सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे का ऐलान: CAS लागू होने के बाद डेरिवेटिव्स एक्सपायरी सेटलमेंट फ्रेमवर्क की समीक्षा शुरू
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि नियामक अब डेरिवेटिव्स एक्सपायरी सेटलमेंट फ्रेमवर्क से जुड़ी चिंताओं की विधिवत समीक्षा कर रहा है। यह कदम 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) फ्रेमवर्क के लागू होने के बाद उठाया गया है, जो एक्सपायरी के दिनों में डेरिवेटिव्स सेटलमेंट कीमतें निर्धारित करने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
किस मंच पर हुई घोषणा
पांडे नई दिल्ली में आयोजित 'कमोडिटी एंड कैपिटल मार्केट पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (CPAI) के 12वें इंटरनेशनल कन्वेंशन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे बाज़ारों की ज़रूरत है जो कुशलतापूर्वक पूंजी जुटा सकें, जोखिम का प्रबंधन कर सकें और निवेशकों में भरोसा जगा सकें।
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब घरेलू पूंजी बाज़ारों में संरचनात्मक सुधारों को लेकर बहस तेज़ है और बाज़ार नियामक लगातार नए नियामकीय ढाँचे पर काम कर रहा है।
CAS फ्रेमवर्क और समीक्षा की वजह
CAS फ्रेमवर्क को इसलिए लागू किया गया था ताकि केवल वॉल्यूम-वेटेड औसत कीमतों पर निर्भर रहने के बजाय, दिन के अंत में एक ही इक्विलिब्रियम कीमत पर खरीद और बिक्री के ऑर्डर का मिलान करके मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सके। हालाँकि, इस बदलाव के बाद एक्सपायरी के दिनों में डेरिवेटिव्स सेटलमेंट की कीमतें तय करने में नई जटिलताएँ सामने आई हैं, जिनकी समीक्षा अब सेबी कर रहा है।
गौरतलब है कि कैश और डेरिवेटिव्स सेगमेंट के बीच मूल्य-तालमेल को मज़बूत करना सेबी की दीर्घकालिक प्राथमिकताओं में रहा है। यह समीक्षा उसी दिशा में एक और कदम है।
कैश मार्केट और लिक्विडिटी पर ज़ोर
सेबी चेयरमैन ने बताया कि नियामक कैश मार्केट को अधिक गहरा और लिक्विड बनाना चाहता है। इसके लिए सिक्योरिटीज उधार लेने और देने के मज़बूत तंत्र के साथ-साथ हेजिंग और आर्बिट्राज के बेहतर अवसर भी विकसित किए जाएँगे, ताकि कैश और डेरिवेटिव्स सेगमेंट के बीच समन्वय और मज़बूत हो सके।
कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाज़ार में सेबी नॉन-एग्रीकल्चरल कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए 'पोजीशन लिमिट' की भी समीक्षा कर रहा है। पांडे के अनुसार, इस समीक्षा का उद्देश्य रिस्क मैनेजमेंट के मानकों से समझौता किए बिना लिक्विडिटी और बाज़ार की गहराई बढ़ाना है।
FPI पहुँच और GST मुद्दे
पांडे ने बताया कि फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) को अब नॉन-एग्रीकल्चरल कमोडिटी डेरिवेटिव्स तक पहुँच दी गई है। इस कदम से फिज़िकल मार्केट के लिए सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए लिक्विडिटी और प्राइस डिस्कवरी में सुधार की उम्मीद है।
इसके अलावा, सेबी एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के ज़रिए कमोडिटी डिलीवरी में शामिल पक्षों पर असर डालने वाले गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) से जुड़े मुद्दों पर स्टेकहोल्डर्स के साथ संवाद जारी रखेगा।
पूंजी बाज़ार सुधारों का व्यापक एजेंडा
सेबी प्रमुख ने पूंजी बाज़ार को सुलभ बनाने के लिए हाल में किए गए कई सुधारों का उल्लेख किया। इनमें रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए संक्षिप्त और मानकीकृत प्रोस्पेक्टस डिस्क्लोजर, बॉन्ड डिस्ट्रीब्यूशन इकोसिस्टम को मज़बूत करने के उपाय, कॉर्पोरेट बॉन्ड, आरईआईटी (REITs) और इनविट्स (InvITs) में निवेशकों के लिए अधिक लचीलापन, तथा स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से ओपन-मार्केट शेयर बायबैक को फिर से शुरू करना शामिल है।
आने वाले महीनों में सेबी के इन सुधारों का असर बाज़ार की संरचना और निवेशक भागीदारी दोनों पर दिखने की संभावना है।