झारखंड परीक्षा घोटाला: बाबूलाल मरांडी बोले — गिरफ्तारी काफी नहीं, पूरे नेटवर्क की जांच हो
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है। झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 18 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भर से इस मामले की तह तक नहीं पहुंचा जा सकता। उनके अनुसार, कथित गड़बड़ी के पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क और उन 'संरक्षकों' की पहचान अनिवार्य है, जिनकी छत्रछाया में यह व्यवस्था वर्षों तक चलती रही।
मुख्य घटनाक्रम
मरांडी ने कहा कि गिरफ्तारियाँ काफी समय से जारी हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि इस पूरे तंत्र के पीछे और कौन-कौन से चेहरे हैं। उनके शब्दों में, जिन लोगों को अब तक पकड़ा गया है, वे इस पूरे ढाँचे में महज 'इंस्ट्रूमेंट' की भूमिका में हो सकते हैं। उन्होंने कहा, 'गिरफ्तारी अच्छी बात है, लेकिन इससे यह मान लेना सही नहीं होगा कि मामला यहीं खत्म हो गया।'
मरांडी ने पिछले तीन-चार वर्षों में झारखंड में हुई कई परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं में अनियमितताओं की शिकायतों का हवाला दिया। उन्होंने सहायक आचार्यों की नियुक्ति, माध्यमिक विद्यालय शिक्षक भर्ती, महिला पर्यवेक्षिका और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़ी विभिन्न परीक्षाओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कथित तौर पर किसी भी परीक्षा को इस कथित गड़बड़ी से नहीं बख्शा गया।
संगठित गिरोह का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अलग-अलग प्रतिनिधिमंडलों और अभ्यर्थियों से मिली शिकायतों के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएँ एक निरंतर पैटर्न का हिस्सा रही हैं। उनके अनुसार, यदि कई वर्षों में लगातार अलग-अलग परीक्षाओं में एक जैसी गड़बड़ियाँ सामने आ रही हैं, तो यह किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं हो सकती।
मरांडी ने इसे एक संगठित गिरोह का मामला करार देते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर कथित अनियमितताएँ बिना किसी बड़े संरक्षण के इतने लंबे समय तक जारी रहना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच केवल निचले स्तर के लोगों तक सीमित रही तो पूरे नेटवर्क का खुलासा नहीं हो पाएगा।
JPSC और JSSC पर सवाल
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के चेयरमैन की गिरफ्तारी और उनके परिसरों पर छापेमारी का उल्लेख करते हुए मरांडी ने माना कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई से मामले के कुछ पहलू सामने आए हैं। हालाँकि, उन्होंने JSSC के स्तर पर भी जांच आगे बढ़ाने की माँग की।
मरांडी ने बताया कि JSSC के चेयरपर्सन पद पर आईएएस अधिकारी प्रशांत कुमार 2024 से प्रभार में हैं, और अब तक जांच उस स्तर तक पहुँचती नहीं दिख रही। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे यह सवाल उठता है कि क्या ऊँचे पदों पर बैठे कथित 'सफेदपोश' चेहरों को बचाने की कोशिश हो रही है।
CBI जांच की माँग
मरांडी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराए जाने की माँग का समर्थन किया। उनका तर्क है कि केंद्रीय जांच एजेंसी के हस्तक्षेप से पूरे नेटवर्क, कथित आर्थिक लेनदेन, परीक्षा प्रक्रिया में शामिल लोगों और ऊँचे स्तर पर संभावित संरक्षण की भी निष्पक्ष पड़ताल हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि झारखंड के लाखों युवाओं का भरोसा भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर टिका है। यदि बार-बार परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप लगते रहे, तो इससे अभ्यर्थियों का भविष्य अंधकार में पड़ता रहेगा। अभ्यर्थियों की माँग महज गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है — वे चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच हो तथा भ्रष्टाचार की जड़ें कहाँ तक फैली हैं, यह सार्वजनिक हो।
आगे क्या होगा
यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब झारखंड में युवा रोज़गार और सरकारी भर्तियों को लेकर पहले से ही असंतोष व्याप्त है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब राज्य में परीक्षा प्रक्रिया पर उँगली उठी हो — पिछले कुछ वर्षों में कई भर्ती परीक्षाएँ विवादों में रही हैं। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियाँ मरांडी की माँगों के मद्देनज़र अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाती हैं या नहीं।