जेपीएससी धांधली मामला: 22 गिरफ्तार, 7 फरार आरोपितों की तलाश में झारखंड सीआईडी का बड़ा अभियान
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितता की जाँच कर रही झारखंड सीआईडी ने अपनी कार्रवाई तेज़ कर दी है। 14 अगस्त 2026 तक मामले में कुल 22 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि सात अन्य आरोपित अभी भी फरार हैं। सीआईडी की टीमें इन फरार आरोपितों को पकड़ने के लिए झारखंड के कई जिलों में एक साथ दबिश दे रही हैं।
कौन हैं सात फरार आरोपित
जाँच एजेंसी के अनुसार, फरार आरोपितों में आदित्य पांडेय, पवन कुमार सिंह, रविशंकर कुमार, संतोष कुमार सिंह, सानंद प्रकाश, लालू कुमार यादव और सौरभ कुमार पांडेय शामिल हैं। सीआईडी इन सभी के संभावित ठिकानों के साथ-साथ उनसे जुड़े संपर्कों और सहयोगियों की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन सातों की गिरफ्तारी से कथित धांधली के पूरे नेटवर्क की और कड़ियाँ उजागर हो सकती हैं।
अब तक की प्रमुख गिरफ्तारियाँ
सीआईडी की इस जाँच में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते की गिरफ्तारी को सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। इसके अलावा आयोग की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को भी हिरासत में लिया गया है। परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, उनके मार्केटिंग मैनेजर रामवीर सिंह, तकनीकी प्रोग्रामर मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद एबाद भी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
जाँच का दायरा बढ़ाते हुए सीआईडी ने हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह, संजय कुमार, सोनू कुमार और जेपीएससी कर्मचारी उमेश कुमार को भी गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी अभय तिवारी से जुड़े अरविंद कुमार की भी गिरफ्तारी हो चुकी है।
चयनित अभ्यर्थियों पर भी शिकंजा
जाँच में सामने आया है कि कथित तौर पर अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले कुछ अभ्यर्थी भी इस नेटवर्क का हिस्सा थे। सीआईडी ने बुधेश्वर भगत, रमेश कुमार और उमाकांत उरांव के साथ-साथ चयनित अभ्यर्थियों में रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार और रक्षक सिंह को भी गिरफ्तार किया है। इन पर कथित तौर पर धोखाधड़ी से परीक्षा उत्तीर्ण करने का आरोप है।
दिल्ली और मुंबई तक फैला नेटवर्क
जाँच का दायरा झारखंड से बाहर भी पहुँच गया है। सीआईडी ने परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी आईसीएन इंडिया के मिथिलेश सिंह उर्फ आरके सिंह को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। वहीं, बिंसिस टेक्नोलॉजीज के निदेशक अरुण शर्मा को मुंबई से पकड़ा गया है।
ओएमआर शीट की जाँच और आगे की कार्रवाई
जाँच के दौरान सीआईडी को परीक्षा से जुड़े कई दस्तावेज और साक्ष्य मिले हैं, जिनमें ओएमआर शीट की कार्बन कॉपियाँ भी शामिल हैं। जाँच टीम अब इन कार्बन कॉपियों का मूल रिकॉर्ड से मिलान और स्क्रूटनी कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि परीक्षा में उत्तरों में किसी तरह का बदलाव या अनुचित हस्तक्षेप हुआ था या नहीं। गौरतलब है कि यह मामला झारखंड की सरकारी भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, और फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के साथ पूरी तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।