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नंदिनी दूध ₹8 प्रति लीटर महंगा, कर्नाटक में 1 नवंबर से नई दरें लागू; दही भी ₹54 से ₹68

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नंदिनी दूध ₹8 प्रति लीटर महंगा, कर्नाटक में 1 नवंबर से नई दरें लागू; दही भी ₹54 से ₹68

सारांश

कर्नाटक में नंदिनी दूध ₹8 प्रति लीटर और दही ₹14 प्रति किलोग्राम महंगा हो गया है। सरकार का तर्क है कि सूखे और बढ़ती लागत से जूझते डेयरी किसानों की रक्षा जरूरी है — लेकिन उपभोक्ता नाराज़ हैं और बीएएमयूएल अध्यक्ष के मुख्यमंत्री से पारिवारिक रिश्ते ने बहस को और तेज कर दिया है।

मुख्य बातें

कर्नाटक में 1 नवंबर 2026 से नंदिनी दूध की कीमत में ₹8 प्रति लीटर की वृद्धि लागू।
दही की कीमत ₹54 से बढ़ाकर ₹68 प्रति किलोग्राम की गई — यानी ₹14 की बढ़ोतरी।
बीएएमयूएल अध्यक्ष डी.के.
सुरेश ने फैसले का बचाव करते हुए किसानों की आजीविका को प्राथमिकता बताया।
शिवकुमार के अनुसार किसान ₹12 प्रति लीटर वृद्धि की माँग कर रहे थे और पड़ोसी राज्यों में दाम पहले से अधिक हैं।
उपभोक्ता संगठनों ने महंगाई के अतिरिक्त बोझ पर चिंता जताई; राज्य में बहस तेज़।

कर्नाटक में 1 नवंबर 2026 (रविवार) से नंदिनी दूध की कीमतों में ₹8 प्रति लीटर की वृद्धि लागू हो गई है। इसके साथ ही दही की कीमत ₹54 प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर ₹68 प्रति किलोग्राम कर दी गई है। बेंगलुरु मिल्क यूनियन लिमिटेड (बीएएमयूएल) और कर्नाटक राज्य सरकार ने इस फैसले को डेयरी किसानों की आजीविका सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य बताया है, जबकि उपभोक्ता संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है।

मूल्य वृद्धि का विवरण

नंदिनी दूध की कीमत में ₹8 प्रति लीटर की यह बढ़ोतरी तत्काल प्रभाव से लागू की गई है। दही की कीमत में ₹14 प्रति किलोग्राम की वृद्धि से उपभोक्ताओं की चिंता और अधिक बढ़ी है। कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) के अनुसार, यह निर्णय दुग्ध उत्पादकों को बेहतर भुगतान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

बीएएमयूएल अध्यक्ष का बचाव

बीएएमयूएल के अध्यक्ष डी.के. सुरेश, जो मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के छोटे भाई भी हैं, ने मूल्य वृद्धि का बचाव करते हुए कहा, "यदि किसान बचेंगे तो हम सभी बचेंगे। नंदिनी दूध आपके लिए महंगा जरूर होगा, लेकिन किसानों के लिए यह अच्छी खबर है। मैं कीमत बढ़ाने के लिए क्षमा चाहता हूं, लेकिन किसानों का जीवित रहना भी जरूरी है।"

सुरेश ने कहा कि शहरों में रहने वाले अनेक लोग भी ऐसे परिवारों से आते हैं जिनका संबंध पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से रहा है। उन्होंने नागरिकों से नंदिनी ब्रांड के दूध, घी और पनीर जैसे उत्पादों का उपयोग जारी रखने की अपील की।

मुख्यमंत्री शिवकुमार की दलील

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 31 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि राज्य में सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण दूध उत्पादन प्रभावित हो रहा है और पशुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध कराना पहले से अधिक महंगा हो गया है। उन्होंने कहा कि किसानों की ओर से दूध के दाम ₹12 प्रति लीटर तक बढ़ाने की मांग की जा रही थी।

शिवकुमार ने कहा, "यदि किसानों की आय पर्याप्त नहीं होगी तो वे पशुओं के चारे पर खर्च कम करने को मजबूर होंगे, जिसका सीधा असर दुग्ध उत्पादन और पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार सीधे तौर पर दही की कीमतों को नियंत्रित नहीं कर सकती और दूध उत्पादों की दरों पर वसा (फैट) की मात्रा जैसे कारकों का भी प्रभाव पड़ता है।

आम जनता और उपभोक्ता संगठनों पर असर

गौरतलब है कि नंदिनी ब्रांड कर्नाटक के लाखों परिवारों की रोज़मर्रा की ज़रूरत से जुड़ा है, ऐसे में यह मूल्य वृद्धि सीधे घरेलू बजट पर असर डालेगी। उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि इससे महंगाई का अतिरिक्त बोझ आम लोगों पर पड़ेगा, खासतौर पर मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर।

यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में खाद्य पदार्थों की महंगाई पहले से ही आम जनता की चिंता का विषय है। आलोचकों का कहना है कि बीएएमयूएल अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के बीच पारिवारिक संबंध इस निर्णय की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं, हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।

क्या होगा आगे

राज्य सरकार और केएमएफ का कहना है कि यह बढ़ोतरी डेयरी किसानों को दीर्घकालिक राहत देगी और क्षेत्र को टिकाऊ बनाए रखने में मदद करेगी। फिलहाल बेंगलुरु सहित पूरे कर्नाटक में दूध और डेयरी उत्पादों की कीमतों को लेकर बहस तेज हो गई है। यह देखना अहम होगा कि उपभोक्ताओं की नाराज़गी क्या राजनीतिक दबाव में तब्दील होती है और सरकार इस पर कोई राहत पैकेज लाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक असुविधाजनक तथ्य इसे विवादास्पद बनाता है — बीएएमयूएल के अध्यक्ष और राज्य के मुख्यमंत्री आपस में भाई हैं। इस पारिवारिक समीकरण में पारदर्शिता की कमी जनता के संदेह को बल देती है। इसके अलावा, किसानों की मांग ₹12 प्रति लीटर की थी जबकि वृद्धि ₹8 पर रोकी गई — यह अर्धसत्य दोनों पक्षों को असंतुष्ट छोड़ता है। असली चुनौती यह है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि बढ़ी हुई कीमतों का लाभ वास्तव में किसानों तक पहुँचे, न कि बिचौलियों में खप जाए।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में नंदिनी दूध कितना महंगा हुआ है?
1 नवंबर 2026 से कर्नाटक में नंदिनी दूध की कीमत में ₹8 प्रति लीटर की वृद्धि लागू हो गई है। साथ ही दही की कीमत ₹54 से बढ़ाकर ₹68 प्रति किलोग्राम कर दी गई है।
नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने का फैसला क्यों लिया गया?
कर्नाटक सरकार और केएमएफ के अनुसार यह निर्णय डेयरी किसानों को बेहतर भुगतान सुनिश्चित करने और सूखे की वजह से बढ़ी उत्पादन लागत की भरपाई के लिए लिया गया है। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बताया कि किसान ₹12 प्रति लीटर वृद्धि की माँग कर रहे थे।
बीएएमयूएल अध्यक्ष डी.के. सुरेश का मुख्यमंत्री से क्या संबंध है?
बीएएमयूएल के अध्यक्ष डी.के. सुरेश, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के छोटे भाई हैं। इस पारिवारिक संबंध को लेकर आलोचकों ने मूल्य वृद्धि के निर्णय की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं, जिसे सरकार ने खारिज किया है।
उपभोक्ताओं पर नंदिनी दूध मूल्य वृद्धि का क्या असर होगा?
उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि दूध और दही की बढ़ी कीमतों से महंगाई का अतिरिक्त बोझ आम परिवारों, खासकर मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग पर पड़ेगा। बेंगलुरु सहित पूरे कर्नाटक में इस मुद्दे पर बहस तेज़ हो गई है।
क्या सरकार दही की कीमतें नियंत्रित कर सकती है?
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने स्पष्ट किया है कि सरकार सीधे तौर पर दही की कीमतों को नियंत्रित नहीं कर सकती। उन्होंने बताया कि दही समेत दूध से बने उत्पादों की कीमतों पर वसा (फैट) की मात्रा जैसे कारकों का भी प्रभाव पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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