क्या पंजाब पुलिस का 'ऑपरेशन प्रहार' गैंगस्टरों पर लगेगा अंकुश?
सारांश
Key Takeaways
- ऑपरेशन प्रहार पंजाब में गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का हिस्सा है।
- 12,000 पुलिस अधिकारी शामिल हैं इस अभियान में।
- 72 घंटे तक चलने वाले इस ऑपरेशन का उद्देश्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
- आम लोगों की भागीदारी के लिए एंटी-गैंगस्टर हेल्पलाइन शुरू की गई है।
- गैंगस्टरों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है।
चंडीगढ़, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पंजाब की भगवंत मान सरकार में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने 'ऑपरेशन प्रहार' की सराहना की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया और बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब पुलिस ने मंगलवार से 'ऑपरेशन प्रहार' की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य पंजाब को सुरक्षित बनाना है।
वीडियो में उन्होंने कहा कि लगभग 2,000 टीमें, जिनमें 12,000 पुलिस अधिकारी और सभी सीनियर अफसर शामिल हैं, मैदान में हैं। इन टीमों का लक्ष्य उन गैंगस्टरों और उनके गुंडों को पकड़ना है, जो हमारे प्रांत में अराजकता फैलाना चाहते हैं या जिनकी योजनाएं पंजाब और देश के खिलाफ हैं। यह ऑपरेशन पूरे 72 घंटे तक चलेगा, और मुख्यमंत्री मान इसे स्वयं मॉनिटर कर रहे हैं।
हरजोत सिंह ने पंजाब पुलिस की कड़ी मेहनत की सराहना की और मुख्यमंत्री भगवंत मान को धन्यवाद दिया, जिन्होंने गैंगस्टरों के खिलाफ कठोर निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि पुलिस दिन-रात काम कर रही है और यह ऑपरेशन बेहद आवश्यक था।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान अमृतसर में एक एनकाउंटर हो चुका है, और फतेहगढ़ में भी एनकाउंटर जारी है। हरजोत सिंह ने आम नागरिकों से अपील की कि वे इस मुहिम में पुलिस का सहयोग करें ताकि पंजाब को गैंगस्टरों से मुक्त किया जा सके और इसे सुरक्षित बनाया जा सके।
वहीं, मीडिया से बातचीत करते हुए पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पंजाब में गैंगस्टरों के लिए अब कोई स्थान नहीं है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के सख्त निर्देशों के बाद पुलिस ने गैंगस्टरों के खिलाफ सीधे और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। मंगलवार से पूरे प्रदेश में गैंगस्टरों के खिलाफ युद्ध की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है।
डीजीपी ने बताया कि हाल ही में हुई हाई प्रोफाइल कार्रवाइयाँ अंतर-राज्यीय ऑपरेशन्स से संबंधित थीं, और इन सभी को मुख्यमंत्री मान ने स्वयं मॉनिटर किया। इसके बाद मुख्यमंत्री के साथ गहन मंथन हुआ, जिसमें एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पंजाब में गैंगस्टरिज्म किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जाएगा। इसी के तहत पुलिस ने अपनी रणनीति बनाई और उसे लागू करना शुरू किया।
डीजीपी के अनुसार, पहले चरण में 72 घंटे का बड़ा ऑपरेशन लॉन्च किया गया है। इसमें लगभग 12,000 पुलिस अधिकारी शामिल हैं, जो लगभग 2,000 स्थानों पर एक साथ रेड कर रहे हैं। खासकर उन गैंगस्टरों पर शिकंजा कसा जा रहा है जो विदेशों में बैठे हैं और समझते हैं कि वे सुरक्षित हैं। पुलिस उनके पंजाब में मौजूद साथियों, रिश्तेदारों और सपोर्ट सिस्टम को चिन्हित कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई कर रही है।
उन्होंने कहा कि यह केवल एकतरफा हमला नहीं है, बल्कि एक मल्टी-प्रॉन्गड अटैक है। गैंगस्टरों के पूरे नेटवर्क को तोड़ा जाएगा चाहे वह फाइनेंसिंग हो, हथियारों की सप्लाई हो, लॉजिस्टिक्स हो या फिर उन्हें शरण देने वाले लोग हों। मुख्यमंत्री स्वयं इस पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं।
डीजीपी ने बताया कि विदेश में बैठे गैंगस्टरों को लौटाने के लिए एक विशेष सेल बनाई गई है, जिसकी अगुवाई आईजी रैंक के अधिकारी आशीष चौधरी कर रहे हैं। इस सेल में राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी मिलकर काम करेंगे। अब तक 23 गैंगस्टरों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हो चुके हैं या प्रक्रिया में हैं, और बाकी 37 गैंगस्टरों के दस्तावेज पूरे कर अगले तीन महीनों में उनके खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि पंजाब में अब ऑर्गेनाइज्ड क्राइम के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी होगी। क्रिमिनल फाइनेंसिंग, मनी लॉन्ड्रिंग, प्रॉपर्टी अटैचमेंट और हर कानून का पूरी ताकत से उपयोग किया जाएगा। गैंगस्टरों की अवैध संपत्तियाँ जब्त की जाएंगी और उनके पूरे इकोसिस्टम को समाप्त किया जाएगा।
डीजीपी ने यह भी बताया कि आम लोगों की भागीदारी के लिए एंटी-गैंगस्टर हेल्पलाइन शुरू की गई है, जो 24 घंटे सक्रिय रहेगी। लोग बेझिझक सूचना दे सकते हैं, उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
इसके अतिरिक्त, पंजाब सरकार ने 10 करोड़ रुपए का रिवॉर्ड फंड भी बनाया है। यदि कोई व्यक्ति किसी अपराधी या गैंगस्टर के बारे में ऐसी जानकारी देता है, जिससे उसकी गिरफ्तारी या ठिकाने तक पहुंचने में मदद मिलती है, तो उसे इनाम मिलेगा। एसएसपी स्तर पर 1 लाख, डीआईजी और पुलिस कमिश्नर स्तर पर 1.5 लाख, एडीजीपी और एजीटीएफ स्तर पर 2 लाख और डीजीपी स्तर पर अधिकतम 10 लाख रुपए तक का इनाम दिया जा सकता है।
साथ ही एनडीपीएस एक्ट के तहत भी इनाम निर्धारित किए गए हैं, जैसे एक किलो हेरोइन पकड़ने पर 60 हजार रुपए और प्रॉपर्टी फ्रीज करवाने पर 40 हजार रुपए का इनाम।