सेबी करेगा डेरिवेटिव सेटलमेंट प्राइस पद्धति की समीक्षा, सीएएस लागू होने के बाद अगले सप्ताह परामर्श पत्र
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 3 सितंबर 2026 को घोषणा की कि वह क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) लागू होने के बाद डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस निर्धारित करने की मौजूदा पद्धति की समीक्षा करेगा। इस उद्देश्य से नियामक लगभग एक सप्ताह के भीतर एक परामर्श पत्र जारी करने की तैयारी में है।
सीएएस की पृष्ठभूमि और लागू होने की प्रक्रिया
सेबी के 16 जनवरी 2026 के सर्कुलर के तहत इक्विटी कैश सेगमेंट में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की व्यवस्था 3 अगस्त 2026 से प्रभावी की गई थी। इस व्यवस्था के अंतर्गत सीएएस में निर्धारित होने वाला क्लोजिंग प्राइस ही डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस का आधार बना।
गौरतलब है कि सीएएस का ढाँचा व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया था। इसके लिए दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो चरणों में सार्वजनिक परामर्श आयोजित किए गए थे। इसके अतिरिक्त स्टॉक एक्सचेंजों, ब्रोकर संगठनों, संस्थागत निवेशकों और अन्य बाज़ार सहभागियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई थी।
क्रियान्वयन के बाद हितधारकों से संवाद
सीएएस लागू होने के उपरांत सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों, ब्रोकरों, प्रोपाइटरी ट्रेडर्स, सॉफ्टवेयर विक्रेताओं, म्यूचुअल फंडों, उद्योग संगठनों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) सहित विभिन्न हितधारकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखा। इसका उद्देश्य क्रियान्वयन से जुड़ी परिचालन संबंधी चुनौतियों का समय रहते समाधान करना था।
नियामक ने पहले महीने के दौरान सीएएस के कामकाज और बाज़ार पर उसके प्रभाव की भी निगरानी की। इस अवधि में सोशल मीडिया, मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य माध्यमों से बाज़ार सहभागियों की ओर से बड़ी संख्या में सुझाव और प्रतिक्रियाएँ प्राप्त हुईं।
सबसे प्रमुख मुद्दा: सेटलमेंट प्राइस पद्धति पर पुनर्विचार
सेबी के अनुसार प्राप्त प्रतिक्रियाओं में सबसे उल्लेखनीय माँग यह रही कि डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस को सीएएस से तय क्लोजिंग प्राइस के आधार पर निर्धारित करने की व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए। यह चिंता विशेष रूप से उन बाज़ार सहभागियों की ओर से उठाई गई जो डेरिवेटिव एक्सपायरी के दिन अनिश्चितता का सामना करते हैं।
प्रस्तावित बदलाव और आगे की राह
सेबी ने स्पष्ट किया कि सीएएस के शुरुआती अनुभव और हितधारकों से मिले सुझावों के आधार पर वह डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की सेटलमेंट प्राइस निर्धारित करने की पद्धति में कुछ बदलाव प्रस्तावित कर सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब बाज़ार नियामक डेरिवेटिव बाज़ार में पारदर्शिता और स्थिरता बढ़ाने के व्यापक प्रयासों में लगा हुआ है। परामर्श पत्र जारी होने के बाद हितधारकों को अपनी राय देने का अवसर मिलेगा, जिसके आधार पर अंतिम नीति तैयार की जाएगी।