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रामलीला मैदान में इंडी गठबंधन की मेगा रैली: वोट चोरी के आरोप, निर्वाचन आयोग पर निशाना

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रामलीला मैदान में इंडी गठबंधन की मेगा रैली: वोट चोरी के आरोप, निर्वाचन आयोग पर निशाना

सारांश

रामलीला मैदान में इंडी गठबंधन की रैली महज़ एक विरोध प्रदर्शन नहीं थी — यह दो वर्षों के कथित वोट चोरी अभियान का सार्वजनिक परिणाम था। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सीधा सवाल उठाया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की माँग को केंद्रीय नारे में बदल दिया।

मुख्य बातें

11 अक्टूबर 2026 को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में इंडी गठबंधन की मेगा रैली आयोजित हुई; कांग्रेस नेताओं के अनुसार 10 लाख से अधिक लोग जुटे।
राहुल गांधी , मल्लिकार्जुन खड़गे , अशोक गहलोत , सचिन पायलट , शशि थरूर समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।
विपक्ष ने महादेवपुरा में 1.05 लाख , बिहार में 65 लाख और महाराष्ट्र में 32–44 लाख मतदाताओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की माँग की गई।
इंडी गठबंधन ने 'मॉक पार्लियामेंट' का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य संसद में विपक्ष की कथित उपेक्षा को उजागर करना था।
राहुल गांधी ने 7 अगस्त 2025 को बेंगलुरु से वोट चोरी अभियान की शुरुआत की थी।

नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 11 अक्टूबर 2026 को इंडी गठबंधन की मेगा शक्ति प्रदर्शन रैली आयोजित की गई, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र सरकार तथा भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर कथित वोट चोरी और मतदाता सूची में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने दावा किया कि दिल्ली और रामलीला मैदान में 10 लाख से अधिक लोग एकजुट हुए।

रैली का मुख्य एजेंडा

इंडी गठबंधन की इस रैली का केंद्रीय मुद्दा कथित वोट चोरी और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना रहा। नेताओं ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर किया जा रहा है और मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी हो रही है। उन्होंने ECI से निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने की माँग की।

गौरतलब है कि विपक्ष पिछले करीब दो वर्षों से चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा लगातार उठाता आ रहा है। इस रैली को उसी अभियान की परिणति के रूप में देखा जा रहा है।

नेताओं के प्रमुख बयान

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, 'यह पार्टियों की बात नहीं है और न ही केवल कांग्रेस का मामला है। यह एक बहुत सीधा संदेश है कि चुनाव आयोग को भारत के लोगों के संवैधानिक अधिकार नहीं छीनने चाहिए।'

कांग्रेस नेता हरीश रावत ने रैली को 'देश की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण' बताते हुए कहा कि इस आयोजन के साथ देश एक नए युग में प्रवेश करेगा और एक नया सवेरा आएगा।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आज़ादी के बाद पहली बार देश में ऐसा माहौल देखने को मिल रहा है। उन्होंने SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया का ज़िक्र करते हुए चेताया कि यदि मतदाताओं को अपने वोट में हुए बदलाव की जानकारी तक न मिले, तो लोकतंत्र की रक्षा कैसे होगी।

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने रैली को 'जनता की आवाज़' करार देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग कर रहे हैं।

कथित अनियमितताओं के आरोप

कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 7 अगस्त 2025 को बेंगलुरु से कथित वोट चोरी का मामला उजागर करना शुरू किया था। उन्होंने कई विशेष आरोप सामने रखे — जिनमें महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में कथित 1.05 लाख वोटों की चोरी, बिहार में 65 लाख वोटों से जुड़ी कथित अनियमितताएँ और महाराष्ट्र में मतदाता संख्या में बदलाव के आरोप शामिल हैं।

लल्लू ने कहा कि 2014 से 2019 के बीच महाराष्ट्र में मतदाताओं की संख्या में 32 से 39 लाख तक की वृद्धि हुई, जबकि उसके पाँच महीने बाद हुए लोकसभा चुनाव के दौरान यह आँकड़ा बढ़कर 44 लाख हो गया। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत का मामला भी इसी कड़ी में उन्होंने उठाया। ये सभी आरोप विपक्ष के हैं; निर्वाचन आयोग की ओर से इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।

'मॉक पार्लियामेंट' और विपक्ष की रणनीति

एआईसीसी प्रभारी (हिमाचल प्रदेश) रजनी पाटिल ने बताया कि संसद में विपक्ष को अपने मुद्दे उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता। इसीलिए इंडी गठबंधन ने 'मॉक पार्लियामेंट' आयोजित करने का निर्णय लिया, ताकि जनता को यह दिखाया जा सके कि संसद में विपक्ष को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

पाटिल ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का संदर्भ लेते हुए 'गद्दी छोड़ो, वोट चोरों गद्दी छोड़ो' का नारा दिया। कांग्रेस नेता शकील अहमद खान ने भीड़ को जनता के समर्थन का प्रतीक बताते हुए कहा कि देशभर में करोड़ों लोग इस रैली की गतिविधियाँ उत्सुकता से देख रहे हैं।

आगे क्या

इंडी गठबंधन ने संकेत दिया है कि वह संसद से सड़क तक कथित वोट चोरी का मुद्दा उठाना जारी रखेगा। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की माँग गठबंधन की मुख्य राजनीतिक माँग के रूप में उभरी है। आलोचकों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के शीतकालीन सत्र में भी केंद्र में रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो रणनीतिक तो है पर जोखिम-भरा भी। मुख्यधारा की कवरेज रैली की भव्यता पर केंद्रित है, लेकिन असली सवाल यह है कि महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में मतदाता संख्या वृद्धि के विशिष्ट आँकड़ों की स्वतंत्र जाँच क्यों नहीं हुई। जब तक ये आरोप केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित रहेंगे, तब तक ये जनमत तो बनाएंगे, पर व्यवस्था-परिवर्तन के लिए यह पर्याप्त नहीं होगा।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडी गठबंधन की रामलीला मैदान रैली क्यों आयोजित की गई?
यह रैली कथित वोट चोरी, मतदाता सूची में अनियमितताओं और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के लिए आयोजित की गई। विपक्ष पिछले करीब दो वर्षों से इस मुद्दे को उठाता आ रहा है और इस रैली को उस अभियान की बड़ी सार्वजनिक अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्ष ने वोट चोरी के कौन-से विशेष आरोप लगाए?
कांग्रेस नेताओं ने महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में कथित 1.05 लाख वोटों की चोरी, बिहार में 65 लाख मतदाताओं से जुड़ी अनियमितताओं और महाराष्ट्र में 2014-19 के बीच मतदाता संख्या में 32-44 लाख की अप्रत्याशित वृद्धि के आरोप लगाए। ये सभी आरोप विपक्ष के हैं; निर्वाचन आयोग की ओर से इन पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर क्या माँगें उठाई गईं?
कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू और सचिन पायलट समेत कई नेताओं ने ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की। लल्लू ने यह भी माँग की कि उनके खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।
इंडी गठबंधन की 'मॉक पार्लियामेंट' क्या थी?
'मॉक पार्लियामेंट' एक प्रतीकात्मक आयोजन था, जिसे एआईसीसी प्रभारी रजनी पाटिल ने इस आधार पर उचित ठहराया कि संसद में विपक्ष को अपने मुद्दे उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता। इसका उद्देश्य जनता को यह दिखाना था कि संसद में विपक्ष को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
राहुल गांधी ने वोट चोरी का मुद्दा कब से उठाना शुरू किया?
कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू के अनुसार, राहुल गांधी ने 7 अगस्त 2025 को बेंगलुरु से कथित वोट चोरी का मामला सार्वजनिक रूप से उठाना शुरू किया था। तब से विपक्ष लगातार इस मुद्दे को संसद और सड़क दोनों मंचों पर उठाता आ रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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