हिमाचल प्रदेश का कर्ज पहली बार 1 लाख करोड़ के पार, कैग रिपोर्ट में गंभीर चिंताएं उजागर

Click to start listening
हिमाचल प्रदेश का कर्ज पहली बार 1 लाख करोड़ के पार, कैग रिपोर्ट में गंभीर चिंताएं उजागर

सारांश

हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति चिंताजनक है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का कर्ज पहली बार 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है, जिससे सरकार की वित्तीय स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं।

Key Takeaways

  • हिमाचल प्रदेश का कर्ज 1 लाख करोड़ के पार जा चुका है।
  • राज्य की आर्थिक स्थिति चिंताजनक है।
  • सरकार को वित्तीय अनुशासन की सख्त जरूरत है।
  • अवैध खनन और राजस्व नुकसान की समस्या बढ़ रही है।
  • प्रशासन की धीमी कार्यप्रणाली से हजारों लेखा आपत्तियां लंबित हैं।

शिमला, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता की लहर दौड़ गई है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य का कुल कर्ज और देनदारियां पहली बार एक लाख करोड़ रुपए से पार कर गई हैं। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में पेश की।

रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक राज्य की कुल देनदारियां 1,04,410 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएंगी, जो पिछले वर्ष 96,522 करोड़ रुपए थीं। राज्य पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है और सरकार अपनी आवश्यकताओं के लिए उधारी पर निर्भर बनी हुई है। इस दौरान सरकार ने 26,622 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया, जबकि 18,168 करोड़ रुपए चुकाए।

इस रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य का राजकोषीय घाटा 12,611 करोड़ और राजस्व घाटा 6,804 करोड़ है। इसका अर्थ यह है कि सरकार की आमदनी उसके खर्च को पूरा करने में असमर्थ है। वहीं, लोक लेखा के अंतर्गत देनदारियां भी बढ़कर 28,851 करोड़ हो गई हैं।

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि राज्य अब भी केंद्र से मिलने वाली सहायता पर अत्यधिक निर्भर है। राज्य को करों में हिस्सेदारी और अनुदान के रूप में अच्छी रकम मिली है, फिर भी आय और खर्च के बीच का अंतर बढ़ता जा रहा है।

वित्तीय स्थिति के अलावा, कई विभागों में भी गंभीर खामियां सामने आई हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी पाई गई है और कई भर्तियों के दस्तावेज सही नहीं मिले। खनन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध खनन और राजस्व नुकसान का खुलासा हुआ है। सिंचाई की कई योजनाएं अधूरी या बेकार पाई गईं, जबकि आपदा प्रबंधन में राहत देने में देरी और गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। वन विभाग में भी फंड के आकलन में खामियां पाई गईं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि हजारों लेखा आपत्तियां और कई कार्यवाही प्रतिवेदन अब तक लंबित हैं, जिससे प्रशासन की धीमी कार्यप्रणाली स्पष्ट होती है।

कुल मिलाकर, रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य को वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने और व्यवस्था में सुधार करने की सख्त आवश्यकता है, वरना भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

Point of View

और सरकार को वित्तीय अनुशासन की सख्त आवश्यकता है। यह एक ऐसा मुद्दा है, जिसे तुरंत हल करना आवश्यक है ताकि राज्य की विकास दर प्रभावित न हो।
NationPress
01/04/2026

Frequently Asked Questions

हिमाचल प्रदेश का कुल कर्ज कितना है?
हिमाचल प्रदेश का कुल कर्ज 1,04,410 करोड़ रुपए पहुंच गया है।
क्या रिपोर्ट में किसी विभाग की खामियां उजागर हुई हैं?
हां, रिपोर्ट में शिक्षकों की कमी, अवैध खनन और अन्य विभागों में खामियां पाई गई हैं।
राज्य की वित्तीय स्थिति पर क्या असर है?
राज्य की वित्तीय स्थिति गंभीर है, जिससे विकास प्रभावित हो सकता है।
क्या राज्य केंद्र से मदद पर निर्भर है?
जी हां, राज्य केंद्र से मिलने वाली मदद पर काफी निर्भर है।
राज्य को वित्तीय अनुशासन की आवश्यकता क्यों है?
राज्य को वित्तीय अनुशासन की आवश्यकता है ताकि भविष्य में स्थिति और गंभीर न हो।
Nation Press