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जेपीएससी धांधली मामला: 22 गिरफ्तार, 7 फरार आरोपितों की तलाश में झारखंड सीआईडी का बड़ा अभियान

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जेपीएससी धांधली मामला: 22 गिरफ्तार, 7 फरार आरोपितों की तलाश में झारखंड सीआईडी का बड़ा अभियान

सारांश

झारखंड सीआईडी ने जेपीएससी परीक्षा धांधली मामले में 22 आरोपित गिरफ्तार कर लिए हैं — जिनमें पूर्व अध्यक्ष और परीक्षा एजेंसी के निदेशक शामिल हैं। अब भी 7 फरार हैं और ओएमआर शीट की कार्बन कॉपियों की स्क्रूटनी से नेटवर्क की और परतें खुलने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

झारखंड सीआईडी ने जेपीएससी परीक्षा धांधली मामले में अब तक 22 आरोपित गिरफ्तार किए हैं।
फरार 7 आरोपितों में आदित्य पांडेय, पवन कुमार सिंह, रविशंकर कुमार, संतोष कुमार सिंह, सानंद प्रकाश, लालू कुमार यादव और सौरभ कुमार पांडेय शामिल हैं।
जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल.
खियांगते और परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक अभय कुमार तिवारी प्रमुख गिरफ्तारशुदा आरोपितों में हैं।
नेटवर्क दिल्ली और मुंबई तक फैला — आईसीएन इंडिया व बिंसिस टेक्नोलॉजीज के प्रतिनिधि भी गिरफ्तार।
सीआईडी ओएमआर शीट की कार्बन कॉपियों का मूल रिकॉर्ड से मिलान कर उत्तरों में संभावित छेड़छाड़ की जाँच कर रही है।

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितता की जाँच कर रही झारखंड सीआईडी ने अपनी कार्रवाई तेज़ कर दी है। 14 अगस्त 2026 तक मामले में कुल 22 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि सात अन्य आरोपित अभी भी फरार हैं। सीआईडी की टीमें इन फरार आरोपितों को पकड़ने के लिए झारखंड के कई जिलों में एक साथ दबिश दे रही हैं।

कौन हैं सात फरार आरोपित

जाँच एजेंसी के अनुसार, फरार आरोपितों में आदित्य पांडेय, पवन कुमार सिंह, रविशंकर कुमार, संतोष कुमार सिंह, सानंद प्रकाश, लालू कुमार यादव और सौरभ कुमार पांडेय शामिल हैं। सीआईडी इन सभी के संभावित ठिकानों के साथ-साथ उनसे जुड़े संपर्कों और सहयोगियों की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन सातों की गिरफ्तारी से कथित धांधली के पूरे नेटवर्क की और कड़ियाँ उजागर हो सकती हैं।

अब तक की प्रमुख गिरफ्तारियाँ

सीआईडी की इस जाँच में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते की गिरफ्तारी को सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। इसके अलावा आयोग की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को भी हिरासत में लिया गया है। परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, उनके मार्केटिंग मैनेजर रामवीर सिंह, तकनीकी प्रोग्रामर मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद एबाद भी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

जाँच का दायरा बढ़ाते हुए सीआईडी ने हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह, संजय कुमार, सोनू कुमार और जेपीएससी कर्मचारी उमेश कुमार को भी गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी अभय तिवारी से जुड़े अरविंद कुमार की भी गिरफ्तारी हो चुकी है।

चयनित अभ्यर्थियों पर भी शिकंजा

जाँच में सामने आया है कि कथित तौर पर अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले कुछ अभ्यर्थी भी इस नेटवर्क का हिस्सा थे। सीआईडी ने बुधेश्वर भगत, रमेश कुमार और उमाकांत उरांव के साथ-साथ चयनित अभ्यर्थियों में रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार और रक्षक सिंह को भी गिरफ्तार किया है। इन पर कथित तौर पर धोखाधड़ी से परीक्षा उत्तीर्ण करने का आरोप है।

दिल्ली और मुंबई तक फैला नेटवर्क

जाँच का दायरा झारखंड से बाहर भी पहुँच गया है। सीआईडी ने परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी आईसीएन इंडिया के मिथिलेश सिंह उर्फ आरके सिंह को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। वहीं, बिंसिस टेक्नोलॉजीज के निदेशक अरुण शर्मा को मुंबई से पकड़ा गया है।

ओएमआर शीट की जाँच और आगे की कार्रवाई

जाँच के दौरान सीआईडी को परीक्षा से जुड़े कई दस्तावेज और साक्ष्य मिले हैं, जिनमें ओएमआर शीट की कार्बन कॉपियाँ भी शामिल हैं। जाँच टीम अब इन कार्बन कॉपियों का मूल रिकॉर्ड से मिलान और स्क्रूटनी कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि परीक्षा में उत्तरों में किसी तरह का बदलाव या अनुचित हस्तक्षेप हुआ था या नहीं। गौरतलब है कि यह मामला झारखंड की सरकारी भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, और फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के साथ पूरी तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ परीक्षा संचालन एजेंसियाँ, आयोग के अधिकारी और तकनीकी ठेकेदार एक साथ कठघरे में हैं। दिल्ली और मुंबई तक फैला नेटवर्क बताता है कि यह स्थानीय नहीं, बल्कि संगठित व्यावसायिक धोखाधड़ी थी। ओएमआर कार्बन कॉपियों की स्क्रूटनी अगर निर्णायक साक्ष्य देती है, तो यह मामला झारखंड में परीक्षा सुधार की माँग को और तेज़ कर सकता है — और उन चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य पर भी सवाल खड़े करेगा जो अब जेल में हैं।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएससी परीक्षा धांधली मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
14 अगस्त 2026 तक झारखंड सीआईडी इस मामले में 22 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष, परीक्षा एजेंसी के निदेशक, तकनीकी कर्मचारी और कथित रूप से धोखाधड़ी से उत्तीर्ण हुए अभ्यर्थी शामिल हैं।
जेपीएससी मामले में कौन-से सात आरोपित अभी भी फरार हैं?
फरार सात आरोपितों के नाम हैं — आदित्य पांडेय, पवन कुमार सिंह, रविशंकर कुमार, संतोष कुमार सिंह, सानंद प्रकाश, लालू कुमार यादव और सौरभ कुमार पांडेय। सीआईडी इनके ठिकानों और संपर्कों की जानकारी जुटाकर कई जिलों में छापेमारी कर रही है।
जेपीएससी धांधली में ओएमआर शीट की जाँच क्यों हो रही है?
सीआईडी को जाँच के दौरान ओएमआर शीट की कार्बन कॉपियाँ मिली हैं। इन्हें मूल रिकॉर्ड से मिलाकर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि परीक्षा में उत्तरों में कोई बदलाव या अनुचित हस्तक्षेप हुआ था या नहीं।
क्या जेपीएससी घोटाले का नेटवर्क झारखंड से बाहर भी फैला था?
हाँ, जाँच में सामने आया है कि यह नेटवर्क दिल्ली और मुंबई तक फैला था। आईसीएन इंडिया के मिथिलेश सिंह उर्फ आरके सिंह को दिल्ली से और बिंसिस टेक्नोलॉजीज के निदेशक अरुण शर्मा को मुंबई से गिरफ्तार किया गया है।
जेपीएससी परीक्षा धांधली मामले में सबसे बड़ी गिरफ्तारी कौन-सी मानी जा रही है?
सीआईडी की कार्रवाई में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते की गिरफ्तारी को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक अभय कुमार तिवारी और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता की गिरफ्तारी भी अहम मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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