क्या है आर्मी एयर डिफेंस डे: भारतीय रक्षा तंत्र की अभेद्य ढाल?

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क्या है आर्मी एयर डिफेंस डे: भारतीय रक्षा तंत्र की अभेद्य ढाल?

सारांश

10 जनवरी को भारत उन नायकों को सम्मानित करता है, जो दुश्मनों के हवाई हमलों को नष्ट करने की अद्भुत क्षमता रखते हैं। आर्मी एयर डिफेंस डे पर जानें इस अद्भुत यात्रा के बारे में जो एक साधारण ट्रेनिंग सेंटर से एक उच्च तकनीकी बल तक पहुंची है।

Key Takeaways

  • 10 जनवरी को आर्मी एयर डिफेंस डे मनाया जाता है।
  • एएडी कोर की जड़ें द्वितीय विश्व युद्ध में हैं।
  • भारतीय वायु रक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
  • सेना वायु रक्षा कॉलेज में गनर्स को प्रशिक्षित किया जाता है।
  • भविष्य के युद्ध डेटा और तकनीक पर निर्भर करेंगे।

नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। 10 जनवरी का दिन भारत के उन बहादुर योद्धाओं को सम्मान देने का है, जो क्षणभर में दुश्मनों के हवाई इरादों को ध्वस्त करने की क्षमता रखते हैं। चलिए जानते हैं कि कैसे एक 'एंटी-एयरक्राफ्ट ट्रेनिंग सेंटर' से शुरू हुआ यह सफर आज 'आकाशतीर' जैसी डिजिटल शक्ति तक पहुंचा है।

तारीख थी 1971 के युद्ध की। आसमान में पाकिस्तान के अत्याधुनिक 'साबर जेट' अपनी तेज़ी का आतंक फैला रहे थे। तभी नीचे, ज़मीन पर तैनात एक भारतीय गनर, अरुमुगम पी. ने अपनी मशीन गन की नाल आसमान की ओर घुमाई। बिना किसी उन्नत रडार के, सिर्फ़ सटीक अनुमान और मजबूत इरादों के बल पर उन्होंने उस जेट को गिरा दिया। यह केवल एक विमान का गिरना नहीं था, यह उस 'आर्मी एयर डिफेंस' (एएडी) की गूँज थी, जिसे आज हम विश्व की सबसे प्रभावशाली वायु रक्षा शक्तियों में से एक मानते हैं।

भारतीय सेना में वायु रक्षा की जड़ें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान निहित हैं। 1939 में जब जापानी सेना का खतरा बढ़ा, तब अंग्रेजों ने यह समझा कि ज़मीनी लड़ाई जीतने के लिए आसमान पर निगरानी आवश्यक है।

15 सितंबर 1940 को कोलाबा (मुंबई) में भारत का पहला 'एंटी-एयरक्राफ्ट ट्रेनिंग सेंटर' स्थापित हुआ। 1947 में जब देश का विभाजन हुआ, तब सेना की वायु रक्षा संपत्तियाँ भी विभाजित हो गईं। भारत के हिस्से में केवल दो रेजिमेंट (26 और 27) आईं। लगभग शून्य से शुरू हुआ यह सफर 10 जनवरी 1994 को अपनी मंजिल पर पहुंचा, जब इसे आर्टिलरी से अलग कर एक स्वतंत्र कोर का दर्जा दिया गया।

आज की एएडी कोर केवल बंदूकों का समूह नहीं है, बल्कि यह 'ट्विन-ट्रैक' रणनीति पर कार्य करने वाली एक उच्च तकनीकी बल है।

पुरानी एल/70 गन और शिल्का टैंकों को रडार और डिजिटल सेंसरों से सुसज्जित किया गया है। 'आकाश' और 'एसआरएसएएम' जैसी मिसाइलें अब कोर की पहचान बन चुकी हैं।

भविष्य के युद्ध अब केवल गोलियों से नहीं, बल्कि 'डेटा' से लड़े जाएंगे। प्रोजेक्ट आकाशतीर एएडी कोर की वह डिजिटल रीढ़ है, जो देश के सभी रडारों और मिसाइल यूनिट्स को एक धागे में पिरोती है। यह प्रणाली पलभर में बता देती है कि आसमान में उड़ने वाली वस्तु 'दोस्त' है या 'दुश्मन'। 2026 को सेना ने 'नेटवर्किंग और डेटा-सेंट्रिसिटी का वर्ष' घोषित किया है, जिसका नेतृत्व एएडी कोर कर रही है।

मई 2025 के 'ऑपरेशन सिंदूर' ने दुनिया को दिखा दिया कि भारतीय वायु रक्षा कोर क्यों खास है। दुश्मन ने दर्जनों चीनी ड्रोनों और लघु दूरी की मिसाइलों से हमला किया, लेकिन एएडी की 23 मिमी ट्विन बैरल गन और आकाशतीर नेटवर्क ने उन्हें सीमा पार करने से पहले ही नष्ट कर दिया। इस युद्ध ने साबित किया कि भविष्य 'ड्रोन-केंद्रित' है और भारत इसके लिए तैयार है।

ओडिशा के गोपालपुर में स्थित 'सेना वायु रक्षा कॉलेज' (एएडीसी) किसी मंदिर से कम नहीं है। यह संस्थान आधुनिक सिमुलेटर और लाइव-फायर रेंज से लैस है। यहां गनर्स को न केवल निशाना लगाना सिखाया जाता है, बल्कि उन्हें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का मास्टर भी बनाया जाता है।

हर वर्ष 10 जनवरी

आज जब युद्ध के मैदान में 'कामिकेज ड्रोन' और 'लॉइटरिंग म्युनिशन' जैसे नए खतरे मंडरा रहे हैं, तब हमारी एएडी कोर 'अश्वनी' जैसी विशेष ड्रोन यूनिट्स के साथ मिलकर एक ऐसा सुरक्षा चक्र तैयार कर रही है जिसे भेदना असंभव है।

Point of View

यह हमारे देश की सुरक्षा और तकनीकी प्रगति का प्रतीक है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भारतीय वायु रक्षा प्रणाली कितनी मजबूत और अद्भुत है। हमें गर्व होना चाहिए कि हम ऐसे योद्धाओं के देश में रहते हैं जो हमारी सुरक्षा के प्रति हमेशा तत्पर रहते हैं।
NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

आर्मी एयर डिफेंस डे कब मनाया जाता है?
आर्मी एयर डिफेंस डे हर वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है।
आर्मी एयर डिफेंस की जड़ें कब से जुड़ी हैं?
आर्मी एयर डिफेंस की जड़ें द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ी हैं।
भारतीय वायु रक्षा प्रणाली की पहचान क्या है?
भारतीय वायु रक्षा प्रणाली की पहचान 'आकाश' और 'एसआरएसएएम' जैसी मिसाइलें हैं।
सेना वायु रक्षा कॉलेज कहाँ स्थित है?
सेना वायु रक्षा कॉलेज ओडिशा के गोपालपुर में स्थित है।
क्या है प्रोजेक्ट आकाशतीर?
प्रोजेक्ट आकाशतीर एएडी कोर की डिजिटल रीढ़ है, जो देश के सभी रडारों और मिसाइल यूनिट्स को जोड़ती है।
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