3 सितंबर 2026
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सेबी करेगा डेरिवेटिव सेटलमेंट प्राइस पद्धति की समीक्षा, सीएएस लागू होने के बाद अगले सप्ताह परामर्श पत्र

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सेबी करेगा डेरिवेटिव सेटलमेंट प्राइस पद्धति की समीक्षा, सीएएस लागू होने के बाद अगले सप्ताह परामर्श पत्र

सारांश

सेबी ने 3 अगस्त 2026 से लागू क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बाद हितधारकों की प्रतिक्रिया के आधार पर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की सेटलमेंट प्राइस पद्धति की समीक्षा का निर्णय लिया है। अगले सप्ताह परामर्श पत्र जारी होगा।

मुख्य बातें

सेबी ने 3 सितंबर 2026 को घोषणा की कि वह डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की सेटलमेंट प्राइस पद्धति की समीक्षा करेगा।
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) 3 अगस्त 2026 से इक्विटी कैश सेगमेंट में लागू किया गया था।
सीएएस का ढाँचा दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो चरणों में सार्वजनिक परामर्श के बाद तैयार हुआ था।
हितधारकों की प्रमुख माँग — सीएएस क्लोजिंग प्राइस को डेरिवेटिव एक्सपायरी सेटलमेंट का आधार बनाने पर पुनर्विचार — सेबी ने स्वीकार की।
सेबी लगभग एक सप्ताह के भीतर परामर्श पत्र जारी करेगा, जिसमें संभावित बदलाव प्रस्तावित किए जाएंगे।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 3 सितंबर 2026 को घोषणा की कि वह क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) लागू होने के बाद डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस निर्धारित करने की मौजूदा पद्धति की समीक्षा करेगा। इस उद्देश्य से नियामक लगभग एक सप्ताह के भीतर एक परामर्श पत्र जारी करने की तैयारी में है।

सीएएस की पृष्ठभूमि और लागू होने की प्रक्रिया

सेबी के 16 जनवरी 2026 के सर्कुलर के तहत इक्विटी कैश सेगमेंट में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की व्यवस्था 3 अगस्त 2026 से प्रभावी की गई थी। इस व्यवस्था के अंतर्गत सीएएस में निर्धारित होने वाला क्लोजिंग प्राइस ही डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस का आधार बना।

गौरतलब है कि सीएएस का ढाँचा व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया था। इसके लिए दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो चरणों में सार्वजनिक परामर्श आयोजित किए गए थे। इसके अतिरिक्त स्टॉक एक्सचेंजों, ब्रोकर संगठनों, संस्थागत निवेशकों और अन्य बाज़ार सहभागियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई थी।

क्रियान्वयन के बाद हितधारकों से संवाद

सीएएस लागू होने के उपरांत सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों, ब्रोकरों, प्रोपाइटरी ट्रेडर्स, सॉफ्टवेयर विक्रेताओं, म्यूचुअल फंडों, उद्योग संगठनों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) सहित विभिन्न हितधारकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखा। इसका उद्देश्य क्रियान्वयन से जुड़ी परिचालन संबंधी चुनौतियों का समय रहते समाधान करना था।

नियामक ने पहले महीने के दौरान सीएएस के कामकाज और बाज़ार पर उसके प्रभाव की भी निगरानी की। इस अवधि में सोशल मीडिया, मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य माध्यमों से बाज़ार सहभागियों की ओर से बड़ी संख्या में सुझाव और प्रतिक्रियाएँ प्राप्त हुईं।

सबसे प्रमुख मुद्दा: सेटलमेंट प्राइस पद्धति पर पुनर्विचार

सेबी के अनुसार प्राप्त प्रतिक्रियाओं में सबसे उल्लेखनीय माँग यह रही कि डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस को सीएएस से तय क्लोजिंग प्राइस के आधार पर निर्धारित करने की व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए। यह चिंता विशेष रूप से उन बाज़ार सहभागियों की ओर से उठाई गई जो डेरिवेटिव एक्सपायरी के दिन अनिश्चितता का सामना करते हैं।

प्रस्तावित बदलाव और आगे की राह

सेबी ने स्पष्ट किया कि सीएएस के शुरुआती अनुभव और हितधारकों से मिले सुझावों के आधार पर वह डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की सेटलमेंट प्राइस निर्धारित करने की पद्धति में कुछ बदलाव प्रस्तावित कर सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब बाज़ार नियामक डेरिवेटिव बाज़ार में पारदर्शिता और स्थिरता बढ़ाने के व्यापक प्रयासों में लगा हुआ है। परामर्श पत्र जारी होने के बाद हितधारकों को अपनी राय देने का अवसर मिलेगा, जिसके आधार पर अंतिम नीति तैयार की जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी डेरिवेटिव सेटलमेंट प्राइस पद्धति की समीक्षा क्यों कर रहा है?
सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) लागू होने के बाद बाज़ार सहभागियों से मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर यह समीक्षा शुरू की है। हितधारकों की प्रमुख चिंता यह थी कि डेरिवेटिव एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस को सीएएस के क्लोजिंग प्राइस से जोड़ने की व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए।
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) क्या है और यह कब से लागू हुआ?
सीएएस इक्विटी कैश सेगमेंट में ट्रेडिंग के अंत में होने वाला एक विशेष नीलामी सत्र है, जो शेयरों का क्लोजिंग प्राइस निर्धारित करता है। सेबी के 16 जनवरी 2026 के सर्कुलर के तहत यह व्यवस्था 3 अगस्त 2026 से लागू की गई थी।
सेबी का परामर्श पत्र कब जारी होगा?
सेबी ने कहा है कि परामर्श पत्र लगभग एक सप्ताह के भीतर जारी किया जाएगा। इसमें डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की सेटलमेंट प्राइस पद्धति में प्रस्तावित बदलावों का विवरण होगा।
इस बदलाव से कौन से बाज़ार सहभागी प्रभावित होंगे?
यह बदलाव मुख्य रूप से डेरिवेटिव ट्रेडर्स, प्रोपाइटरी ट्रेडर्स, म्यूचुअल फंडों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को प्रभावित करेगा। एक्सपायरी के दिन सेटलमेंट प्राइस की अनिश्चितता इन सभी वर्गों के लिए जोखिम प्रबंधन को प्रभावित करती है।
सीएएस का ढाँचा तैयार करने में किन-किन से परामर्श लिया गया था?
सीएएस का ढाँचा दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो चरणों में सार्वजनिक परामर्श के बाद तैयार हुआ था। इसके अलावा स्टॉक एक्सचेंजों, ब्रोकर संगठनों, संस्थागत निवेशकों, म्यूचुअल फंडों, एफपीआई और अन्य हितधारकों के साथ विस्तृत चर्चा की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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