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राजस्थान का राजकोषीय घाटा एक दशक से 3% की सीमा पार, सीएजी रिपोर्ट में तीन सरकारों पर सवाल

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राजस्थान का राजकोषीय घाटा एक दशक से 3% की सीमा पार, सीएजी रिपोर्ट में तीन सरकारों पर सवाल

सारांश

सरकारें बदलती रहीं — भाजपा, कांग्रेस, फिर भाजपा — लेकिन राजस्थान का राजकोषीय घाटा एफआरबीएम की 3% सीमा से बाहर ही रहा। सीएजी की रिपोर्ट इसे किसी एक दल की नहीं, राज्य की संरचनागत वित्तीय कमज़ोरी बताती है।

मुख्य बातें

सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान का राजकोषीय घाटा 2015-16 से 2024-25 के बीच लगभग हर वर्ष एफआरबीएम की 3 प्रतिशत सीमा से ऊपर रहा।
घाटा 2015-16 में सर्वाधिक 9.25 प्रतिशत था; 2020-21 में 5.83 प्रतिशत और 2024-25 में 4.25 प्रतिशत दर्ज किया गया।
राज्य ने केवल 2011-12 और 2012-13 में राजस्व अधिशेष हासिल किया; उसके बाद से राजस्व घाटे की स्थिति जारी है।
वसुंधरा राजे , अशोक गहलोत और भजन लाल शर्मा — तीनों सरकारों के कार्यकाल में वित्तीय दबाव बना रहा।
सीएजी ने तिमाही कर राजस्व समीक्षा, ओपीएस के लिए अलग फंड, विभाग-वार डैशबोर्ड और उधार को पूँजीगत संपत्ति निर्माण तक सीमित करने की सिफारिश की।
सरकार के अनुमान के अनुसार घाटा 2028-29 तक 3.29 प्रतिशत पर आने की उम्मीद, लेकिन यह भी सीमा से ऊपर रहेगा।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताज़ा रिपोर्ट ने राजस्थान के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं — यह खुलासा करते हुए कि 2015-16 से 2024-25 के बीच राज्य का राजकोषीय घाटा लगभग हर वर्ष निर्धारित सीमा से ऊपर रहा। रिपोर्ट के अनुसार, वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत और भजन लाल शर्मा — तीनों सरकारों के कार्यकाल में यह प्रवृत्ति बनी रही, जो इसे किसी एक दल की नहीं बल्कि राज्य की संरचनागत समस्या के रूप में रेखांकित करती है।

एक दशक का घाटा: आंकड़े क्या कहते हैं

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान का राजकोषीय घाटा 2015-16 में 9.25 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर था। इसके बाद 2016-17 में यह घटकर 6.09 प्रतिशत और 2017-18 में 3.04 प्रतिशत तक आया — जो 'फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट' (एफआरबीएम) के 3 प्रतिशत के लक्ष्य के सबसे करीब था।

हालांकि 2020-21 में कोविड-19 की छाया में यह उछलकर 5.83 प्रतिशत पर पहुँच गया। बाद के वर्षों में कुछ सुधार दिखा, फिर भी 2023-24 में 4.31 प्रतिशत और 2024-25 में 4.25 प्रतिशत दर्ज किया गया — दोनों ही वर्ष सीमा से ऊपर रहे।

आगे के अनुमान और सरकार का रोडमैप

राज्य के संशोधित अनुमानों के अनुसार 2025-26 में राजकोषीय घाटा 3.89 प्रतिशत और 2026-27 के बजट अनुमान में 3.69 प्रतिशत रहने का अनुमान है। सरकार के मध्यम-अवधि के अनुमान बताते हैं कि 2027-28 में यह 3.49 प्रतिशत और 2028-29 में 3.29 प्रतिशत तक आएगा। गौरतलब है कि ये सभी आँकड़े अभी भी एफआरबीएम की 3 प्रतिशत की सीमा से ऊपर हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य केंद्र सरकार से मिलने वाले ट्रांसफर और सहायता पर काफी हद तक निर्भर बना हुआ है, जबकि राजस्व प्राप्तियाँ बजट अनुमानों से लगातार कम रहती हैं।

राजस्व प्रबंधन की कमज़ोरियाँ

रिपोर्ट में राजस्व प्रबंधन की खामियों को भी रेखांकित किया गया है। राजस्थान ने केवल 2011-12 और 2012-13 में राजस्व अधिशेष (रेवेन्यू सरप्लस) हासिल किया था; उसके बाद राज्य फिर घाटे में चला गया, जिससे खर्चों को पूरा करने के लिए उधार पर निर्भरता बढ़ती गई। आलोचकों का कहना है कि उधार लिए गए फंड का बड़ा हिस्सा पूँजीगत संपत्ति निर्माण की बजाय रोज़मर्रा के राजस्व खर्चों पर खर्च होता रहा, जो दीर्घकालिक वित्तीय स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक है।

सीएजी की प्रमुख सिफारिशें

सीएजी ने राजस्थान के वित्त विभाग को कई सुधारात्मक कदम उठाने का सुझाव दिया है। इनमें शामिल हैं — राज्य के स्वयं के कर राजस्व अनुमानों की तिमाही समीक्षा प्रणाली विकसित करना, संशोधित बजट अनुमानों का विभाग-वार विश्लेषण, और कर राजस्व व जीएसडीपी के अनुपात को बढ़ाने के लिए वार्षिक लक्ष्यों के साथ एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करना।

इसके अलावा, पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के तहत भुगतान के लिए एक अलग फंड बनाने, विभाग-वार अनुदान की निगरानी के लिए एक डैशबोर्ड विकसित करने और प्रमुख राजस्व खर्चों की परिणाम-आधारित निगरानी लागू करने की भी सिफारिश की गई है। ब्याज के बोझ को कम करने के लिए राज्य के कर्ज के पुनर्गठन और सभी सेस (उपकर) से प्राप्त राशि को समय पर निर्धारित सरकारी खातों में जमा करने पर भी जोर दिया गया है।

आगे की राह

सीएजी की यह रिपोर्ट केवल मौजूदा भजन लाल शर्मा सरकार की नीतियों पर नहीं, बल्कि राजस्थान में पिछले एक दशक से अधिक समय में अलग-अलग दलों की सरकारों के दौरान चले वित्तीय प्रबंधन के पैटर्न पर ध्यान केंद्रित करती है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इन सिफारिशों को किस हद तक लागू करती है और क्या आने वाले वर्षों में घाटा वास्तव में एफआरबीएम की सीमा के भीतर आ पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य के बजट-निर्माण की पुरानी कमज़ोरी है। असली सवाल यह है कि एफआरबीएम का ढाँचा होने के बावजूद दस वर्षों में एक बार भी घाटा सीमा के भीतर क्यों नहीं आया — और क्या सिफारिशें लागू करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति मौजूद है। पुरानी पेंशन योजना की वापसी ने दीर्घकालिक देनदारियों को और बढ़ाया है, जिसे रिपोर्ट परोक्ष रूप से रेखांकित करती है। बिना बाध्यकारी जवाबदेही तंत्र के, ये सिफारिशें भी पिछली रिपोर्टों की तरह फाइलों में दब सकती हैं।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएजी की राजस्थान वित्त रिपोर्ट में क्या पाया गया?
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान का राजकोषीय घाटा 2015-16 से 2024-25 के बीच लगभग हर वर्ष एफआरबीएम की 3 प्रतिशत की निर्धारित सीमा से ऊपर रहा। यह प्रवृत्ति वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत और भजन लाल शर्मा — तीनों सरकारों के कार्यकाल में देखी गई।
राजस्थान का राजकोषीय घाटा किस वर्ष सबसे अधिक रहा?
रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 में राजस्थान का राजकोषीय घाटा 9.25 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर था। 2020-21 में कोविड-19 के दौरान यह 5.83 प्रतिशत तक पहुँचा, जबकि 2024-25 में यह 4.25 प्रतिशत दर्ज किया गया।
एफआरबीएम की 3 प्रतिशत सीमा क्या है और राजस्थान इसे क्यों नहीं पूरा कर पाया?
'फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट' (एफआरबीएम) ढाँचे का लक्ष्य राजकोषीय घाटे को जीएसडीपी के 3 प्रतिशत या उससे कम पर लाना है। सीएजी के अनुसार राजस्थान केंद्र सरकार के ट्रांसफर पर अत्यधिक निर्भर रहा, राजस्व प्राप्तियाँ बजट अनुमानों से कम रहीं और उधार का उपयोग पूँजीगत निर्माण की बजाय राजस्व खर्चों पर होता रहा — इन कारणों से सीमा बार-बार टूटती रही।
सीएजी ने राजस्थान के वित्त सुधार के लिए क्या सुझाव दिए हैं?
सीएजी ने तिमाही कर राजस्व समीक्षा प्रणाली, संशोधित बजट अनुमानों का विभाग-वार विश्लेषण, पुरानी पेंशन योजना के लिए अलग फंड, विभाग-वार अनुदान निगरानी डैशबोर्ड और परिणाम-आधारित व्यय निगरानी की सिफारिश की है। साथ ही उधार लिए गए फंड को मुख्यतः पूँजीगत संपत्ति निर्माण पर खर्च करने पर जोर दिया है।
राजस्थान का राजकोषीय घाटा आने वाले वर्षों में कितना रहने का अनुमान है?
सरकार के अनुमानों के अनुसार 2025-26 में घाटा 3.89 प्रतिशत, 2026-27 में 3.69 प्रतिशत, 2027-28 में 3.49 प्रतिशत और 2028-29 में 3.29 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ये सभी आँकड़े अभी भी एफआरबीएम की 3 प्रतिशत सीमा से ऊपर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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