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दीया मिर्जा के दीपावली संदेश पर BJP नेताओं का हमला, BMC ने हटाया वीडियो

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दीया मिर्जा के दीपावली संदेश पर BJP नेताओं का हमला, BMC ने हटाया वीडियो

सारांश

दीपावली पर पटाखों के खिलाफ दीया मिर्जा के संदेश ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। BMC ने वीडियो हटाया, BJP और शिवसेना नेताओं ने मोर्चा संभाला। असली सवाल यह है कि पर्यावरण की चिंता कब तक धर्म और राजनीति की बाधाओं में उलझती रहेगी।

मुख्य बातें

दीया मिर्जा के पटाखा-विरोधी दीपावली संदेश पर BMC ने मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम की आपत्ति के बाद वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया।
केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कहा कि पटाखों के बिना दीपावली का कोई अर्थ नहीं और दीया का बयान हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाता है।
भाजपा नेता श्रीकांत भारतीय ने कहा कि दीपावली मनाने का तरीका सीखने के लिए देश को दीया मिर्जा की जरूरत नहीं।
भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने विवाद को होली, दही हांडी, नवरात्रि और गणेशोत्सव जैसे अन्य हिंदू त्योहारों से भी जोड़ा।
BMC का यह अभियान बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर शुरू हुआ था; माधुरी दीक्षित और अजिंक्य रहाणे के वीडियो अभी भी उपलब्ध हैं।

अभिनेत्री दीया मिर्जा के पटाखे न जलाने संबंधी दीपावली संदेश पर शुरू हुआ विवाद 2 नवंबर 2026 को राजनीतिक रंग ले चुका है, जब केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले, भाजपा नेता श्रीकांत भारतीय और भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने अभिनेत्री पर सीधे निशाना साधा। इससे पहले मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम की आपत्ति के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से दीया मिर्जा का वीडियो हटा लिया था।

मुख्य घटनाक्रम

BMC ने मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए प्रदूषण-मुक्त दीपावली के लिए एक जागरूकता अभियान शुरू किया था। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद नागरिकों से पटाखे न फोड़ने की अपील की गई थी। इस अभियान के तहत दीया मिर्जा, माधुरी दीक्षित और क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे सहित कई जानी-मानी हस्तियों के वीडियो संदेश तैयार किए गए थे। हालांकि, दीया मिर्जा का वीडियो सामने आते ही विवाद खड़ा हो गया और BMC को वह वीडियो हटाना पड़ा।

नेताओं की प्रतिक्रियाएँ

केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कहा, 'दीया दूसरे धर्म से आती हैं और उन्हें त्योहार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। भारत का संविधान सभी धर्मों के लोगों को अपने-अपने त्योहार मनाने का अधिकार देता है। पटाखों के बिना दीपावली मनाने का कोई मतलब नहीं है, हालांकि ज्यादा प्रदूषण न हो, इसका ध्यान जरूर रखा जाना चाहिए। इसके लिए गाइडलाइन पहले ही जारी की गई हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के बयान हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हैं।

भाजपा नेता श्रीकांत भारतीय ने कहा, 'दीया मिर्जा को दूसरों को दीपावली मनाने का तरीका बताने से पहले आत्मचिंतन करना चाहिए। हमारी पार्टी किसी धर्म के विरोध में नहीं है, लेकिन दीया को अपने धर्म से जुड़े त्योहारों पर भी बात करनी चाहिए। हिंदू समाज सदियों से पर्यावरण की चिंता करता आया है। दीपावली किस तरह मनानी चाहिए, यह देश के लोगों को पता है — इसके लिए उन्हें दीया मिर्जा से सीखने की जरूरत नहीं।'

भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने इस विवाद को व्यापक संदर्भ से जोड़ा। उनके अनुसार, 'कुछ बॉलीवुड हस्तियाँ और तथाकथित बुद्धिजीवी हर बार हिंदू त्योहारों के दौरान किसी न किसी मुद्दे पर सवाल उठाते हैं — होली में पानी की खपत, दही हांडी में सुरक्षा, नवरात्रि में शोर और गणेशोत्सव में प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियाँ।' उपाध्याय ने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान, अमेरिका तथा इजरायल के बीच तनाव में बम और गोले गिरने से बड़े स्तर पर प्रदूषण हो रहा है, फिर भी उस पर उतनी चर्चा नहीं होती।

शिवसेना की राय

शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाइना एनसी ने इस मामले पर कहा, 'दीया मिर्जा के नाम में ही 'दीया' है और उन्हें समझना चाहिए कि दीपावली को प्रकाश का त्योहार कहा जाता है। हर नागरिक जानता है कि प्रदूषण को लेकर सतर्क रहना जरूरी है और पटाखे नहीं फोड़ने चाहिए, क्योंकि स्वास्थ्य और जीवन सबसे पहले है।'

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब BMC ने बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदूषण-मुक्त दीपावली अभियान के लिए मशहूर हस्तियों के वीडियो जारी किए। दीया मिर्जा के वीडियो पर मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम ने आपत्ति जताई, जिसके बाद BMC ने उसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया। यह पहली बार नहीं है कि हिंदू त्योहारों और पर्यावरण के बीच संतुलन का यह सवाल राजनीतिक बहस का केंद्र बना हो — आलोचकों का कहना है कि इस तरह की बहसें प्रदूषण के असली समाधान से ध्यान भटकाती हैं।

आगे क्या होगा

दीया मिर्जा की ओर से अभी तक इन बयानों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। BMC का प्रदूषण-मुक्त दीपावली अभियान जारी है, जिसमें अन्य हस्तियों के वीडियो अब भी उपलब्ध हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस राजनीतिक विवाद के बीच पर्यावरण जागरूकता का संदेश कितना प्रभावी रह पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह उस गहरी खाई को उजागर करता है जो पर्यावरण-जागरूकता और धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान की राजनीति के बीच बन चुकी है। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर शुरू किए गए सरकारी अभियान का वीडियो राजनीतिक दबाव में हटाना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या प्रशासन न्यायपालिका के निर्देश को भी राजनीतिक सुविधा की कसौटी पर तौलता है। आलोचकों का कहना है कि असल चर्चा — मुंबई की खतरनाक वायु गुणवत्ता और उसके स्वास्थ्य पर असर — इस शोर में दब गई। नेताओं द्वारा वैश्विक युद्धों के प्रदूषण से तुलना करना तर्कसंगत बहस से बचने की एक चिरपरिचित रणनीति है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीया मिर्जा और BMC का दीपावली विवाद क्या है?
BMC ने बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदूषण-मुक्त दीपावली अभियान के तहत दीया मिर्जा का वीडियो जारी किया था, जिसमें पटाखे न फोड़ने की अपील थी। मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम की आपत्ति के बाद BMC ने वह वीडियो अपने सोशल मीडिया से हटा दिया।
रामदास आठवले ने दीया मिर्जा पर क्या कहा?
केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कहा कि दीया मिर्जा दूसरे धर्म से आती हैं और उन्हें इस त्योहार की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पटाखों के बिना दीपावली का कोई अर्थ नहीं और इस तरह के बयान हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हैं।
BMC का दीपावली जागरूकता अभियान क्यों शुरू किया गया था?
BMC ने मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए और बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद यह अभियान शुरू किया था। इसमें नागरिकों से पटाखे न फोड़ने और ध्वनि व वायु प्रदूषण से बचने की अपील की गई थी।
क्या BMC के अभियान में अन्य हस्तियाँ भी शामिल थीं?
हाँ, BMC के अभियान में दीया मिर्जा के अलावा अभिनेत्री माधुरी दीक्षित और क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे के वीडियो संदेश भी शामिल थे। केवल दीया मिर्जा का वीडियो विवाद के बाद हटाया गया; बाकी वीडियो अभी भी उपलब्ध हैं।
भाजपा नेताओं ने इस विवाद को किन अन्य हिंदू त्योहारों से जोड़ा?
भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कहा कि होली में पानी की खपत, दही हांडी में सुरक्षा, नवरात्रि में शोर और गणेशोत्सव में प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों को लेकर भी इसी तरह सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने इसे हिंदू त्योहारों को निशाना बनाने की प्रवृत्ति बताया।
राष्ट्र प्रेस
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