क्या महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रखी जाएगी?
सारांश
Key Takeaways
- सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी
- साइबर सेल की विशेष टीमें
- साइबर सुरक्षा के लिए जागरूकता
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का महत्व
- सामाजिक समरसता को बढ़ावा
मुंबई, महाराष्ट्र (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों के दौरान सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और धार्मिक पोस्ट हटाने के लिए महाराष्ट्र साइबर सेल के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) यशस्वी यादव ने बताया कि चुनावी और सांप्रदायिक माहौल को सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष निगरानी प्रणाली बनाई गई है।
यशस्वी यादव ने कहा कि इस कार्य के लिए साइबर सेल की दो विशेष टीमों को तैनात किया गया है। उन्होंने बताया, “एक टीम ‘माल्टेगो’ जैसे ऑटोमेटेड टूल्स का उपयोग कर रही है, जो कीवर्ड-आधारित सर्च के माध्यम से आपत्तिजनक और समस्याग्रस्त पोस्ट की पहचान में मदद करते हैं। ऐसी किसी भी पोस्ट को हटा दिया जाएगा, और यदि मामला गंभीर हो जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।”
उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में आम नागरिकों से साइबर हाइजीन अपनाने की अपील की। यादव ने कहा, “जैसे हम सड़कों पर चलते समय ट्रैफिक नियमों का पालन करते हैं, वैसे ही सूचना सुपरहाइवे का उपयोग करते समय भी साइबर-हाइजीनिक व्यवहार अपनाना आवश्यक है। नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें एफआईआर दर्ज होना भी शामिल है, जिससे लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।”
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर टिप्पणी करते हुए एडीजी ने कहा, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानहानि के बीच एक पतली रेखा होती है। जहां मानहानि और बदनामी का अभियान शुरू होता है, वहीं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा समाप्त हो जाती है, खासकर जब ऐसे अभियान राजनीतिक या प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ चलाए जाते हैं। किसी की व्यक्तिगत गरिमा पर हमले की स्थिति में जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए यशस्वी यादव ने कहा कि साइबर युद्ध अब एक वास्तविक और व्यावहारिक खतरा बन चुका है। उन्होंने कहा, “साइबर युद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है और हम इस चुनौती का सामना करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।”