सेबी का CAS सिस्टम बना पेचीदगी: BSE और NSE पर एक ही स्टॉक की क्लोजिंग प्राइस में भारी अंतर, निवेशक भ्रमित
सारांश
मुख्य बातें
बाज़ार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा लागू किया गया नया प्राइस डिस्कवरी तंत्र — क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) — 4 अगस्त 2026 को उस समय विवादों के घेरे में आ गया जब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर एक ही समय पर एक ही स्टॉक की क्लोजिंग प्राइस में उल्लेखनीय अंतर दर्ज किया गया। इस विसंगति ने खुदरा और संस्थागत निवेशकों, दोनों को भ्रम में डाल दिया है।
मुख्य घटनाक्रम: किन शेयरों में दिखा सबसे बड़ा अंतर
मंगलवार के कारोबारी सत्र के अंत में ट्रेंट का शेयर BSE पर 1.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹3,070 पर बंद हुआ, जबकि NSE पर यही शेयर 1.89 प्रतिशत की तेजी के साथ ₹3,107.70 पर बंद हुआ — दोनों एक्सचेंजों के बीच ₹37.70 का अंतर।
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) की स्थिति और भी चौंकाने वाली रही। BSE पर यह 0.94 प्रतिशत की तेजी के साथ ₹392 पर बंद हुआ, जबकि NSE पर यह 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹391.50 पर बंद हुआ — यानी दोनों एक्सचेंजों पर एक ही शेयर की दिशा ही अलग रही।
बजाज फाइनेंस BSE पर 1.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹1,153 पर बंद हुआ, वहीं NSE पर यह 0.35 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ ₹1,149 पर बंद हुआ। महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) BSE पर ₹3,405 और NSE पर ₹3,433 पर बंद हुआ।
इसके अलावा बजाज फिनसर्व, टाइटन, TCS और अल्ट्राटेक सीमेंट सहित कई अन्य प्रमुख शेयरों में भी यही विसंगति देखी गई।
बेंचमार्क सूचकांकों में भी दिखी दरार
यह असमानता केवल व्यक्तिगत शेयरों तक सीमित नहीं रही — मुख्य सूचकांकों ने भी दिन की शुरुआत से ही अलग-अलग संकेत दिए। सुबह 9:21 बजे IST पर BSE सेंसेक्स 149 अंक (0.19 प्रतिशत) की तेजी के साथ 78,788 पर था, जबकि NSE निफ्टी 160 अंक (0.65 प्रतिशत) की कमज़ोरी के साथ 24,618 पर था — दोनों सूचकांक विपरीत दिशाओं में चल रहे थे।
कारोबार के अंत तक BSE सेंसेक्स 0.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,428.95 पर बंद हुआ और NSE निफ्टी 0.64 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 24,614.90 पर। दोनों प्रमुख सूचकांकों की क्लोजिंग में 0.37 प्रतिशत का अंतर दर्ज किया गया।
सोमवार को भी उठे थे सवाल
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब CAS सिस्टम ने ऐसी विसंगति उत्पन्न की हो। इससे पहले सोमवार को भी — CAS लागू होने के बाद के पहले सत्रों में से एक में — निफ्टी 1.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ और सेंसेक्स 0.7 प्रतिशत की मज़बूती के साथ बंद हुआ था, जो असामान्य रूप से बड़ा अंतर था। यह ऐसे समय में आया है जब SEBI नई व्यवस्था को बाज़ार में पारदर्शिता और बेहतर मूल्य-निर्धारण के लिए एक सुधारात्मक कदम के रूप में पेश कर रहा है।
आम निवेशकों पर असर
दोनों एक्सचेंजों पर क्लोजिंग प्राइस में अंतर से म्यूचुअल फंड NAV गणना, आर्बिट्राज ट्रेडिंग, और पोर्टफोलियो मूल्यांकन पर सीधा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो बाज़ार की विश्वसनीयता और मूल्य-निर्धारण की एकरूपता पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। SEBI की ओर से अभी तक इस विसंगति पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
क्या होगा आगे
बाज़ार विशेषज्ञों की नज़र अब SEBI के अगले कदम पर है। कथित तौर पर, एक्सचेंज और नियामक स्तर पर CAS के क्रियान्वयन की समीक्षा की जा रही है। यदि दोनों प्लेटफॉर्म्स पर मूल्य-निर्धारण की एकरूपता सुनिश्चित नहीं की गई, तो नई व्यवस्था को और परिष्कृत करने की माँग तेज़ हो सकती है।