रामलीला मैदान रैली पर प्रमोद तिवारी का पलटवार: 'आजादी के बाद की सबसे सफल रैली, BJP सबसे बड़ी झूठी पार्टी'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की रामलीला मैदान रैली को भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा 'फ्लॉप शो' करार दिए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने BJP पर झूठ फैलाने और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए इस रैली को स्वतंत्रता के बाद की सबसे सफल राजनीतिक रैली बताया।
रैली को लेकर तिवारी का पलटवार
तिवारी ने कहा, 'इसीलिए मैं कहता हूं कि BJP से ज्यादा झूठ बोलने वाली, गुमराह करने वाली और बेशर्म पार्टी कोई दूसरी नहीं है। मीडिया ने भी लाइव दिखाया है कि मैदान में जितने लोग मौजूद थे, उससे दोगुने लोग बाहर थे। जब राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के सभी नेता चल रहे थे, तो दोनों तरफ की सड़कें लोगों से भरी हुई थीं।' उनके अनुसार आलोचक भी इस रैली की सफलता को नकार नहीं सकते।
तिवारी ने आगे कहा कि रैली की भीड़ की संख्या से ज्यादा वहाँ उपस्थित जज्बा मायने रखता है। उन्होंने जोर देकर कहा, 'हम तो कहते हैं कि यह आजादी के बाद की सबसे सफल रैली थी, जो आज तक कभी नहीं हुई। वहाँ एक ही संकल्प था कि अब BJP जैसी भ्रष्ट और लोकतंत्र की हत्या करने वाली पार्टी को हटाना है और संविधान को मानने वाली पार्टी को सत्ता में लाना है।'
राहुल गांधी के बयान का समर्थन
तिवारी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने कहा था कि सत्तारूढ़ दल को देश में रहकर ही जवाबदेही देनी होगी। तिवारी के अनुसार, 'राहुल गांधी ने बिल्कुल ठीक कहा है कि हम उन्हें जाने नहीं देंगे। अपने गुनाहों का हिसाब उन्हें यहीं रहकर देना होगा — चाहे वे दिल्ली में रहकर हिसाब दें या गुजरात में रहकर दें।' उन्होंने राहुल गांधी के उस दावे को भी दोहराया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 'वोट चोरी' से सत्ता में आने का आरोप लगाया गया था — यह आरोप BJP ने सिरे से नकार दिया है।
यूपी वोटर लिस्ट विवाद पर तंज
उत्तर प्रदेश में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत कथित तौर पर एक करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर तंज कसते हुए तिवारी ने कहा कि सीएम योगी अब राहुल गांधी के 'नए समर्थक' बन गए हैं। उनका कहना था कि यदि योगी स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि एक करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए, तो यह सवाल उठता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने यह कदम क्यों उठाया — और क्या यह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में संभावित हार के लिए पहले से बहाना तैयार करने की कोशिश है।
गौरतलब है कि वोटर लिस्ट पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल पहले से ही चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं। यह विवाद ऐसे समय में और गहरा हो गया है जब 2027 के चुनाव की तैयारियाँ शुरू होने लगी हैं।
AAP के बागी विधायकों पर टिप्पणी
आम आदमी पार्टी (AAP) के दो बागी विधायकों द्वारा पंजाब में भगवंत मान सरकार पर नशा मुक्ति का वादा पूरा न करने का आरोप लगाए जाने पर तिवारी ने एक पुरानी कहावत का सहारा लिया। उन्होंने कहा, 'जब जहाज डूबने लगता है तो उस पर सवार लोग पहले कूदकर भागने लगते हैं। पंजाब में भी यही दिख रहा है।' यह टिप्पणी AAP की पंजाब सरकार की साख पर सवाल उठाने वाले विपक्षी बयानों की कड़ी में जोड़ी जा सकती है।
आगे क्या
रामलीला मैदान रैली की सफलता या विफलता को लेकर इंडिया गठबंधन और BJP के बीच जुबानी जंग जारी रहने के आसार हैं। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट विवाद और रैली की भीड़ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।