रामलीला मैदान रैली 'फ्लॉप शो' रही: तेलंगाना BJP अध्यक्ष रामचंद्र राव का दावा
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष रामचंद्र राव ने 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित 23 दलों के 'इंडिया' गठबंधन की रैली को 'फ्लॉप शो' करार दिया। राव ने दावा किया कि विपक्ष उतनी भीड़ नहीं जुटा पाया, जितनी उसने पहले उम्मीद जताई थी, और मैदान का बड़ा हिस्सा खाली पड़ा रहा।
रैली पर BJP का आकलन
राव ने कहा, 'दिल्ली में 23 दलों की यह रैली पूरी तरह फ्लॉप रही। राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने दावा किया था कि 10 लाख लोग आएंगे, लेकिन हमने देखा कि कई कुर्सियाँ खाली थीं और मैदान का आधा हिस्सा भी खाली पड़ा था।' उन्होंने आगे कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि जनता उन लोगों के साथ नहीं है 'जो देश से झूठ बोल रहे हैं'।
गौरतलब है कि रैली की भीड़ को लेकर किए गए ये दावे BJP की ओर से हैं और इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। विपक्षी दलों ने रैली को सफल बताया है।
रैली का उद्देश्य और मार्ग
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में यह 'चलो दिल्ली' मार्च मिंटो रोड-कनॉट प्लेस से शुरू होकर रामलीला मैदान पर समाप्त हुआ। रैली का मुख्य मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन था। राहुल गांधी के अलावा ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने वहाँ उपस्थित लोगों को संबोधित किया।
BJP का पलटवार और 1984 का सवाल
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब नई दिल्ली में BJP और 'इंडिया' गठबंधन ने एक-दूसरे के खिलाफ मार्च निकाले। BJP ने 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर अपना मार्च आयोजित किया और कांग्रेस के नेतृत्व वाली 'चलो दिल्ली' रैली के समय पर सवाल उठाए।
राव ने कटाक्ष करते हुए पूछा कि जब 1 नवंबर का दिन 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी के रूप में शोक का दिन माना जाता है, तो कांग्रेस ने इसी तारीख को रैली क्यों चुनी। उन्होंने यह भी कहा कि दीपावली नज़दीक होने से व्यापारियों को भी असुविधा हुई।
चुनाव आयोग पर विवाद
राव ने आरोप लगाया कि 'इंडिया' गठबंधन के पास मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और यह विरोध 'सिर्फ जुबानी दावों' पर आधारित है। विपक्ष ने जवाबी तर्क में मतदाता सूचियों में अनियमितताओं के कथित दस्तावेज़ी प्रमाण पेश करने का दावा किया है, हालाँकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है।
आगे की राजनीतिक तस्वीर
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और दोनों पक्ष जन-समर्थन का प्रदर्शन करने में जुटे हैं। भीड़ के आकलन पर परस्पर विरोधी दावों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि रामलीला मैदान की रैली विपक्षी एकता का कितना सटीक पैमाना बन पाई।