हिमाचल प्रदेश का राजकोषीय घाटा FRBM सीमा से अधिक, राजस्व का 86% वेतन-पेंशन और सब्सिडी पर खर्च: CAG
सारांश
मुख्य बातें
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएँ उठाई हैं। 3 सितंबर को राज्य विधानसभा में पेश की गई वित्तीय वर्ष 2024-25 की CAG रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि राज्य का राजकोषीय घाटा राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के तहत निर्धारित सीमा को पार कर गया है, और कुल राजस्व का 86 प्रतिशत हिस्सा वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी तथा सब्सिडी में खप जाता है। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा सदन के पटल पर रखी गई।
राजकोषीय घाटे की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश का राजस्व घाटा ₹6,804.61 करोड़ रहा, जबकि राजकोषीय घाटा ₹12,611.05 करोड़ यानी GSDP के 5.44 प्रतिशत तक पहुँच गया। CAG ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार FRBM अधिनियम के अंतर्गत तय लक्ष्यों के भीतर इन घाटों को नियंत्रित करने में विफल रही। इसके अतिरिक्त, राज्य की बकाया देनदारियाँ भी 15वें वित्त आयोग और राज्य के स्वयं के बजट अनुमानों द्वारा अनुशंसित सीमाओं से काफी अधिक पाई गईं।
राजस्व का बड़ा हिस्सा अनिवार्य व्यय में
लेखापरीक्षा रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुआ कि राज्य की कुल राजस्व प्राप्ति का लगभग 86 प्रतिशत निर्धारित व्यय और सब्सिडी में चला जाता है, जिससे अवसंरचना विकास और पूंजी निवेश के लिए मात्र 14 प्रतिशत संसाधन शेष रहते हैं। अकेले वेतन, पेंशन और ग्रेच्युटी पर राजस्व व्यय का लगभग 70 प्रतिशत खर्च हो रहा है। CAG ने बिजली सब्सिडी और ऋण राहत उपायों पर बढ़ते व्यय को भी राज्य की वित्तीय सेहत पर अतिरिक्त दबाव का कारण बताया।
आर्थिक वृद्धि, लेकिन राष्ट्रीय योगदान घटा
रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने 2024-25 में 9.20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। बावजूद इसके, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में राज्य का योगदान मात्र 0.70 प्रतिशत रहा और पिछले पाँच वर्षों में इसमें गिरावट आई है, जिसे CAG ने चिंताजनक बताया। राज्य की राजस्व प्राप्ति में 4.34 प्रतिशत की वृद्धि हुई — GST संग्रह और केंद्रीय करों में हिस्सेदारी इसमें सहायक रही — जबकि गैर-कर राजस्व में 22.40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। फिर भी, CAG के अनुसार, राज्य केंद्र से मिलने वाले अनुदानों पर अत्यधिक निर्भर बना हुआ है।
निधि प्रबंधन में अनियमितताएँ
रिपोर्ट में सरकारी निधियों के प्रबंधन में कुछ अनियमितताएँ भी सामने आई हैं। CAG ने पाया कि मिल्क सेस, एनवायरनमेंट सेस और बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर सेस जैसी लेवी से एकत्र धनराशि को सरकारी खाते से बाहर रखा गया था, जो वित्तीय पारदर्शिता के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता है।
आगे की राह
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब हिमाचल प्रदेश सरकार पर कर्ज के बढ़ते बोझ और सीमित राजस्व के बीच विकास योजनाओं को गति देने का दबाव है। CAG की सिफारिशों पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और सुधारात्मक कदम अब विधानसभा और जनता दोनों की निगाह में रहेंगे।