हंगरी 4 नवंबर को खोलेगा कम्युनिस्ट युग के 50-60 हज़ार मुखबिरों की गुप्त फाइलें
सारांश
मुख्य बातें
हंगरी की सरकार 4 नवंबर 2026 को 1945 से 1989 के बीच कम्युनिस्ट शासन के दौरान सक्रिय रहे सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के मुखबिरों के नाम सार्वजनिक करने जा रही है। इतिहासकारों के अनुमान के अनुसार इन फाइलों में 50,000 से 60,000 व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य दशकों से दफन सच को उजागर करना और नागरिकों का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा बहाल करना है।
क्या होगा 4 नवंबर को
4 नवंबर को एक ऑनलाइन डेटाबेस जारी किया जाएगा, जिसके ज़रिए आम नागरिक उन मुखबिरों के नाम खोज सकेंगे जिन्होंने कम्युनिस्ट काल में सुरक्षा एजेंसियों के लिए काम किया था। यह डेटाबेस उन अभिलेखों पर आधारित होगा जो दशकों से सरकारी तहखानों में बंद थे और जिन तक केवल शोधकर्ताओं व पीड़ित परिवारों की सीमित पहुँच थी। पहले इन फाइलों को 1956 की सोवियत-विरोधी क्रांति की वर्षगांठ पर जारी करने की योजना थी, लेकिन बाद में तारीख बदलकर 4 नवंबर कर दी गई।
प्रधानमंत्री माग्यार का वादा और कानूनी आधार
हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर माग्यार ने इसकी पुष्टि एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिए की। उन्होंने लिखा, 'तिस्जा (उनकी राजनीतिक पार्टी) के प्रमुख वादों में से एक को पूरा करते हुए, हम 4 नवंबर को तानाशाही के दौर की गुप्त पुलिस फाइलों को सार्वजनिक करेंगे। यह कई परिवारों के लिए एक कठिन और संवेदनशील मामला होगा, लेकिन अतीत का सामना किए बिना कोई वास्तविक राजनीतिक बदलाव नहीं आ सकता।' माग्यार ने यह वादा अप्रैल के संसदीय चुनावों से पहले अपने अभियान के दौरान किया था और सत्ता में आने के बाद सितंबर में इस आशय का कानून भी पारित कर दिया।
मुखबिर नेटवर्क की पृष्ठभूमि
कथित तौर पर कम्युनिस्ट हंगरी ने समाज की निगरानी और असंतोष को कुचलने के लिए एक व्यापक मुखबिर तंत्र खड़ा किया था जो करीब चार दशकों तक सक्रिय रहा। वर्तमान सरकार का मानना है कि नेटवर्क में शामिल कुछ लोगों को ब्लैकमेल या दबाव के ज़रिए अपने पड़ोसियों, दोस्तों, सहकर्मियों और यहाँ तक कि परिजनों की जासूसी करने पर मजबूर किया गया था, जबकि अन्य को विभिन्न सुविधाओं का लालच देकर शामिल किया गया था। इतिहासकारों के अनुसार इन फाइलों में दर्ज लगभग 10 प्रतिशत लोग ही आज जीवित हैं।
जनता का समर्थन और विशेषज्ञ राय
सर्वेक्षणों के अनुसार हंगरी के दो-तिहाई से अधिक नागरिक इस फैसले का समर्थन करते हैं। सामाजिक संबंध एवं संस्कृति मंत्री जोल्टान तार ने कहा, 'एक लोकतांत्रिक समाज को अपने अतीत को जानने का अधिकार है।' इतिहासकारों का मानना है कि इस ऑनलाइन व्यवस्था से हंगरी पूर्वी यूरोप के कम्युनिस्ट देशों में सबसे पारदर्शी सुरक्षा अभिलेखागार वाला देश बन सकता है।
तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य: पूर्वी यूरोप में पारदर्शिता की राह
गौरतलब है कि पूर्वी यूरोप के अन्य देश यह कदम पहले ही उठा चुके हैं। पूर्वी जर्मनी ने 1992 में अपनी कुख्यात स्टासी गुप्त पुलिस की फाइलें खोली थीं, चेक गणराज्य में नागरिकों को 2003 में इन अभिलेखों तक पहुँच मिली, और लातविया ने 2018 में मुखबिरों से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक की थीं। हंगरी में इन दस्तावेजों को खोले जाने की माँग पिछले तीन दशकों से उठती रही है और कुछ दस्तावेज़ लीक भी हुए, लेकिन पूरी जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं हुई थी। यह कदम उस लंबित ऐतिहासिक जवाबदेही की दिशा में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।