवाद के लिए तैयार दिखे।
ऊर्जा संकट और ग्लोबल साउथ पर असर
जयशंकर ने कहा, 'ऊर्जा बाजार में विकृति और ऊर्जा आपूर्ति के प्रवाह का राजनीतिकरण ऐसी समस्याएं हैं, जिनका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। ऊर्जा की कमी का सबसे अधिक बोझ ग्लोबल साउथ के देश उठा रहे हैं। इसलिए इस चुनौती को केवल कुछ देशों की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।' उन्होंने यह भी कहा कि जी20 को इस मुद्दे को औपचारिक रूप से स्वीकार करना चाहिए। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार भू-राजनीतिक तनावों के कारण पहले से ही अस्थिर हैं।
खाद्य सुरक्षा: अनाज से आगे, उर्वरकों तक पहुँची चर्चा
विदेश मंत्री ने खाद्य सुरक्षा के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उनके अनुसार बैठक में चर्चा केवल अनाज की आपूर्ति तक सीमित नहीं रही, बल्कि उर्वरकों की कमी से कृषि उत्पादन पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों पर भी विचार हुआ। जयशंकर के मुताबिक, उर्वरकों की आपूर्ति की समस्या का एक हिस्सा काला सागर क्षेत्र से तथा दूसरा खाड़ी एवं लाल सागर क्षेत्र से जुड़ा है। वहीं, अनाज की आवाजाही में बाधा का प्रमुख कारण काला सागर से संबंधित है।
भू-राजनीतिक संघर्षों पर भारत का स्पष्ट संदेश
भू-राजनीतिक हालात पर चर्चा के दौरान भारत ने एक बार फिर दोहराया कि बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का समाधान सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि कूटनीति, बातचीत और संवाद से निकालना होगा। जयशंकर ने कहा कि आज दुनिया दो ऐसे बड़े संघर्षों का सामना कर रही है जिनका प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। भारत का संदेश था कि शांति और संवाद ही एकमात्र टिकाऊ रास्ता है।
विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं की जरूरत और भारत की भूमिका
जी20 बैठक में भारत ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक विविध बनाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। जयशंकर ने कहा, 'आज हमें अधिक विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं की जरूरत है। विनिर्माण भी अलग-अलग स्थानों पर होना चाहिए, ताकि किसी एक भौगोलिक क्षेत्र में अत्यधिक उत्पादन केंद्रित न हो।' उन्होंने आगाह किया कि महामारी, सैन्य संघर्ष और जलवायु संबंधी घटनाओं ने यह साबित किया है कि एकल-क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर जोखिम है। बैठक के दौरान भारत ने लगभग सभी देशों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की और ध्रुवीकृत वैश्विक माहौल में 'सेतु-राष्ट्र' की भूमिका के लिए सदस्यों की सराहना प्राप्त की। आगामी सत्रों में इन मुद्दों पर ठोस कार्ययोजना बनाने की दिशा में बातचीत जारी रहने की उम्मीद है।