PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: प्राण, धन, बुद्धि और वाणी से सदा परोपकार करें
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें उन्होंने मनुष्य जीवन की सार्थकता को परोपकार और कल्याणकारी कर्मों में निहित बताया। यह श्लोक उनकी हालिया सुभाषित-श्रृंखला का नवीनतम भाग है, जो वे प्रतिदिन एक्स पर साझा कर रहे हैं।
बुधवार का सुभाषित और उसका अर्थ
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया: 'एतावज्जन्मसाफल्यं देहिनामिह देहिषु। प्राणैरर्थैर्धिया वाचा श्रेय एवाचरेत्सदा॥' इस श्लोक का भाव है कि इस संसार में मनुष्य के जन्म की पूर्ण सार्थकता इसी में है कि वह अपने शारीरिक सामर्थ्य, धन-संपत्ति, बुद्धि तथा वाणी के माध्यम से अन्य प्राणियों के प्रति सदैव परोपकार एवं कल्याणकारी कर्मों का संपादन करे। यह संदेश सेवा और समर्पण की भारतीय परंपरा को रेखांकित करता है।
पिछले दिनों के सुभाषित: एक श्रृंखला
मंगलवार को प्रधानमंत्री ने एक्स पर 'उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्। अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥' श्लोक साझा किया था। इसका भाव था कि मनुष्य को आत्मसम्मान, साहस और स्वाभिमान के साथ जीवन जीना चाहिए — किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों से समझौता न करते हुए सत्य और धैर्य पर दृढ़ रहना ही सच्चा पुरुषार्थ है।
सोमवार को साझा किए गए सुभाषित में एकता और सामूहिक संकल्प का संदेश था। प्रधानमंत्री ने लिखा था, 'सामूहिक संकल्प और एकता की शक्ति से ही देश आगे बढ़ता है। यही भावना भारत की प्रगति और समृद्धि की मजबूत नींव है।' उन्होंने 'समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः। समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥' श्लोक भी साझा किया, जिसका अर्थ है कि सबके संकल्प, मन और हृदय एक समान हों, जिससे परस्पर सहयोग से समाज की उन्नति हो।
14 अगस्त: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर संदेश
इस श्रृंखला की शुरुआत से पहले, 14 अगस्त को प्रधानमंत्री ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर एक्स पर लिखा था: 'उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है। आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें।'
सुभाषित-श्रृंखला का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नियमित रूप से प्राचीन भारतीय ग्रंथों से प्रेरणा लेकर सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और सेवा-भाव को प्रोत्साहित कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह श्रृंखला स्वतंत्रता दिवस सप्ताह के दौरान साझा की गई, जो राष्ट्रीय एकता और नागरिक कर्तव्य के व्यापक विमर्श से जुड़ती है। आने वाले दिनों में इस सुभाषित-श्रृंखला के और अध्यायों की संभावना है।