19 अगस्त 2026
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झारखंड परीक्षा घोटाला: बाबूलाल मरांडी बोले — गिरफ्तारी काफी नहीं, पूरे नेटवर्क की जांच हो

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झारखंड परीक्षा घोटाला: बाबूलाल मरांडी बोले — गिरफ्तारी काफी नहीं, पूरे नेटवर्क की जांच हो

सारांश

झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का सीधा सवाल — गिरफ्तारियाँ हो रही हैं, लेकिन 'संरक्षक' कौन हैं? JPSC से JSSC तक फैले कथित नेटवर्क की CBI जांच की माँग के साथ उन्होंने राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया।

मुख्य बातें

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड परीक्षा घोटाले में केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं, पूरे नेटवर्क की जांच जरूरी है।
पिछले तीन-चार वर्षों में सहायक आचार्य, माध्यमिक शिक्षक, महिला पर्यवेक्षिका और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं।
JPSC चेयरमैन की गिरफ्तारी और परिसरों पर छापेमारी हो चुकी है, लेकिन JSSC स्तर पर जांच अभी तक नहीं पहुँची।
JSSC चेयरपर्सन प्रशांत कुमार (IAS) 2024 से पद पर हैं; मरांडी ने उनके स्तर तक जांच न पहुँचने पर सवाल उठाए।
मरांडी ने CBI जांच की माँग का समर्थन करते हुए कहा कि केंद्रीय एजेंसी ही कथित 'सफेदपोश' संरक्षकों की पहचान कर सकती है।
अभ्यर्थियों की माँग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच हो तथा भ्रष्टाचार की जड़ें उजागर की जाएँ।

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है। झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 18 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भर से इस मामले की तह तक नहीं पहुंचा जा सकता। उनके अनुसार, कथित गड़बड़ी के पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क और उन 'संरक्षकों' की पहचान अनिवार्य है, जिनकी छत्रछाया में यह व्यवस्था वर्षों तक चलती रही।

मुख्य घटनाक्रम

मरांडी ने कहा कि गिरफ्तारियाँ काफी समय से जारी हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि इस पूरे तंत्र के पीछे और कौन-कौन से चेहरे हैं। उनके शब्दों में, जिन लोगों को अब तक पकड़ा गया है, वे इस पूरे ढाँचे में महज 'इंस्ट्रूमेंट' की भूमिका में हो सकते हैं। उन्होंने कहा, 'गिरफ्तारी अच्छी बात है, लेकिन इससे यह मान लेना सही नहीं होगा कि मामला यहीं खत्म हो गया।'

मरांडी ने पिछले तीन-चार वर्षों में झारखंड में हुई कई परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं में अनियमितताओं की शिकायतों का हवाला दिया। उन्होंने सहायक आचार्यों की नियुक्ति, माध्यमिक विद्यालय शिक्षक भर्ती, महिला पर्यवेक्षिका और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़ी विभिन्न परीक्षाओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कथित तौर पर किसी भी परीक्षा को इस कथित गड़बड़ी से नहीं बख्शा गया।

संगठित गिरोह का आरोप

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अलग-अलग प्रतिनिधिमंडलों और अभ्यर्थियों से मिली शिकायतों के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएँ एक निरंतर पैटर्न का हिस्सा रही हैं। उनके अनुसार, यदि कई वर्षों में लगातार अलग-अलग परीक्षाओं में एक जैसी गड़बड़ियाँ सामने आ रही हैं, तो यह किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं हो सकती।

मरांडी ने इसे एक संगठित गिरोह का मामला करार देते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर कथित अनियमितताएँ बिना किसी बड़े संरक्षण के इतने लंबे समय तक जारी रहना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच केवल निचले स्तर के लोगों तक सीमित रही तो पूरे नेटवर्क का खुलासा नहीं हो पाएगा।

JPSC और JSSC पर सवाल

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के चेयरमैन की गिरफ्तारी और उनके परिसरों पर छापेमारी का उल्लेख करते हुए मरांडी ने माना कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई से मामले के कुछ पहलू सामने आए हैं। हालाँकि, उन्होंने JSSC के स्तर पर भी जांच आगे बढ़ाने की माँग की।

मरांडी ने बताया कि JSSC के चेयरपर्सन पद पर आईएएस अधिकारी प्रशांत कुमार 2024 से प्रभार में हैं, और अब तक जांच उस स्तर तक पहुँचती नहीं दिख रही। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे यह सवाल उठता है कि क्या ऊँचे पदों पर बैठे कथित 'सफेदपोश' चेहरों को बचाने की कोशिश हो रही है।

CBI जांच की माँग

मरांडी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराए जाने की माँग का समर्थन किया। उनका तर्क है कि केंद्रीय जांच एजेंसी के हस्तक्षेप से पूरे नेटवर्क, कथित आर्थिक लेनदेन, परीक्षा प्रक्रिया में शामिल लोगों और ऊँचे स्तर पर संभावित संरक्षण की भी निष्पक्ष पड़ताल हो सकेगी।

उन्होंने कहा कि झारखंड के लाखों युवाओं का भरोसा भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर टिका है। यदि बार-बार परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप लगते रहे, तो इससे अभ्यर्थियों का भविष्य अंधकार में पड़ता रहेगा। अभ्यर्थियों की माँग महज गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है — वे चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच हो तथा भ्रष्टाचार की जड़ें कहाँ तक फैली हैं, यह सार्वजनिक हो।

आगे क्या होगा

यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब झारखंड में युवा रोज़गार और सरकारी भर्तियों को लेकर पहले से ही असंतोष व्याप्त है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब राज्य में परीक्षा प्रक्रिया पर उँगली उठी हो — पिछले कुछ वर्षों में कई भर्ती परीक्षाएँ विवादों में रही हैं। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियाँ मरांडी की माँगों के मद्देनज़र अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाती हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनके सवाल ठोस हैं — जब एक के बाद एक परीक्षाओं में एक जैसी गड़बड़ियाँ सामने आती हैं, तो यह संयोग नहीं, प्रणालीगत विफलता का संकेत है। असली परीक्षा जांच एजेंसियों की है: क्या वे JPSC की गिरफ्तारी पर रुकेंगी या JSSC और उससे ऊपर तक जाएँगी? झारखंड में सरकारी नौकरी लाखों युवाओं का एकमात्र सपना है — यदि भर्ती प्रक्रिया पर से भरोसा उठ गया, तो इसकी सामाजिक कीमत किसी भी राजनीतिक बयानबाज़ी से कहीं बड़ी होगी।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड परीक्षा घोटाले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
अब तक JPSC के चेयरमैन की गिरफ्तारी हो चुकी है और उनके परिसरों पर छापेमारी भी की गई है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई से मामले के कुछ पहलू सामने आए हैं, लेकिन नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के अनुसार JSSC स्तर तक जांच अभी नहीं पहुँची है।
बाबूलाल मरांडी CBI जांच की माँग क्यों कर रहे हैं?
मरांडी का तर्क है कि राज्य स्तर की जांच एजेंसियाँ कथित 'सफेदपोश' संरक्षकों तक पहुँचने में सक्षम नहीं दिख रहीं। CBI जांच से पूरे नेटवर्क, आर्थिक लेनदेन और ऊँचे स्तर पर संभावित संरक्षण की निष्पक्ष पड़ताल हो सकती है।
किन परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की शिकायतें आई हैं?
मरांडी के अनुसार पिछले तीन-चार वर्षों में सहायक आचार्य नियुक्ति , माध्यमिक विद्यालय शिक्षक भर्ती , महिला पर्यवेक्षिका और JSSC से जुड़ी विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। उनका आरोप है कि कथित तौर पर किसी भी परीक्षा को नहीं छोड़ा गया।
JSSC के चेयरपर्सन पद पर कौन हैं और उन पर सवाल क्यों?
आईएएस अधिकारी प्रशांत कुमार 2024 से JSSC के चेयरपर्सन पद पर प्रभार में हैं। मरांडी ने सवाल उठाया है कि जांच अभी तक उस स्तर तक क्यों नहीं पहुँची, और क्या ऊँचे पदों पर बैठे लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है।
इस घोटाले से झारखंड के अभ्यर्थियों पर क्या असर पड़ रहा है?
लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा सरकारी भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर टिका है। बार-बार अनियमितताओं के आरोपों से उनके भविष्य पर सीधा असर पड़ता है। अभ्यर्थी केवल गिरफ्तारियाँ नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया की व्यापक और निष्पक्ष जांच चाहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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