सेंसेक्स 544 अंक उछला, निफ्टी 24,774 पर बंद; कच्चे तेल की गिरावट से लगातार चौथे सत्र में तेजी
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स सोमवार, 3 अगस्त को 544.39 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की छलांग लगाकर 78,639 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 390.70 अंक यानी 1.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,774.30 पर बंद हुआ। अमेरिका-ईरान शांति समझौते की संभावनाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट ने भारतीय बाजार को लगातार चौथे सत्र में हरे निशान पर बंद कराया।
मुख्य घटनाक्रम
व्यापक बाजार में भी उत्साह देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.21 प्रतिशत चढ़ा, जबकि स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.29 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। यह तेजी संकेत देती है कि बाजार में खरीदारी का दायरा केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा।
सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मीडिया इंडेक्स को छोड़कर — जो 3.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ — सभी क्षेत्रीय सूचकांक हरे निशान में रहे। निफ्टी आईटी इंडेक्स ने 3.28 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद निफ्टी प्राइवेट बैंक (1.90 प्रतिशत), निफ्टी एफएमसीजी (1.72 प्रतिशत), निफ्टी मेटल (1.54 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (1.48 प्रतिशत) और निफ्टी पीएसयू बैंक (1.43 प्रतिशत) का स्थान रहा।
टॉप गेनर और लूज़र
निफ्टी 50 में सबसे अधिक लाभ कमाने वाले शेयरों में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, टीसीएस, इंडिगो, इंफोसिस, श्रीराम फाइनेंस और एक्सिस बैंक शामिल रहे। दूसरी ओर, अपोलो हॉस्पिटल्स, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, ओएनजीसी, टेक महिंद्रा और भारती एयरटेल के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखी गई।
चार सत्रों में निवेशकों की बड़ी कमाई
लगातार चार सत्रों की इस तेजी में सेंसेक्स कुल 1,850 अंक यानी 2.44 प्रतिशत चढ़ा है, जबकि निफ्टी 50 में करीब 800 अंक यानी 3.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सोमवार के एकल सत्र में ही निवेशकों ने करीब ₹4 लाख करोड़ की कमाई की — BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के लगभग ₹486 लाख करोड़ से बढ़कर ₹490 लाख करोड़ से अधिक हो गया। गौरतलब है कि 28 जुलाई को BSE का कुल मार्केट कैप ₹479 लाख करोड़ था, यानी चार सत्रों में निवेशकों की संपत्ति में ₹11 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के बावजूद भारतीय बाजार की मजबूती उल्लेखनीय है। विश्लेषकों का कहना है कि अब निवेश के अवसर व्यापक बाजार की बजाय चुनिंदा शेयरों तक सिमटते जा रहे हैं, जिससे स्टॉक-चयन की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। लार्ज-कैप कंपनियाँ बाहरी अनिश्चितताओं के बीच स्थिरता प्रदान कर रही हैं, जबकि मजबूत बुनियादी ढाँचे वाली चुनिंदा मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियाँ दीर्घकालिक विकास की दृष्टि से आकर्षक मानी जा रही हैं।
आगे क्या
अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में नीतिगत रेपो दर में कोई बदलाव नहीं होगा — हालिया नीतिगत नरमी और मुद्रास्फीति व आर्थिक वृद्धि के संतुलित दृष्टिकोण को देखते हुए। निवेशकों की नजरें केंद्रीय बैंक के तरलता संकेतों, मुद्रास्फीति की दिशा और भविष्य की नीतिगत रणनीति पर टिकी रहेंगी। कॉर्पोरेट आय की रफ्तार, विदेशी निवेश प्रवाह और घरेलू आर्थिक आँकड़े आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा तय करेंगे।