3 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हिमाचल प्रदेश का राजकोषीय घाटा FRBM सीमा से अधिक, राजस्व का 86% वेतन-पेंशन और सब्सिडी पर खर्च: CAG

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हिमाचल प्रदेश का राजकोषीय घाटा FRBM सीमा से अधिक, राजस्व का 86% वेतन-पेंशन और सब्सिडी पर खर्च: CAG

सारांश

CAG की रिपोर्ट ने हिमाचल प्रदेश की माली हालत का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है — राजकोषीय घाटा FRBM की तय सीमा लाँघ गया, राजस्व का 86% वेतन-पेंशन और सब्सिडी में खप जाता है, और विकास के लिए मात्र 14% बचता है। यह रिपोर्ट सुक्खू सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

मुख्य बातें

CAG ने 3 सितंबर को हिमाचल प्रदेश की वित्तीय वर्ष 2024-25 की लेखापरीक्षा रिपोर्ट राज्य विधानसभा में पेश की।
राज्य का राजकोषीय घाटा ₹12,611.05 करोड़ यानी GSDP का 5.44% — FRBM की निर्धारित सीमा से अधिक।
राजस्व घाटा ₹6,804.61 करोड़ ; कुल राजस्व का 86% वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी और सब्सिडी पर खर्च।
अकेले वेतन, पेंशन और ग्रेच्युटी पर राजस्व व्यय का 70% ; विकास के लिए मात्र 14% शेष।
राज्य की अर्थव्यवस्था ने 9.20% वृद्धि दर्ज की, लेकिन GDP में योगदान 0.70% — पाँच वर्षों में गिरावट।
मिल्क सेस, एनवायरनमेंट सेस और निर्माण श्रमिक कल्याण सेस की राशि सरकारी खाते से बाहर रखने की अनियमितता उजागर।

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएँ उठाई हैं। 3 सितंबर को राज्य विधानसभा में पेश की गई वित्तीय वर्ष 2024-25 की CAG रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि राज्य का राजकोषीय घाटा राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के तहत निर्धारित सीमा को पार कर गया है, और कुल राजस्व का 86 प्रतिशत हिस्सा वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी तथा सब्सिडी में खप जाता है। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा सदन के पटल पर रखी गई।

राजकोषीय घाटे की स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश का राजस्व घाटा ₹6,804.61 करोड़ रहा, जबकि राजकोषीय घाटा ₹12,611.05 करोड़ यानी GSDP के 5.44 प्रतिशत तक पहुँच गया। CAG ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार FRBM अधिनियम के अंतर्गत तय लक्ष्यों के भीतर इन घाटों को नियंत्रित करने में विफल रही। इसके अतिरिक्त, राज्य की बकाया देनदारियाँ भी 15वें वित्त आयोग और राज्य के स्वयं के बजट अनुमानों द्वारा अनुशंसित सीमाओं से काफी अधिक पाई गईं।

राजस्व का बड़ा हिस्सा अनिवार्य व्यय में

लेखापरीक्षा रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुआ कि राज्य की कुल राजस्व प्राप्ति का लगभग 86 प्रतिशत निर्धारित व्यय और सब्सिडी में चला जाता है, जिससे अवसंरचना विकास और पूंजी निवेश के लिए मात्र 14 प्रतिशत संसाधन शेष रहते हैं। अकेले वेतन, पेंशन और ग्रेच्युटी पर राजस्व व्यय का लगभग 70 प्रतिशत खर्च हो रहा है। CAG ने बिजली सब्सिडी और ऋण राहत उपायों पर बढ़ते व्यय को भी राज्य की वित्तीय सेहत पर अतिरिक्त दबाव का कारण बताया।

आर्थिक वृद्धि, लेकिन राष्ट्रीय योगदान घटा

रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने 2024-25 में 9.20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। बावजूद इसके, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में राज्य का योगदान मात्र 0.70 प्रतिशत रहा और पिछले पाँच वर्षों में इसमें गिरावट आई है, जिसे CAG ने चिंताजनक बताया। राज्य की राजस्व प्राप्ति में 4.34 प्रतिशत की वृद्धि हुई — GST संग्रह और केंद्रीय करों में हिस्सेदारी इसमें सहायक रही — जबकि गैर-कर राजस्व में 22.40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। फिर भी, CAG के अनुसार, राज्य केंद्र से मिलने वाले अनुदानों पर अत्यधिक निर्भर बना हुआ है।

निधि प्रबंधन में अनियमितताएँ

रिपोर्ट में सरकारी निधियों के प्रबंधन में कुछ अनियमितताएँ भी सामने आई हैं। CAG ने पाया कि मिल्क सेस, एनवायरनमेंट सेस और बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर सेस जैसी लेवी से एकत्र धनराशि को सरकारी खाते से बाहर रखा गया था, जो वित्तीय पारदर्शिता के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता है।

आगे की राह

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब हिमाचल प्रदेश सरकार पर कर्ज के बढ़ते बोझ और सीमित राजस्व के बीच विकास योजनाओं को गति देने का दबाव है। CAG की सिफारिशों पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और सुधारात्मक कदम अब विधानसभा और जनता दोनों की निगाह में रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वर्षों की नीतिगत प्राथमिकताओं का परिणाम है — जहाँ लोकलुभावन सब्सिडी और सरकारी रोज़गार विस्तार ने पूँजीगत व्यय को लगातार हाशिये पर धकेला है। GDP में 0.70% का घटता योगदान यह बताता है कि उच्च विकास दर के बावजूद राज्य की अर्थव्यवस्था राष्ट्रीय औसत से पिछड़ रही है। असली सवाल यह है कि जब राजस्व का 86% अनिवार्य व्यय में जाता हो, तो नई सरकारें विकास का वादा किस आधार पर करती हैं। बिना संरचनात्मक राजकोषीय सुधार के, केंद्रीय अनुदानों पर निर्भरता और बकाया देनदारियों का बोझ आने वाली पीढ़ियों पर स्थानांतरित होता रहेगा।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CAG ने हिमाचल प्रदेश के राजकोषीय घाटे पर क्या कहा?
CAG के अनुसार, हिमाचल प्रदेश का राजकोषीय घाटा 2024-25 में ₹12,611.05 करोड़ यानी GSDP का 5.44% रहा, जो FRBM अधिनियम के तहत निर्धारित सीमा से अधिक है। राज्य सरकार इन घाटों को तय लक्ष्यों के भीतर रखने में विफल रही।
हिमाचल प्रदेश का राजस्व का 86% किस पर खर्च होता है?
CAG रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की कुल राजस्व प्राप्ति का लगभग 86% निर्धारित व्यय और सब्सिडी में खर्च होता है। इसमें अकेले वेतन, पेंशन और ग्रेच्युटी पर राजस्व व्यय का लगभग 70% हिस्सा है, जिससे विकास और पूँजीगत व्यय के लिए केवल 14% बचता है।
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की विकास दर क्या रही?
CAG रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने 2024-25 में 9.20% की वृद्धि दर्ज की। हालाँकि, भारत की GDP में राज्य का योगदान मात्र 0.70% रहा और पिछले पाँच वर्षों में इसमें गिरावट आई है।
CAG ने निधि प्रबंधन में क्या अनियमितताएँ पाईं?
CAG ने पाया कि मिल्क सेस, एनवायरनमेंट सेस और बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर सेस से एकत्र राशि को सरकारी खाते से बाहर रखा गया था, जो वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय अनुदानों पर कितना निर्भर है?
CAG के अनुसार, कुछ राजस्व स्रोतों में सुधार के बावजूद हिमाचल प्रदेश केंद्र से मिलने वाले अनुदानों पर अत्यधिक निर्भर बना हुआ है। राज्य की राजस्व प्राप्ति में 4.34% वृद्धि हुई, जिसमें GST और केंद्रीय करों की हिस्सेदारी प्रमुख रही।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले