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PM मोदी ने एक्स पर शेयर किया संस्कृत सुभाषित: 'सूर्य और प्रकाश एक-दूसरे पर पूर्णतः आश्रित'

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PM मोदी ने एक्स पर शेयर किया संस्कृत सुभाषित: 'सूर्य और प्रकाश एक-दूसरे पर पूर्णतः आश्रित'

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को एक्स पर सूर्य-प्रकाश की अन्योन्याश्रयता पर आधारित संस्कृत श्लोक साझा किया। यह उनकी नियमित सुभाषित श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें वे प्राचीन भारतीय ज्ञान को राष्ट्र-निर्माण और युवा प्रेरणा से जोड़ते हैं।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 जुलाई को एक्स पर संस्कृत श्लोक 'प्रभया हि विना यद्वद् भानुरेष न विद्यते…' साझा किया।
श्लोक का संदेश: सूर्य और प्रकाश एक-दूसरे पर पूर्णतः आश्रित हैं — अलग-अलग उनका अस्तित्व संभव नहीं।
सोमवार को उन्होंने राष्ट्र प्रगति और जनप्रतिनिधि के कर्तव्यों पर आधारित दो सुभाषित साझा किए थे।
9 जुलाई के सुभाषित में उत्साह, दृढ़ विश्वास और निरंतर पुरुषार्थ को सफलता की कुंजी बताया गया था।
यह श्रृंखला प्राचीन भारतीय ज्ञान को विकसित भारत के विमर्श से जोड़ने का प्रयास है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 13 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें सूर्य और प्रकाश की परस्पर निर्भरता को दर्शाने वाले श्लोक के माध्यम से एक गहरा दार्शनिक संदेश दिया। यह उनकी सोशल मीडिया पर सुभाषित साझा करने की हालिया श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें वे प्राचीन भारतीय ज्ञान को समसामयिक प्रेरणा से जोड़ते हैं।

मंगलवार का सुभाषित: सूर्य और प्रकाश की अन्योन्याश्रयता

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर श्लोक साझा किया — 'प्रभया हि विना यद्वद् भानुरेष न विद्यते। प्रभा च भानुना तेन सुतरां तदुपाश्रया॥' — और इसका भावार्थ स्पष्ट करते हुए लिखा कि जिस प्रकार सूर्य अपनी प्रभा के बिना दृष्टिगोचर नहीं होता, उसी प्रकार प्रकाश का अस्तित्व भी सूर्य के बिना संभव नहीं है। इस प्रकार सूर्य और प्रकाश की शक्ति तथा अस्तित्व एक-दूसरे पर पूर्णतः निर्भर हैं।

सोमवार का सुभाषित: राष्ट्र प्रगति और जनप्रतिनिधि के कर्तव्य

इससे एक दिन पूर्व सोमवार को प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा था, 'जब चौतरफा विकास के साथ हर देशवासी के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित होता है, तब राष्ट्र की प्रगति को भी नई गति मिलती है। इसी प्रेरक भावना के साथ हम भारत के सामर्थ्य को निरंतर मजबूती देने में जुटे हुए हैं।' उन्होंने इसी दिन एक अन्य श्लोक — 'कन्यानां सम्प्रदानञ्च कुमाराणाञ्च रक्षणम्। राष्ट्रस्य सङ्ग्रहे नित्यं विधानमिदमाचरेत्॥' — भी साझा किया, जिसका अर्थ है कि कन्याओं के हितों की समुचित व्यवस्था करना, नई पीढ़ी का संरक्षण एवं विकास सुनिश्चित करना तथा राष्ट्र की एकता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए निरंतर प्रबंधन करना प्रत्येक जनप्रतिनिधि का नित्य कर्तव्य है।

9 जुलाई का सुभाषित: उत्साह और निरंतर प्रयास

9 जुलाई को प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा था, 'दृढ़ विश्वास, सतत प्रयास और सकारात्मक सोच सफलता की असली कुंजी है। हमारे युवा साथी इन्हीं गुणों के साथ पूरे समर्पण भाव से विकसित भारत के निर्माण में जुटे हैं।' इसके साथ उन्होंने संस्कृत श्लोक 'अनिर्वेदः श्रियो मूलमनिर्वेदः परं सुखम्। अनिर्वेदो हि सततं सर्वार्थेषु प्रवर्तकः॥' साझा किया, जिसका भावार्थ है कि उन्नति का मूल आधार उत्साह, दृढ़ विश्वास और निरंतर पुरुषार्थ है। जो व्यक्ति निराश हुए बिना अपने लक्ष्य की ओर सतत प्रयासरत रहता है, वह अंततः सफलता प्राप्त करता है।

सुभाषित श्रृंखला का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से एक्स पर प्राचीन संस्कृत सुभाषितों को साझा करते हैं और उनका हिंदी भावार्थ भी प्रस्तुत करते हैं। यह पहल भारतीय सांस्कृतिक विरासत और शास्त्रीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने के उनके प्रयासों का हिस्सा मानी जाती है। इन सुभाषितों में राष्ट्र-निर्माण, युवा प्रेरणा और सामाजिक दायित्व जैसे विषयों को केंद्र में रखा जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो 'विकसित भारत' के राजनीतिक विमर्श को शास्त्रीय वैधता से जोड़ती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि चुने गए श्लोकों के विषय — राष्ट्र-एकता, कन्या-कल्याण, युवा-प्रेरणा — सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं से सीधे मेल खाते हैं। आलोचक पूछ सकते हैं कि क्या यह दार्शनिक संवाद है या नीतिगत एजेंडे की काव्यात्मक पैकेजिंग — लेकिन यह भी सच है कि संस्कृत ज्ञान परंपरा को मुख्यधारा डिजिटल मंच पर इस पैमाने पर लाना अपने आप में एक उल्लेखनीय सांस्कृतिक हस्तक्षेप है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 13 जुलाई को कौन-सा सुभाषित साझा किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 13 जुलाई को एक्स पर संस्कृत श्लोक 'प्रभया हि विना यद्वद् भानुरेष न विद्यते। प्रभा च भानुना तेन सुतरां तदुपाश्रया॥' साझा किया। इसका अर्थ है कि सूर्य और प्रकाश का अस्तित्व एक-दूसरे पर पूर्णतः निर्भर है।
मोदी के सुभाषित में सूर्य और प्रकाश का क्या संदेश है?
श्लोक यह दर्शाता है कि जैसे सूर्य प्रकाश के बिना दृष्टिगोचर नहीं होता और प्रकाश का अस्तित्व सूर्य के बिना असंभव है, वैसे ही परस्पर निर्भरता ही शक्ति और अस्तित्व का आधार है। यह दार्शनिक संदेश अन्योन्याश्रयता और सहयोग की महत्ता पर बल देता है।
PM मोदी ने सोमवार को कौन-से सुभाषित साझा किए थे?
सोमवार को प्रधानमंत्री ने दो सुभाषित साझा किए — पहला राष्ट्र की प्रगति और चौतरफा विकास पर, और दूसरा संस्कृत श्लोक 'कन्यानां सम्प्रदानञ्च…' जो कन्याओं के हित, नई पीढ़ी के संरक्षण और राष्ट्र की एकता को जनप्रतिनिधि का नित्य कर्तव्य बताता है।
9 जुलाई के सुभाषित में क्या संदेश था?
9 जुलाई को मोदी ने संस्कृत श्लोक 'अनिर्वेदः श्रियो मूलम्…' साझा किया, जिसका भावार्थ है कि उत्साह, दृढ़ विश्वास और निरंतर पुरुषार्थ ही उन्नति का मूल आधार है। इसके साथ उन्होंने युवाओं को विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रेरित किया।
PM मोदी नियमित रूप से सुभाषित क्यों साझा करते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी एक्स पर नियमित रूप से संस्कृत सुभाषित और उनके हिंदी भावार्थ साझा करते हैं, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल माध्यम से आम जनता तक पहुँचाने का प्रयास माना जाता है। इन सुभाषितों में राष्ट्र-निर्माण, युवा प्रेरणा और सामाजिक दायित्व के विषय प्रमुख रहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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