जी-20 में जापान की अपील: तेल भंडार बढ़ाएँ, ऊर्जा व्यापार को पारदर्शी रखें
सारांश
मुख्य बातें
जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने 31 अक्टूबर 2026 को अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में मध्य पूर्व संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बढ़ती अनिश्चितता के मद्देनज़र सभी सदस्य देशों से अपने तेल भंडारण को मज़बूत करने और ऊर्जा व्यापार को स्वतंत्र एवं पारदर्शी बनाए रखने की अपील की। जापान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मोतेगी ने ऊर्जा एवं आर्थिक विकास पर केंद्रित सत्र के दौरान ये प्रस्ताव रखे।
तीन प्रमुख प्राथमिकताएँ
मोतेगी ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए तीन स्पष्ट प्राथमिकताएँ सामने रखीं। पहली, ऊर्जा व्यापार को स्वतंत्र और पारदर्शी बनाए रखना। दूसरी, अंतरराष्ट्रीय समन्वय के ज़रिए तेल भंडार को मज़बूत करना। तीसरी, ऊर्जा उत्पादक और उपभोक्ता देशों के बीच सहयोग बढ़ाना।
उन्होंने तर्क दिया कि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और ऊर्जा खपत में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले जी-20 देशों की इस संकट से निपटने में साझा जिम्मेदारी है और सदस्य देशों के बीच करीबी समन्वय आवश्यक है।
खाड़ी देशों के साथ व्यापक सहयोग योजना
जापान ने खाड़ी देशों के साथ एक व्यापक आर्थिक एवं ऊर्जा सहयोग योजना तैयार करने की जानकारी दी, जिसका उद्देश्य इन देशों की ऊर्जा संबंधी क्षमता को बढ़ाना है। हालाँकि, जापान की ओर से जारी जानकारी में इस योजना की समयसीमा, वित्तीय आवंटन या संबंधित देशों के नामों का खुलासा नहीं किया गया।
मोतेगी के अनुसार, यह योजना मध्य पूर्व के तेल उत्पादक देशों और एशियाई उपभोक्ता देशों के बीच संपर्क और सहयोग को मज़बूत करने की जापान की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। जापान ऊर्जा आपूर्ति, भंडारण और बुनियादी ढाँचे के विकास में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।
'पॉवर एशिया' पहल और एशियाई भंडारण क्षमता
मोतेगी ने जापान की 'पॉवर एशिया' पहल का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2026 में की गई थी। यह बैठक में किसी नई योजना की घोषणा नहीं, बल्कि पहले से जारी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता थी।
इस पहल के तहत तत्काल ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने, मध्यम और दीर्घकालिक क्षेत्रीय तेल भंडारण व्यवस्था मज़बूत करने तथा ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने पर काम किया जा रहा है। जापान ने एशिया में तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने के जारी प्रयासों का भी उल्लेख किया।
मोतेगी ने मध्य पूर्व के देशों में समुद्री जल को पीने योग्य बनाने वाले संयंत्रों और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) द्रवीकरण संयंत्रों के निर्माण में जापान की वित्तीय एवं तकनीकी भागीदारी का हवाला देते हुए कहा कि इन गतिविधियों को और व्यापक बनाने से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूती मिलेगी।
भारत के लिए कोई विशेष घोषणा नहीं
गौरतलब है कि जापान की ओर से जारी जानकारी में भारत के लिए किसी नए ऊर्जा आवंटन या विशेष परियोजना की घोषणा नहीं की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत समेत कई एशियाई देश मध्य पूर्व की अस्थिरता से उत्पन्न ऊर्जा आपूर्ति के जोखिम को लेकर सतर्क हैं।
आगे की राह
मोतेगी ने जी-20 को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का प्रमुख मंच बताते हुए सभी सदस्य देशों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने का आग्रह किया। बैठक के दूसरे सत्र में रखे गए जापान के प्रस्तावों में तत्काल ऊर्जा ज़रूरतों के साथ-साथ दीर्घकालिक भंडारण, विविधीकरण और उत्पादक-उपभोक्ता साझेदारी को प्राथमिकता दी गई। अब देखना यह होगा कि जी-20 देश इन प्रस्तावों पर किस हद तक ठोस सहमति बना पाते हैं।